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मुंबई: महानगर गैस के नाम पर APK फ्रॉड, ₹9.98 लाख की ठगी में दो गिरफ्तार

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मुंबई: महानगर गैस के नाम पर APK फ्रॉड, ₹9.98 लाख की ठगी में दो गिरफ्तार

सारांश

मुंबई के दहिसर पूर्व में महानगर गैस का कर्मचारी बनकर साइबर ठगों ने एक महिला को APK फाइल डाउनलोड करवाई और बैंक खाते से ₹9.98 लाख उड़ा लिए। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है — और चेतावनी दी है कि वरिष्ठ नागरिक इस जाल के मुख्य शिकार बन रहे हैं।

मुख्य बातें

दहिसर पूर्व, मुंबई में एक महिला से महानगर गैस के नाम पर ₹9 लाख 98 हजार की साइबर ठगी हुई।
आरोपियों ने व्हाट्सएप कॉल पर खुद को महानगर गैस लिमिटेड का कर्मचारी बताकर APK फाइल डाउनलोड करवाई।
पुलिस ने आयुष राजेश गुप्ता और अंकित संजय तिवारी को गिरफ्तार किया।
ठगी की रकम फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी।
पुलिस उपायुक्त गजानन राजमाने के अनुसार, ये अपराधी मुख्यतः सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं।
पुलिस ने नागरिकों को अनजान APK फाइल डाउनलोड न करने और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना देने की सलाह दी।

मुंबई के दहिसर पूर्व इलाके में एक महिला से महानगर गैस लिमिटेड का कर्मचारी बनकर साइबर ठगों ने ₹9 लाख 98 हजार की धोखाधड़ी की। पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर दो आरोपियों — आयुष राजेश गुप्ता और अंकित संजय तिवारी — को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया है।

कैसे दिया गया ठगी को अंजाम

आरोपियों ने पीड़ित महिला को व्हाट्सएप कॉल के ज़रिए संपर्क किया और खुद को महानगर गैस लिमिटेड का कर्मचारी बताया। उन्होंने कहा कि दस्तावेज़ अपडेट न करने पर गैस कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद एक APK फाइल व्हाट्सएप पर भेजकर उसे डाउनलोड करवाया गया, जिससे पीड़िता के मोबाइल की सारी जानकारी — बैंक विवरण सहित — आरोपियों तक पहुँच गई।

फाइल डाउनलोड होते ही आरोपियों ने पीड़िता के बैंक खाते से ₹9 लाख 98 हजार निकाल लिए। ठगी की यह रकम बाद में अलग-अलग फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।

पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी

मामले में दहिसर पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और बैंक खातों की जानकारी के आधार पर जांच की। इसी के आधार पर आयुष राजेश गुप्ता और अंकित संजय तिवारी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने डिजिटल माध्यमों और फर्जी बैंक खातों का उपयोग कर ठगी की रकम हासिल की। आगे की जांच जारी है।

वरिष्ठ नागरिक बने मुख्य निशाना

पुलिस उपायुक्त (नॉर्थ जोन 3) गजानन राजमाने ने बताया कि ये साइबर अपराधी मुख्य रूप से सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं। APK फाइल डाउनलोड होते ही मोबाइल में मौजूद समस्त जानकारी अपराधियों के पास चली जाती है, जिसका वे तत्काल दुरुपयोग करते हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में गैस कनेक्शन और KYC अपडेट के नाम पर साइबर धोखाधड़ी की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि APK-आधारित मैलवेयर फ्रॉड भारत के महानगरों में तेज़ी से फैल रहा है।

नागरिकों के लिए पुलिस की सलाह

दहिसर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि गैस बिल अपडेट, KYC या किसी भी सरकारी सेवा के नाम पर भेजी गई APK फाइल को कभी डाउनलोड न करें। अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें और किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

पुलिस ने स्पष्ट किया कि कोई भी वैध गैस कंपनी फोन या व्हाट्सएप के ज़रिए APK फाइल नहीं भेजती। ऐसी किसी भी कॉल को तत्काल काट दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिजली, पानी) की आड़ में वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं। APK-आधारित मैलवेयर तकनीकी रूप से सरल लेकिन घातक रूप से प्रभावी है, और इसके लिए किसी बैंकिंग OTP की भी ज़रूरत नहीं पड़ती। सवाल यह है कि जब ऐसे मामले बार-बार सामने आ रहे हैं, तो महानगर गैस जैसी कंपनियाँ ग्राहकों को सक्रिय रूप से सतर्क क्यों नहीं करतीं — SMS, बिल पर अलर्ट, या IVR के ज़रिए? गिरफ्तारी स्वागत योग्य है, लेकिन रोकथाम की ज़िम्मेदारी केवल पुलिस पर नहीं डाली जा सकती।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में महानगर गैस के नाम पर क्या ठगी हुई?
दहिसर पूर्व, मुंबई में साइबर ठगों ने एक महिला को व्हाट्सएप पर APK फाइल डाउनलोड करवाकर उनके बैंक खाते से ₹9 लाख 98 हजार निकाल लिए। आरोपियों ने खुद को महानगर गैस लिमिटेड का कर्मचारी बताकर गैस कनेक्शन काटने की धमकी दी थी।
APK फाइल डाउनलोड करने से क्या खतरा होता है?
APK फाइल एक मैलवेयर प्रोग्राम होती है जो मोबाइल में इंस्टॉल होते ही बैंकिंग विवरण, OTP और अन्य संवेदनशील जानकारी अपराधियों को भेज देती है। पुलिस उपायुक्त गजानन राजमाने के अनुसार, इससे मोबाइल में मौजूद सारी जानकारी ठगों के पास चली जाती है।
इस मामले में किसे गिरफ्तार किया गया?
पुलिस ने आयुष राजेश गुप्ता और अंकित संजय तिवारी को मुंबई से गिरफ्तार किया। तकनीकी जांच और बैंक खातों की ट्रेसिंग के आधार पर इनकी पहचान हुई। मामले की आगे की जांच जारी है।
साइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
दहिसर पुलिस ने सलाह दी है कि गैस बिल अपडेट या KYC के नाम पर भेजी गई किसी भी APK फाइल को डाउनलोड न करें और अनजान लिंक पर क्लिक न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर दें।
इस तरह के साइबर फ्रॉड का मुख्य निशाना कौन होता है?
पुलिस उपायुक्त गजानन राजमाने के अनुसार, ये साइबर अपराधी मुख्य रूप से सेवानिवृत्त वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाते हैं, जो डिजिटल सुरक्षा के प्रति कम जागरूक होते हैं। APK फाइल के ज़रिए उनका मोबाइल डेटा चुराकर बैंक खाते खाली किए जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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