29 सितंबर 2026
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जयशंकर की न्यूयॉर्क में चेतावनी: अनाज-खाद की कमी से मंडरा रहा बड़ा वैश्विक खाद्य संकट

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जयशंकर की न्यूयॉर्क में चेतावनी: अनाज-खाद की कमी से मंडरा रहा बड़ा वैश्विक खाद्य संकट

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर ने न्यूयॉर्क में खाद्य, ईंधन, खाद और वित्त — चार संकटों की चेतावनी दी। यूक्रेन और खाड़ी संघर्षों के बीच काला सागर से अनाज आपूर्ति बाधित होने और खाद की कमी से विकासशील देशों पर दोहरा दबाव पड़ रहा है। यह चेतावनी वैश्विक दक्षिण के लिए गंभीर संकेत है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आगाह किया कि आने वाले महीनों में बड़ा वैश्विक खाद्य संकट संभव है।
उन्होंने भोजन, ईंधन, खाद और वित्त को विकासशील देशों के सामने चार प्रमुख संकटों के रूप में रेखांकित किया।
यूक्रेन युद्ध और ईरान-खाड़ी संघर्ष के कारण काला सागर मार्ग से अनाज निर्यात प्रभावित होने की आशंका जताई।
जयशंकर ने कहा कि संघर्ष की स्थिति में पूंजी ग्लोबल साउथ से बाहर जाती है, जिससे कमज़ोर देशों की आर्थिक क्षमता और घटती है।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में प्रगति धीमी पड़ने से संकटग्रस्त देशों पर दबाव और बढ़ रहा है।
उन्होंने नीति-निर्माताओं से आग्रह किया कि वे अपने फैसलों के वैश्विक परिणामों की जवाबदेही लें।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में आगाह किया कि आने वाले महीनों में दुनिया एक बड़े खाद्य संकट की चपेट में आ सकती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संघर्ष — विशेष रूप से यूक्रेन युद्ध और ईरान-खाड़ी संघर्ष — पहले से ही विकासशील देशों पर भारी दबाव डाल रहे हैं। अनाज की आपूर्ति में रुकावट और खाद उत्पादन पर पड़ने वाला असर इस संकट को और गहरा कर सकता है।

चार संकटों का जाल: भोजन, ईंधन, खाद और वित्त

जयशंकर ने अपनी शुरुआती टिप्पणियों में भोजन, ईंधन, खाद और वित्त को वैश्विक दक्षिण यानी विकासशील देशों के सामने खड़े चार प्रमुख संकटों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा, 'हम पहले से ही खाद की बड़ी कमी की स्थिति देख रहे हैं।' साथ ही उन्होंने चेताया कि अनाज निर्यात करने वाले कुछ बड़े देश भी काला सागर के रास्ते अपनी आपूर्ति बनाए नहीं रख पाएंगे।

उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य संकट का खतरा अभी पूरी तरह प्रकट नहीं हुआ है, लेकिन इसके संकेत स्पष्ट हैं। उनके शब्दों में, 'इसलिए आने वाले महीनों में शायद एक बड़ा खाद्य संकट पैदा होने वाला है।'

ऊर्जा बाज़ार पर दबाव और वैश्विक पूंजी का पलायन

जयशंकर ने ऊर्जा सुरक्षा को भी एक बड़ी चिंता बताया। उनका कहना था कि ऊर्जा बाज़ार में पहले से दबाव है और तेल आपूर्ति को प्रभावित करने वाले राजनीतिक निर्णय कीमतों को और ऊपर ले जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि संघर्ष की स्थितियों में पूंजी सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन करती है और ग्लोबल साउथ से निवेश बाहर जा सकता है।

यह ऐसे समय में आया है जब सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की दिशा में प्रगति पहले से धीमी है। गौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र ने 2015 में इन लक्ष्यों को अपनाया था, जिनमें 2030 तक गरीबी, स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार के लक्ष्य निर्धारित हैं।

नीति-निर्माताओं पर जवाबदेही का आग्रह

जयशंकर ने कहा कि नीति बनाने वाले देश दूसरे देशों को होने वाले नुकसान को यह कहकर नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते कि वह अनजाने में हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया, 'देशों को इतना खुद तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि वे सिर्फ अपनी दुनिया में रहें और अपने हिसाब से फैसले लेते रहें।'

उन्होंने कमज़ोर देशों को गंभीर संकट में फंसने देने के विरुद्ध भी आगाह किया। उनका तर्क था कि पहले भी शासन-व्यवस्था के कमज़ोर पड़ने की घटनाओं का असर वैश्विक सुरक्षा पर पड़ा है, इसलिए बुनियादी जरूरतें पूरा करना केवल एकजुटता नहीं, बल्कि व्यावहारिक आवश्यकता भी है।

भारत का दृष्टिकोण और पड़ोसी देशों पर असर

जयशंकर ने कहा कि एक औपनिवेशिक शासन से मुक्त हुए समाज के रूप में भारत विकासशील देशों के साथ विशेष जुड़ाव महसूस करता है। उन्होंने यूक्रेन युद्ध के बाद आर्थिक दबाव की वजह से भारत के पड़ोसी देशों की राजनीति पर पड़े असर का भी उल्लेख किया।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कोई देश क्या फैसला लेता है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि मुद्दा क्या है और उसमें उस देश का कितना दांव लगा है। आपूर्ति, परिवहन और वित्तपोषण में बदलाव से अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमतें बढ़ सकती हैं — और यह झटका उन देशों को भी प्रभावित कर सकता है जो संघर्ष वाली जगहों से भौगोलिक रूप से बहुत दूर हैं।

आगे क्या हो सकता है

जयशंकर की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक खाद्य और ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक प्रमुख संघर्षों का समाधान नहीं होता, तब तक आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव बना रहेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि वे अपने निर्णयों के वैश्विक परिणामों को ध्यान में रखें — खासकर उन देशों के लिए जिनके पास नए आर्थिक झटकों से निपटने की क्षमता सीमित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सबसे गहरा कारण है — क्योंकि इसका असर अगली फसल पर पड़ता है, अभी नहीं। जयशंकर ने न केवल तात्कालिक संकट, बल्कि एक संरचनात्मक भेद्यता की ओर ध्यान दिलाया है जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अभी पर्याप्त तवज्जो नहीं मिल रही।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने किस खाद्य संकट की चेतावनी दी है?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 29 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में कहा कि आने वाले महीनों में वैश्विक स्तर पर बड़ा खाद्य संकट आ सकता है। यूक्रेन युद्ध और ईरान-खाड़ी संघर्ष के चलते अनाज की आपूर्ति और खाद उत्पादन दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
काला सागर मार्ग से अनाज आपूर्ति क्यों प्रभावित हो रही है?
जयशंकर के अनुसार, यूक्रेन संघर्ष के कारण काला सागर के रास्ते होने वाला अनाज निर्यात बाधित हो रहा है। इस मार्ग से बड़े पैमाने पर अनाज निर्यात करने वाले देश अब अपनी आपूर्ति सुनिश्चित नहीं कर पा रहे, जिससे वैश्विक खाद्य बाज़ारों में दबाव बढ़ रहा है।
विकासशील देशों पर इस संकट का क्या असर पड़ेगा?
जयशंकर ने कहा कि जो देश एक साथ खाद्य, ईंधन, खाद और वित्तीय दबाव झेल रहे हैं, उनके पास नए आर्थिक झटकों से निपटने की क्षमता बहुत कम बचती है। संघर्ष की स्थितियों में पूंजी इन देशों से बाहर जाती है, जिससे आर्थिक कमज़ोरी और बढ़ जाती है।
जयशंकर ने नीति-निर्माताओं से क्या आग्रह किया?
जयशंकर ने कहा कि नीति बनाने वाले देश दूसरे देशों को होने वाले नुकसान को 'अनजाने में हुआ' कहकर नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे अपने फैसलों के वैश्विक प्रभावों के प्रति जवाबदेह रहें।
सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) से इसका क्या संबंध है?
जयशंकर ने रेखांकित किया कि संयुक्त राष्ट्र के 2015 में अपनाए गए सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में प्रगति पहले से धीमी है। आपूर्ति बाधाओं और संघर्षों के कारण यह प्रगति और रुक रही है, जिससे 2030 के लक्ष्य — गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य और शिक्षा — खतरे में पड़ सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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