1 नवंबर 2026
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कांग्रेस की रामलीला मैदान रैली से दिल्ली के 2.5 लाख दुकानें बंद, ₹10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप: सीटीआई

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कांग्रेस की रामलीला मैदान रैली से दिल्ली के 2.5 लाख दुकानें बंद, ₹10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप: सीटीआई

सारांश

दिवाली से ठीक पहले कांग्रेस की रामलीला मैदान रैली ने दिल्ली के 2.5 लाख व्यापारियों को घर बैठने पर मजबूर कर दिया। सीटीआई का कहना है — रोज़ाना का ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा का कारोबार ठप, धनतेरस का माल गोदामों में बंद और 75 लाख लोगों की रोज़ी-रोटी दाँव पर।

मुख्य बातें

सीटीआई ने 1 नवंबर 2026 को राहुल गांधी को पत्र लिखकर रामलीला मैदान रैली से दिल्ली व्यापार पर पड़ रहे असर की जानकारी दी।
रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर दायरे में 3 लाख दुकानों में से 2.5 लाख (80 प्रतिशत) के बंद रहने का अनुमान।
रोज़ाना का ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ का कारोबार ठप; 20 लाख व्यापारियों और 75 लाख लोगों की आजीविका प्रभावित।
56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5,000 ट्रक-टेंपो की आवाजाही बंद; धनतेरस (6 नवंबर) का माल गोदामों में अटका।
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने BJP एजेंट के आरोपों को खारिज किया; 100 मार्केट एसोसिएशनों ने रैली टालने की माँग की थी।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के चलते राजधानी के व्यापार पर पड़ रहे गंभीर असर को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा है। सीटीआई का कहना है कि रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित करीब 3 लाख दुकानों में से लगभग 2.5 लाख दुकानें (80 प्रतिशत) बंद रहने के आसार हैं, जिससे रोज़ाना का ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ का कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी ने वीडियो संदेश जारी करके रैली में आने वाले लोगों को बाज़ारों में खरीदारी करने की अपील की, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। उनके अनुसार, रैली के कारण इतना अधिक पैनिक फैल चुका है कि जब दुकानें ही बंद हों, तो रैली में शामिल होने वाले खरीदारी कहाँ करेंगे।

सीटीआई ने बताया कि रामलीला मैदान के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में कश्मीरी गेट, चाँदनी चौक, चावड़ी बाज़ार, खारी बावली, सदर बाज़ार, दरियागंज, पहाड़गंज, कनॉट प्लेस, पालिका बाज़ार, जनपथ, जामा मस्जिद, भागीरथ पैलेस, लाजपत राय मार्केट, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाज़ार और गफ्फार मार्केट सहित दिल्ली के प्रमुख बाज़ार आते हैं।

ट्रांसपोर्ट पर बड़ा संकट

बृजेश गोयल के अनुसार, रामलीला मैदान के इर्द-गिर्द 10 किलोमीटर के दायरे में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था लगभग पूरी तरह ठप पड़ी है। लोडिंग-अनलोडिंग बंद है और माल की आवाजाही रुकी हुई है। उन्होंने बताया कि रोज़ाना नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका और उद्योग नगर सहित 56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5,000 ट्रक-टेंपो इन बाज़ारों में माल लेकर आते हैं, और यहाँ से 3,000 ट्रक एनसीआर समेत पूरे देश में जाते हैं — आज वह पूरी आपूर्ति श्रृंखला टूट गई है।

गोयल ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि धनतेरस (6 नवंबर) का माल गोदामों में पड़ा है और दुकानों तक नहीं पहुँच पा रहा, जो व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता है।

दिवाली पीक सीज़न पर असर

सीटीआई ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है। 1 नवंबर तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। संगठन के अनुसार, बाज़ार बंद और ट्रांसपोर्ट ठप रहने से 20 लाख व्यापारियों और 75 लाख लोगों की रोज़ी-रोटी पर सीधा संकट आया है।

यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के व्यापारी दिवाली के पूर्व-उत्सव की खरीदारी पर निर्भर करते हैं — साल का सबसे बड़ा कारोबारी मौका।

सीटीआई का पक्ष और भाजपा एजेंट वाले आरोपों का खंडन

बृजेश गोयल ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें सीटीआई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एजेंट बताया गया। उन्होंने कहा कि 100 बड़ी मार्केट एसोसिएशनें रैली टालने की अपील पहले ही कर चुकी थीं और वे किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं — बल्कि दिवाली के पीक सीज़न में अपनी आजीविका बचाने की गुहार लगा रहे हैं।

गौरतलब है कि सीटीआई ने स्पष्ट किया कि वे रैली के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी माँग है कि इसे 20 प्रमुख बाज़ारों के दिवाली व्यापार की कीमत पर आयोजित न किया जाए।

आगे क्या

सीटीआई ने राहुल गांधी से सीधा सवाल पूछा है कि जब बाज़ारें बंद हों, ट्रांसपोर्ट ठप हो और रास्ते जाम हों, तो रैली में आने वाले लोग खरीदारी कहाँ करने जाएंगे। धनतेरस और दिवाली से पहले आपूर्ति श्रृंखला बहाल होने की उम्मीद में व्यापारी इस संकट के टलने का इंतज़ार कर रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह जिम्मेदारी प्रशासन पर छोड़ दी गई। राहुल गांधी की 'बाज़ार में खरीदारी करो' की अपील की भावना सही है, लेकिन जब रास्ते और दुकानें दोनों बंद हों, तो वह अपील अमल में नहीं आ सकती — और यह विरोधाभास सीटीआई ने बिल्कुल सटीक पकड़ा है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस की रामलीला मैदान रैली से दिल्ली के व्यापार पर क्या असर पड़ा?
सीटीआई के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर दायरे में करीब 3 लाख दुकानों में से 2.5 लाख (80 प्रतिशत) बंद रहीं और रोज़ाना का ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ का कारोबार ठप रहा। यह असर विशेष रूप से गंभीर इसलिए है क्योंकि 1 नवंबर धनतेरस और दिवाली की तैयारी का सबसे पीक दिन माना जाता है।
सीटीआई ने राहुल गांधी को पत्र क्यों लिखा?
सीटीआई ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली के कारण दिल्ली के बाज़ारों पर पड़ रहे आर्थिक प्रभाव की जानकारी दी। संगठन का कहना था कि 100 बड़ी मार्केट एसोसिएशनें पहले ही रैली टालने की अपील कर चुकी थीं और 20 लाख व्यापारियों तथा 75 लाख लोगों की रोज़ी-रोटी दाँव पर है।
धनतेरस और दिवाली के व्यापार पर रैली का क्या असर पड़ा?
सीटीआई के अनुसार, 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है, और 1 नवंबर तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। धनतेरस का माल गोदामों में पड़ा रहा और दुकानों तक नहीं पहुँच सका, क्योंकि 56 इंडस्ट्रियल एरिया से आने वाले 5,000 ट्रक-टेंपो की आवाजाही पूरी तरह बंद रही।
सीटीआई पर BJP एजेंट होने के आरोपों पर संगठन का क्या जवाब है?
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं, बल्कि दिवाली के पीक सीज़न में अपनी आजीविका बचाने की गुहार लगा रहे हैं। 100 मार्केट एसोसिएशनें रैली टालने की माँग पहले ही कर चुकी थीं।
रामलीला मैदान के पास कौन से प्रमुख बाज़ार प्रभावित हुए?
सीटीआई के अनुसार, प्रभावित बाज़ारों में चाँदनी चौक, चावड़ी बाज़ार, खारी बावली, सदर बाज़ार, दरियागंज, पहाड़गंज, कनॉट प्लेस, जनपथ, जामा मस्जिद, भागीरथ पैलेस, लाजपत राय मार्केट, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाज़ार, पालिका बाज़ार और गफ्फार मार्केट शामिल हैं — सभी 5 किलोमीटर के दायरे में।
राष्ट्र प्रेस
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