11 जुलाई 2026
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क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक नई दिल्ली में सफल, रूबियो बोले — ठोस कार्रवाई की ओर बढ़ी साझेदारी

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क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक नई दिल्ली में सफल, रूबियो बोले — ठोस कार्रवाई की ओर बढ़ी साझेदारी

सारांश

नई दिल्ली में हुई क्वाड बैठक इस बार केवल संवाद नहीं, बल्कि कार्रवाई की थी। समुद्री निगरानी, क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क और इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा पर ठोस घोषणाओं के साथ चारों देशों ने यह स्पष्ट किया कि क्वाड अब एक परिपक्व और परिणामोन्मुखी गठबंधन बन चुका है।

मुख्य बातें

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 26 मई 2025 को नई दिल्ली में हुई क्वाड बैठक को 'बेहद सफल और उपयोगी' बताया।
जयशंकर (भारत), पेनी वोंग (ऑस्ट्रेलिया) और तोशिमित्सु मोतेगी (जापान) शामिल हुए।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर हुए।
फिजी में पायलट पोर्ट परियोजना और समुद्र के नीचे केबल सहयोग पर सहमति बनी।
इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए नई क्वाड पहल की घोषणा की गई।
क्वाड को अब 'ठोस कार्रवाई' की दिशा में अग्रसर बताया गया, न कि केवल चर्चा मंच।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने 26 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक को 'बेहद सफल और उपयोगी' बताया। भारत में अमेरिकी दूतावास के राजदूत सर्जियो गोर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर तस्वीर साझा करते हुए रूबियो की यह प्रतिक्रिया सार्वजनिक की। इस बैठक में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने हिस्सा लिया।

बैठक में क्या हुआ

साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में रूबियो ने स्पष्ट किया कि क्वाड अब केवल समस्याओं पर चर्चा करने वाला मंच नहीं रहा, बल्कि यह साझेदारी अब ठोस कार्रवाई की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने मेजबानी के लिए भारत और विदेश मंत्री एस. जयशंकर का धन्यवाद किया। रूबियो ने कहा, 'यह साझेदारी अब केवल रणनीतिक बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर ठोस परिणाम देना है।'

अमेरिकी विदेश मंत्री के अनुसार, भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया अब ऊर्जा सुरक्षा, सप्लाई चेन, क्रिटिकल मिनरल्स, समुद्री सुरक्षा और मानवीय सहायता जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि हाल के वैश्विक घटनाक्रमों के बाद क्वाड की अहमियत और बढ़ गई है।

तीन प्रमुख निष्कर्ष

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बैठक के तीन बड़े परिणाम गिनाए। पहला — हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री निगरानी बढ़ाने और साझा समुद्री जानकारी तैयार करने पर सहमति बनी; बंदरगाह अवसंरचना पर विशेषज्ञ पैनल बनाने, फिजी में एक पायलट पोर्ट परियोजना और समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबलों पर सहयोग की योजना तय हुई।

दूसरा — क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया गया और भारत तथा अमेरिका के बीच द्विपक्षीय क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क पर भी हस्ताक्षर हुए। क्वाड इस क्षेत्र में समान सोच वाले अन्य देशों के साथ भी काम करेगा।

तीसरा — इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक नई क्वाड पहल की घोषणा की गई, जिसमें तकनीक, प्रबंधन, नीति, अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यास जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा।

बैठक की पृष्ठभूमि

बैठक से पहले जयशंकर ने सभी मेहमानों का स्वागत किया और एक फैमिली फोटो सत्र हुआ। बैठक के दौरान क्वाड की विभिन्न पहलों की प्रगति की समीक्षा की गई, प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र समेत आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबाव नई ऊँचाइयों पर हैं।

क्षेत्रीय महत्व

रूबियो ने बैठक में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, सुरक्षा और समृद्धि को आगे बढ़ाने पर व्यापक चर्चा का उल्लेख किया। उनके अनुसार, क्वाड क्षेत्र में सकारात्मक भूमिका निभाने वाला एक महत्वपूर्ण समूह बना हुआ है और आने वाले समय में यह क्षेत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए नई पहल करता रहेगा। यह बैठक क्वाड के बढ़ते संस्थागत स्वरूप और इंडो-पैसिफिक में चारों देशों की सामूहिक प्रतिबद्धता का संकेत देती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक 2025 में क्या हुआ?
26 मई 2025 को नई दिल्ली में हुई क्वाड बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने समुद्री निगरानी, क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा सुरक्षा पर ठोस पहलों की घोषणा की। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इसे 'बेहद सफल और उपयोगी' बताया।
भारत-अमेरिका क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क क्या है?
इस बैठक के दौरान भारत और अमेरिका के बीच एक द्विपक्षीय क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क पर हस्ताक्षर हुए, जो दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित करने का लक्ष्य रखता है। यह क्वाड के व्यापक क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क का भी हिस्सा है।
इंडो-पैसिफिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए क्वाड की नई पहल क्या है?
क्वाड ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक नई पहल की घोषणा की, जिसमें तकनीक, नीति, अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यास जैसे क्षेत्रों में चारों देश मिलकर काम करेंगे।
क्वाड की समुद्री सुरक्षा पहल में क्या शामिल है?
बैठक में हिंद-प्रशांत में समुद्री निगरानी बढ़ाने और साझा समुद्री जानकारी तैयार करने पर सहमति बनी। इसके अलावा बंदरगाह अवसंरचना पर विशेषज्ञ पैनल, फिजी में एक पायलट पोर्ट परियोजना और समुद्र के नीचे केबल सहयोग की योजना भी तय हुई।
क्वाड बैठक की मेजबानी किसने की और इसका महत्व क्या है?
इस बार क्वाड बैठक की मेजबानी भारत ने की और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सभी मेहमानों का स्वागत किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक दबाव बढ़ रहे हैं, जिससे इंडो-पैसिफिक में क्वाड की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
राष्ट्र प्रेस
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