जयशंकर की रूस-यूक्रेन पर तीन सूत्रीय पहल: जहाज, अनाज और ऊर्जा ढाँचे की सुरक्षा पर भारत सक्रिय
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 1 नवंबर 2026 को अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के समापन पर बताया कि भारत रूस-यूक्रेन संघर्ष के वैश्विक प्रभावों को सीमित करने के लिए तीन ठोस मुद्दों — नागरिक जहाजों की सुरक्षा, काला सागर के रास्ते अनाज निर्यात की बहाली और ऊर्जा बुनियादी ढाँचे पर हमले रोकना — पर रूस, यूक्रेन और यूरोपीय देशों के साथ सक्रिय बातचीत कर रहा है। भारत की यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में सामने आई है जब संघर्ष लंबा खिंच रहा है और वैश्विक खाद्य व ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव लगातार बना हुआ है।
तीन सूत्रीय पहल का विवरण
जयशंकर ने भारतीय पत्रकारों से बातचीत में कहा, 'भारत की कोशिश है कि ऐसे व्यावहारिक रास्ते निकाले जाएँ, जिनसे युद्ध के बीच भी आम नागरिकों, वैश्विक व्यापार और खाद्य एवं ऊर्जा आपूर्ति को नुकसान से बचाया जा सके।' उन्होंने स्पष्ट किया कि पहला मुद्दा नागरिक जहाजों और नाविकों पर हमले बंद कराना है, दूसरा काला सागर के रास्ते अनाज निर्यात की बहाली और तीसरा ऊर्जा बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ऊर्जा से जुड़े मुद्दे को जयशंकर ने तीनों में सबसे जटिल बताया। उनके अनुसार, 'अलग-अलग पक्ष इसे अलग-अलग तरह से देखते हैं — किसी के लिए ऊर्जा बुनियादी ढाँचे का मतलब तेल रिफाइनरी है, तो किसी के लिए बिजली ग्रिड।' ईंधन ले जाने वाले जहाजों से जुड़े मुद्दे भी इसी श्रेणी में हैं।
ग्लोबल साउथ के लिए खाद्य सुरक्षा की चिंता
जयशंकर ने रेखांकित किया कि अनाज निर्यात का मुद्दा केवल रूस और यूक्रेन के बीच व्यापार तक सीमित नहीं है। काला सागर क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति पर बड़ी संख्या में विकासशील देश निर्भर हैं, जो इसे ग्लोबल साउथ के लिए गंभीर खाद्य सुरक्षा का प्रश्न बनाता है। गौरतलब है कि 2022 में संयुक्त राष्ट्र-तुर्किये मध्यस्थता में बनी काला सागर अनाज पहल के टूटने के बाद से यह आपूर्ति श्रृंखला बाधित चल रही है।
उच्चस्तरीय कूटनीतिक संपर्क
भारत की इस पहल की ताकत यह है कि वह दोनों युद्धरत पक्षों के साथ अपने उच्चस्तरीय संवाद बनाए हुए है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली और इससे पहले बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत की है। जयशंकर स्वयं मास्को और कीव का दौरा कर चुके हैं और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी इस विषय पर चर्चा हो चुकी है।
अटलांटा में जी20 बैठक के इतर जयशंकर ने लावरोव से अलग मुलाकात भी की, जिसमें यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। बैठक के बाद जयशंकर ने एक्स पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की।
अमेरिका के साथ समन्वय
भारत ने अपने कूटनीतिक प्रयासों से अमेरिका को भी अवगत कराया है। जयशंकर ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो को भारत की बातचीत की दिशा और प्रगति की 'मोटे तौर पर' जानकारी है। अमेरिका की अपनी शांति मध्यस्थता पहल के साथ भारत समन्वय कर रहा है।
हालाँकि जयशंकर ने बातचीत की मौजूदा स्थिति और संभावित प्रगति के बारे में सार्वजनिक रूप से अधिक ब्यौरा देने से परहेज किया। उन्होंने कहा, 'अभी मैं इसका ब्योरा सार्वजनिक नहीं कर सकता।'
भारत का व्यापक कूटनीतिक संदेश
जी20 मंच पर भारत ने अपना व्यापक दृष्टिकोण भी स्पष्ट किया। जयशंकर ने कहा, 'दुनिया के सामने व्यापक प्रभाव डालने वाले दोनों बड़े संघर्षों का सैन्य समाधान नहीं हो सकता। इसके लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशना ज़रूरी है।' यह ऐसे समय में आया है जब संघर्ष के तीसरे वर्ष में प्रवेश करने के बावजूद शांति वार्ता की कोई स्पष्ट संभावना नहीं दिख रही। भारत की तीन सूत्रीय रूपरेखा इस जटिल भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक व्यावहारिक मध्यमार्गी भूमिका की तलाश को दर्शाती है।