टीवी अभिनेता राहुल सिंह तोमर साइबर धोखाधड़ी का शिकार, बैंक से ₹85,000 हस्तांतरित

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टीवी अभिनेता राहुल सिंह तोमर साइबर धोखाधड़ी का शिकार, बैंक से ₹85,000 हस्तांतरित

सारांश

मुंबई के साइबर ठग एक और बड़ी सफलता पाने के करीब थे — जब तक कि एक टीवी अभिनेता की तेज़ी से की गई कार्रवाई ने उनकी योजना को बर्बाद न कर दिया। राहुल सिंह तोमर की कहानी दिखाती है कि कैसे सोशल इंजीनियरिंग और डिजिटल धोखाधड़ी मिलकर किसी के भी बैंक खाते को जोखिम में डाल सकते हैं — और कैसे जागरूकता उस जोखिम को कम कर सकती है।

मुख्य बातें

राहुल सिंह तोमर , 'क्राइम पेट्रोल' और 'गुस्ताख दिल' के अभिनेता, साइबर ठगों का शिकार हुए।
ठगों ने सोशल इंजीनियरिंग के ज़रिए उनके बैंक खाते से ₹85,000 हस्तांतरित किए।
राहुल ने समय पर खाता ब्लॉक किया; ठगों की ₹32,000 की अतिरिक्त वसूली की कोशिश नाकाम रही।
अंबोली पुलिस स्टेशन , मुंबई में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध केस दर्ज किया गया।
पीड़ित को साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गई।

मुंबई में साइबर अपराध की वारदातें तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसी क्रम में राहुल सिंह तोमर, जो 'क्राइम पेट्रोल' और 'गुस्ताख दिल' जैसी लोकप्रिय टीवी सीरीज़ में नज़र आ चुके हैं, साइबर ठगों के निशाने पर आ गए। ठगों ने सोफ़िस्टिकेटेड तरीके से 32 वर्षीय अभिनेता को निशाना बनाया और उनके बैंक खाते से ₹85,000 हस्तांतरित कर दिए। तत्परता से खाता ब्लॉक किए जाने से ठगों की अतिरिक्त ₹32,000 की वसूली की कोशिश नाकाम रही।

धोखाधड़ी की योजना

घटना 5 मई को घटी, जब राहुल को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने उनके नाम, पते और पेशे की जानकारी माँगी। क्योंकि राहुल मनोरंजन उद्योग से जुड़े हैं, उन्होंने इसे काम से संबंधित कॉल समझा और बिना किसी संदेह के सामान्य विवरण साझा कर दिए। महज़ 30 मिनट के भीतर, उन्हें बैंक की ओर से एक सूचना मिली कि उनके खाते से ₹85,000 'डोंगरी सुप्रिया' नामक यूपीआई आईडी पर स्थानांतरित कर दिए गए हैं।

अभिनेता की तत्परता ने नुक़सान को सीमित किया

सबसे गंभीर पहलू यह था कि राहुल ने न तो कोई लेनदेन किया था और न ही अपना ओटीपी या यूपीआई पिन किसी के साथ साझा किया था। इसका मतलब है कि ठगों ने किसी अन्य माध्यम से उनके खाते तक पहुँच हासिल कर ली थी। राहुल ने तुरंत अपने बैंक के ग्राहक सेवा से संपर्क किया और अपना खाता तत्काल ब्लॉक करवाया। साथ ही, उन्होंने साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत दर्ज की। प्रारंभिक जाँच में पता चला कि ठगों ने उसी यूपीआई आईडी पर ₹12,000, ₹10,000 और ₹9,999 की अतिरिक्त वसूली का प्रयास किया था, लेकिन खाता समय पर ब्लॉक हो जाने के कारण ये लेनदेन विफल रहे।

पुलिस कार्रवाई

राहुल ने जब संदिग्ध नंबर पर दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, तो वह ब्लॉक पाया गया। इसके बाद उन्होंने मुंबई के अंबोली पुलिस स्टेशन में अज्ञात आरोपी के विरुद्ध एक शिकायत दर्ज की। पुलिस ने साइबर अपराध की एफआईआर दर्ज की है और जाँच जारी है। अधिकारियों के अनुसार, ऐसी घटनाओं में आमतौर पर ठग सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों का उपयोग करके व्यक्तिगत जानकारी प्राप्त करते हैं।

राहुल सिंह तोमर का करियर

राहुल सिंह तोमर मूल रूप से मध्य प्रदेश के पीथमपुर के रहने वाले हैं और वर्तमान में मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित अंबोली इलाके में रहते हैं। वे टीवी उद्योग में कई वर्षों से सक्रिय हैं। उन्होंने 'क्राइम पेट्रोल', 'गुस्ताख दिल' और 'जमुना पार' जैसी लोकप्रिय सीरीज़ में काम किया है। इसके अलावा, वे 'सॉल्ट सिटी', 'इंडस्ट्री' और 'कर्मा' जैसी वेब सीरीज़ में भी दिखाई दिए हैं।

साइबर सुरक्षा की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि अज्ञात स्रोतों से कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा करना ख़तरनाक है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि अपने ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंकिंग विवरण कभी किसी के साथ साझा न करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि देखें, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और साइबर अपराध शिकायत पोर्टल (cybercrime.gov.in) पर रिपोर्ट दर्ज करें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सार्वजनिक व्यक्तित्वों को भी अपने निशाने में ले रहे हैं, क्योंकि उनकी सोशल मीडिया उपस्थिति उनकी जानकारी को अधिक सुलभ बनाती है। राहुल की तत्परता ने उन्हें और नुक़सान से बचाया, लेकिन यह भी दर्शाता है कि ₹85,000 का नुक़सान पहले ही हो चुका था — एक ऐसी रकम जो अधिकांश भारतीय परिवारों के लिए महीनों की बचत है। बैंकों को अपनी सुरक्षा प्रणालियों को मज़बूत करने की आवश्यकता है, और नागरिकों को बेहतर साइबर साक्षरता की ज़रूरत है। हालांकि, जब तक पुलिस अपने साइबर सेल को पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण नहीं देती, ये घटनाएँ बढ़ती रहेंगी।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राहुल सिंह तोमर को साइबर ठगी कैसे हुई?
एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने राहुल से उनके नाम, पते और पेशे की जानकारी माँगी। राहुल ने इसे काम से संबंधित कॉल समझा और जानकारी साझा कर दी। 30 मिनट के भीतर, ₹85,000 उनके खाते से एक संदिग्ध यूपीआई आईडी पर स्थानांतरित कर दिए गए।
राहुल ने कितना नुक़सान रोक पाए?
राहुल ने तुरंत अपना बैंक खाता ब्लॉक किया, जिससे ठगों की ₹12,000, ₹10,000 और ₹9,999 की अतिरिक्त वसूली की कोशिशें विफल रहीं। कुल मिलाकर, उन्होंने ₹32,000 का नुक़सान रोका।
इस मामले में पुलिस ने क्या कदम उठाए हैं?
मुंबई के अंबोली पुलिस स्टेशन में एक साइबर अपराध केस दर्ज किया गया है। राहुल ने साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन 1930 पर भी शिकायत दर्ज की है। पुलिस वर्तमान में संदिग्ध यूपीआई आईडी और लेनदेन के विवरण की जाँच कर रही है।
क्या राहुल सिंह तोमर के बैंक में सुरक्षा की खामी थी?
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, राहुल ने न तो कोई लेनदेन किया था और न ही अपना ओटीपी या यूपीआई पिन साझा किया था। इसका सुझाव है कि ठगों ने किसी अन्य विधि से उनके खाते तक पहुँच हासिल की थी — संभवतः सोशल इंजीनियरिंग या ठर्ड-पार्टी डेटा लीक के माध्यम से।
साइबर ठगी से बचने के लिए नागरिकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
अज्ञात स्रोतों से कॉल पर व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। अपने ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंकिंग विवरण कभी किसी के साथ साझा न करें। संदिग्ध गतिविधि देखने पर तुरंत बैंक को सूचित करें। साइबर अपराध शिकायत पोर्टल cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।
राष्ट्र प्रेस
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