विद्या मालवडे का साइबर फ्रॉड खुलासा: घर में काम करने वाली का बैंक अकाउंट हो गया था साफ
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री विद्या मालवडे ने माइक्रो-ड्रामा 'स्कैम 2024- द डिजिटल अरेस्ट स्टोरी' में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए एक ऐसा निजी अनुभव साझा किया जिसने उन्हें इस प्रोजेक्ट से और गहरे स्तर पर जोड़ दिया। उन्होंने बताया कि उनके अपने घर में काम करने वाली सहायिका साइबर ठगी का शिकार हो चुकी है, जिसके बाद उनका पूरा बैंक अकाउंट खाली हो गया था।
निजी अनुभव ने किया प्रोजेक्ट से जुड़ाव
विद्या मालवडे ने बताया, 'मुझे लगा कि कहानी बहुत ही रिलेवेंट है और मेरे कैरेक्टर प्रिया को बहुत अच्छे से लिखा गया है। हम लगभग हर दिन लोगों के साथ ठगी होने के बारे में सुनते हैं और ऐसा ही कुछ मेरे अपने घर में भी हुआ था, जिस वजह से यह प्रोजेक्ट मेरे लिए और भी ज्यादा करीब हो गया।'
यह घटना करीब डेढ़ से दो साल पहले की है। अभिनेत्री के अनुसार उनकी हाउस हेल्प, जो पिछले 15 वर्षों से उनके साथ काम कर रही है, एक दिन एटीएम से पैसे नहीं निकाल पाई। जब वह घर लौटी और पासबुक दिखाई, तब पता चला कि अकाउंट पहले ही खाली किया जा चुका है।
कैसे हुई ठगी, पता भी नहीं चला
विद्या मालवडे ने विस्तार से बताया, 'शुरुआत में हमें लगा कि शायद वह कुछ भूल गई होगी या एटीएम कार्ड में दिक्कत होगी, लेकिन जब मैंने पासबुक चेक की, तो सच्चाई सामने आई।' ठगों ने दो बार में उनकी सहायिका का पूरा पैसा निकाल लिया था। ये ट्रांजैक्शन 10 से 15 दिन पहले हो चुके थे और बैंक के मैसेज पर ध्यान न जाने के कारण उन्हें समय पर पता नहीं चल पाया।
अभिनेत्री ने इसे 'बहुत ही शॉकिंग एक्सपीरियंस' बताया। उन्होंने कहा, 'जब तक हमें पता चला, तब तक उसका पूरा अकाउंट खाली हो चुका था।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के मामलों में तेज़ बढ़ोत्तरी दर्ज की जा रही है।
सीरीज़ की कहानी और मुख्य किरदार
'स्कैम 2024- द डिजिटल अरेस्ट स्टोरी' में विद्या मालवडे 'प्रिया शर्मा' नामक एक कामकाजी महिला की भूमिका निभा रही हैं, जो डिजिटल अरेस्ट यानी साइबर ठगी का शिकार हो जाती है। सीरीज़ में प्रतीक सहजपाल विक्की मंडल के रूप में और विनीत रैना निलंबित अधिकारी राज ठाकुर के रूप में मुख्य भूमिकाओं में हैं।
इस माइक्रो-ड्रामा का निर्माण 'स्मॉल टाउन बॉयज' ने किया है और इसे आलोक शर्मा ने निर्देशित किया है। सीरीज़ डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड के बढ़ते खतरों पर आधारित है।
साइबर फ्रॉड की बढ़ती चुनौती
गौरतलब है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध अब केवल शहरों तक सीमित नहीं हैं — छोटे कस्बों और कम डिजिटल साक्षरता वाले वर्गों को भी तेज़ी से निशाना बनाया जा रहा है। विद्या मालवडे का यह अनुभव इस बात की याद दिलाता है कि साइबर ठग किसी भी वर्ग को नहीं छोड़ते। इस तरह की जागरूकता-केंद्रित सामग्री समाज को सचेत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।