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मुंबई पुलिस ने पश्चिम बंगाल से साइबर ठग गिरफ्तार किया, नकली APK से ₹63 करोड़ की ठगी का खुलासा

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मुंबई पुलिस ने पश्चिम बंगाल से साइबर ठग गिरफ्तार किया, नकली APK से ₹63 करोड़ की ठगी का खुलासा

सारांश

मुंबई पुलिस ने पश्चिम बंगाल से एक साइबर ठग को गिरफ्तार किया जिसने महानगर गैस के नाम पर नकली APK फाइलें भेजकर कथित तौर पर ₹63 करोड़ की ठगी की और 37,200 लोगों का बैंकिंग डेटा चुराया। एक ही दिन में मुंबई और दिल्ली — दोनों में बड़े साइबर नेटवर्क का भंडाफोड़ बताता है कि संगठित डिजिटल अपराध अब बैंकिंग तंत्र के भीतर तक पहुँच चुका है।

मुख्य बातें

मुंबई डीबी मार्ग पुलिस ने 29 जुलाई 2026 को पश्चिम बंगाल से साइबर ठग को गिरफ्तार किया।
आरोपी पर महानगर गैस लिमिटेड के नाम पर नकली APK फाइलों से कथित तौर पर ₹63 करोड़ की ठगी का आरोप।
बरामदगी में 10 मोबाइल , 1 लैपटॉप , 7 सिम कार्ड और 37,200 लोगों का बैंकिंग डेटाबेस शामिल।
मामला BNS और IT Act के तहत दर्ज; आगे की जांच जारी।
दिल्ली पुलिस ने अलग कार्रवाई में म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया — 6 गिरफ्तार , ₹70 करोड़+ के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा।
दिल्ली मामले में सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक का एक ब्रांच मैनेजर और इंडसइंड बैंक के 4 अधिकारी भी आरोपियों में।

मुंबई की डीबी मार्ग पुलिस ने 29 जुलाई 2026 को एक अंतरराज्यीय साइबर अपराधी को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया, जिस पर महानगर गैस लिमिटेड के नाम पर नकली एपीके (एंड्रॉइड पैकेज किट) फाइलें भेजकर लोगों से कथित तौर पर ₹63 करोड़ की साइबर ठगी करने का आरोप है। यह कार्रवाई एक पीड़ित की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच की परिणति है, जिसमें बैंकिंग डेटा चोरी कर ₹70,500 की धोखाधड़ी की गई थी।

कैसे अंजाम दी जाती थी ठगी

आरोपी महानगर गैस लिमिटेड के नाम पर फर्जी संदेश भेजता था, जिसमें उपभोक्ताओं को एक नकली एपीके फाइल इंस्टॉल करने के लिए प्रेरित किया जाता था। एक बार यह फाइल मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद, उपयोगकर्ता के फोन में मौजूद बैंकिंग से जुड़ी गोपनीय जानकारी चोरी हो जाती थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी के पास 37,200 लोगों के बैंकिंग डेटा का डेटाबेस बरामद हुआ है, जो इस अपराध की व्यापक पहुँच को उजागर करता है।

बरामदगी और गिरफ्तारी

पुलिस ने आरोपी के पास से 10 मोबाइल फोन, 1 लैपटॉप, 7 सिम कार्ड, 4 क्रेडिट/डेबिट कार्ड और 37,200 लोगों की बैंकिंग जानकारी का डेटाबेस जब्त किया। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच में आगे की कार्रवाई जारी है।

दिल्ली में भी म्यूल अकाउंट सिंडिकेट का भंडाफोड़

इसी क्रम में नई दिल्ली में दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने मंगलवार को एक बड़े 'म्यूल अकाउंट सिंडिकेट' का पर्दाफाश किया। यह गिरोह देश-विदेश के साइबर अपराधियों को फर्जी कंपनियों के बैंक खाते उपलब्ध कराता था, जिनका उपयोग ऑनलाइन ठगी में किया जाता था। गौरतलब है कि यह रैकेट पिछले तीन-चार वर्षों से सक्रिय था और इस दौरान ₹70 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन हुए।

दिल्ली कार्रवाई में बैंक कर्मचारी भी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में गिरोह के छह मुख्य सदस्यों को गिरफ्तार किया, जिनमें सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक का एक ब्रांच मैनेजर भी शामिल है। इसके अतिरिक्त, इंडसइंड बैंक से जुड़े चार अधिकारियों और सहयोगियों पर 'नो योर कस्टमर' (KYC) नियमों की अनदेखी कर फर्जी खाते खुलवाने में सहायता का आरोप है और उनसे मुचलका भरवाया गया। जांच में 248 बैंक अकाउंट किट, 38 सिम कार्ड, 22 मोबाइल, 28 फर्जी कंपनियों की रबर स्टैंप, 55 डेबिट और क्रेडिट कार्ड, ₹1 लाख नकद और एक कार बरामद की गई।

आम जनता पर असर और सावधानी

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में APK-आधारित साइबर ठगी के मामलों में तेज़ी आई है। साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि उपभोक्ता किसी भी अनजान लिंक से एप्लिकेशन डाउनलोड न करें और केवल आधिकारिक ऐप स्टोर का उपयोग करें। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध संदेश की तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 लोगों का डेटाबेस एक अकेले आरोपी के पास मिलना बताता है कि यह अपराध अब औद्योगिक पैमाने पर हो रहा है। जब तक दूरसंचार और बैंकिंग नियामक मिलकर रियल-टाइम फ्रॉड डिटेक्शन लागू नहीं करते, गिरफ्तारियाँ हिमशैल की नोक ही रहेंगी।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में APK साइबर ठगी का मामला क्या है?
मुंबई की डीबी मार्ग पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है जिसने महानगर गैस लिमिटेड के नाम पर नकली APK फाइलें भेजकर लोगों के मोबाइल से बैंकिंग डेटा चुराया और कथित तौर पर ₹63 करोड़ की ठगी की। आरोपी को पश्चिम बंगाल से पकड़ा गया और उसके पास 37,200 लोगों का बैंकिंग डेटाबेस मिला।
नकली APK फाइल से कैसे होती है ठगी?
अपराधी किसी जानी-मानी कंपनी — जैसे महानगर गैस — के नाम पर फर्जी SMS या लिंक भेजते हैं और उपयोगकर्ता को एक नकली ऐप (APK फाइल) इंस्टॉल करने के लिए कहते हैं। एक बार इंस्टॉल होने पर यह ऐप फोन में मौजूद बैंकिंग क्रेडेंशियल और OTP चुरा लेती है, जिससे खाते से रकम निकाल ली जाती है।
दिल्ली में म्यूल अकाउंट सिंडिकेट क्या था?
दिल्ली पुलिस के सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया जो साइबर अपराधियों को फर्जी कंपनियों के बैंक खाते उपलब्ध कराता था। यह रैकेट तीन-चार वर्षों से सक्रिय था और इसके ज़रिए ₹70 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन हुए।
दिल्ली मामले में बैंक कर्मचारी कैसे शामिल थे?
सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के एक ब्रांच मैनेजर को गिरफ्तार किया गया, जबकि इंडसइंड बैंक के चार अधिकारियों और सहयोगियों पर KYC नियमों की अनदेखी कर फर्जी खाते खुलवाने में मदद करने का आरोप है। इन्हें मुचलके पर छोड़ा गया है।
APK फाइल ठगी से खुद को कैसे बचाएँ?
केवल Google Play Store या Apple App Store से ही ऐप डाउनलोड करें और किसी भी अनजान लिंक से APK फाइल इंस्टॉल न करें। किसी भी संदिग्ध संदेश या कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर दें।
राष्ट्र प्रेस
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