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राजस्थान पुलिस ने ₹12 करोड़ की फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग धोखाधड़ी में पाँचवाँ आरोपी गिरफ्तार किया

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राजस्थान पुलिस ने ₹12 करोड़ की फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग धोखाधड़ी में पाँचवाँ आरोपी गिरफ्तार किया

सारांश

जयपुर में राजस्थान साइबर पुलिस ने ₹12 करोड़ की फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग ठगी में पाँचवाँ आरोपी पकड़ा। भोपाल का विशाल शर्मा पहले से तिहाड़ जेल में बंद था — उसके नेपाल और हैदराबाद से जुड़े तार मिले हैं, जो इसे बड़े अंतर-राज्यीय नेटवर्क का हिस्सा बनाते हैं।

मुख्य बातें

राजस्थान के स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने 25 अगस्त 2026 को भोपाल निवासी विशाल शर्मा को गिरफ्तार किया।
मामले में कुल धोखाधड़ी की राशि ₹12,09,65,512 ; पीड़ित ने अक्टूबर-नवंबर 2025 के बीच ₹6 करोड़ से अधिक जमा किए।
शर्मा के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में ₹25 लाख की धोखाधड़ी राशि का पता चला।
शर्मा पहले से तिहाड़ जेल में एक अन्य साइबर अपराध मामले में बंद था; प्रोडक्शन वारंट पर जयपुर लाया गया।
आरोपी के नेपाल, भोपाल और हैदराबाद के संदिग्धों से संबंध; नेटवर्क की जाँच जारी।
इस मामले में अब तक कुल पाँच आरोपी गिरफ्तार।

राजस्थान पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन ने 25 अगस्त 2026 को भोपाल निवासी विशाल शर्मा को गिरफ्तार किया — जो एक फर्जी ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग वेबसाइट के माध्यम से अंजाम दी गई ₹12 करोड़ से अधिक की साइबर धोखाधड़ी के मामले में पाँचवाँ गिरफ्तार आरोपी है। अधिकारियों के अनुसार, इस गिरफ्तारी से मामले में अब तक पकड़े गए आरोपियों की कुल संख्या पाँच हो गई है।

मुख्य घटनाक्रम

जाँचकर्ताओं ने बताया कि पीड़ित शिकायतकर्ता को सितंबर 2025 में व्हाट्सएप पर एक फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म का लिंक मिला था। इस प्लेटफॉर्म पर निवेश का लालच देकर पीड़ित से कुल ₹12,09,65,512 की धोखाधड़ी की गई।

अक्टूबर और नवंबर 2025 के बीच पीड़ित ने ₹6 करोड़ से अधिक जमा किए। फर्जी वेबसाइट पर कथित मुनाफे सहित ₹9.42 करोड़ का वर्चुअल वॉलेट बैलेंस दर्शाया गया। जब पीड़ित ने राशि निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने कथित तौर पर टैक्स और प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम माँगी, जिससे कुल जमा राशि ₹12 करोड़ से ऊपर पहुँच गई।

आरोपी की भूमिका और पृष्ठभूमि

साइबर क्राइम टीम ने धोखाधड़ी की रकम में से ₹25 लाख का सीधा संबंध शर्मा के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से स्थापित किया। अधिकारियों के अनुसार, शर्मा पहले से ही वेस्ट दिल्ली साइबर पुलिस द्वारा दर्ज एक अन्य साइबर अपराध मामले में तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में था। उसे प्रोडक्शन वारंट पर जयपुर लाया गया।

पुलिस ने बताया कि शर्मा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने अपने साथियों के कहने पर बैंक खाते खोले और उन्हें लेन-देन के लिए उपलब्ध कराया। कथित तौर पर इन्हीं खातों का इस्तेमाल धोखाधड़ी से अर्जित रकम को इधर-उधर करने के लिए किया गया। जाँच में सामने आया है कि शर्मा के नेपाल और भोपाल के संदिग्धों से संबंध हैं और हैदराबाद पुलिस भी पहले उसके विरुद्ध कार्रवाई कर चुकी है।

जाँच की स्थिति

साइबर अपराध टीम अभी व्हाट्सएप रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिपोर्ट (CDR), पहचान दस्तावेज़ और बैंकिंग लेन-देन का विश्लेषण कर रही है। इसका उद्देश्य धन-प्रवाह की पूरी श्रृंखला का पता लगाना और नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान करना है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के जरिए साइबर ठगी के मामलों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की जा रही है।

आम जनता के लिए चेतावनी

अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे व्हाट्सएप, टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाली ऑनलाइन ट्रेडिंग और निवेश योजनाओं से सतर्क रहें। पुलिस ने विशेष रूप से तीन बातों से बचने की हिदायत दी है — अज्ञात लिंक पर क्लिक करना, 'पैसे निकालने के लिए पहले पैसे भेजें' जैसे जाल में फँसना, और कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते दूसरों को इस्तेमाल करने देना। गौरतलब है कि ऐसे खाते प्रायः साइबर अपराध की रकम को ठिकाने लगाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।

क्या होगा आगे

जाँच टीम नेटवर्क के शेष सदस्यों की पहचान के करीब बताई जा रही है। नेपाल और हैदराबाद से जुड़े तार मिलने के बाद यह मामला अंतर-राज्यीय और संभावित रूप से अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क की ओर इशारा करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि असली आयोजक नेटवर्क की परतों के पीछे छिपे रहते हैं। नेपाल कनेक्शन चिंताजनक है — देश की खुली सीमा और हवाला नेटवर्क साइबर अपराध की रकम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ठिकाने लगाने के लिए अनुकूल माने जाते हैं। असली सवाल यह है कि पाँच गिरफ्तारियों के बाद भी क्या मास्टरमाइंड तक पहुँचा जा सकेगा, या यह मामला 'निचले स्तर के खिलाड़ियों' तक सिमटकर रह जाएगा।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राजस्थान में ₹12 करोड़ की गोल्ड ट्रेडिंग साइबर धोखाधड़ी क्या है?
यह एक फर्जी ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग वेबसाइट के ज़रिए की गई ₹12,09,65,512 की साइबर ठगी है, जिसमें पीड़ित को सितंबर 2025 में व्हाट्सएप पर लिंक भेजकर जाल में फँसाया गया। पीड़ित ने निवेश के नाम पर ₹6 करोड़ से अधिक जमा किए, और पैसे निकालने की कोशिश करने पर टैक्स व शुल्क के नाम पर और रकम माँगी गई।
विशाल शर्मा कौन है और उसकी इस मामले में क्या भूमिका है?
विशाल शर्मा भोपाल का निवासी है और इस साइबर धोखाधड़ी मामले में पाँचवाँ गिरफ्तार आरोपी है। पुलिस के अनुसार, उसने अपने साथियों के कहने पर बैंक खाते खोले और धोखाधड़ी की ₹25 लाख की राशि उसके बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में पाई गई।
क्या विशाल शर्मा पहले भी किसी अपराध में शामिल था?
हाँ, शर्मा वेस्ट दिल्ली साइबर पुलिस द्वारा दर्ज एक अन्य साइबर अपराध मामले में तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में था। उसे प्रोडक्शन वारंट पर जयपुर लाया गया। हैदराबाद पुलिस भी पहले उसके खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है।
फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग घोटालों से कैसे बचें?
अधिकारियों ने सलाह दी है कि व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर आने वाले ट्रेडिंग लिंक पर क्लिक न करें, 'पैसे निकालने के लिए पहले पैसे जमा करें' जैसी शर्तों से सावधान रहें, और कमीशन के बदले अपना बैंक खाता किसी को उपयोग करने न दें।
इस मामले की जाँच अभी कहाँ तक पहुँची है?
राजस्थान साइबर क्राइम टीम व्हाट्सएप रिकॉर्ड, CDR, पहचान दस्तावेज़ और बैंकिंग लेन-देन का विश्लेषण कर रही है। आरोपी के नेपाल और भोपाल के संदिग्धों से संबंध सामने आए हैं, और नेटवर्क के शेष सदस्यों की पहचान की जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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