कांग्रेस की रामलीला मैदान रैली से दिल्ली के 2.5 लाख दुकानें बंद, ₹10-12 हजार करोड़ का कारोबार ठप: सीटीआई
सारांश
मुख्य बातें
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की प्रस्तावित रैली के चलते राजधानी के व्यापार पर पड़ रहे गंभीर असर को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पत्र लिखा है। सीटीआई का कहना है कि रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में स्थित करीब 3 लाख दुकानों में से लगभग 2.5 लाख दुकानें (80 प्रतिशत) बंद रहने के आसार हैं, जिससे रोज़ाना का ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ का कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है।
मुख्य घटनाक्रम
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि राहुल गांधी ने वीडियो संदेश जारी करके रैली में आने वाले लोगों को बाज़ारों में खरीदारी करने की अपील की, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है। उनके अनुसार, रैली के कारण इतना अधिक पैनिक फैल चुका है कि जब दुकानें ही बंद हों, तो रैली में शामिल होने वाले खरीदारी कहाँ करेंगे।
सीटीआई ने बताया कि रामलीला मैदान के आसपास 5 किलोमीटर के दायरे में कश्मीरी गेट, चाँदनी चौक, चावड़ी बाज़ार, खारी बावली, सदर बाज़ार, दरियागंज, पहाड़गंज, कनॉट प्लेस, पालिका बाज़ार, जनपथ, जामा मस्जिद, भागीरथ पैलेस, लाजपत राय मार्केट, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाज़ार और गफ्फार मार्केट सहित दिल्ली के प्रमुख बाज़ार आते हैं।
ट्रांसपोर्ट पर बड़ा संकट
बृजेश गोयल के अनुसार, रामलीला मैदान के इर्द-गिर्द 10 किलोमीटर के दायरे में ट्रांसपोर्ट व्यवस्था लगभग पूरी तरह ठप पड़ी है। लोडिंग-अनलोडिंग बंद है और माल की आवाजाही रुकी हुई है। उन्होंने बताया कि रोज़ाना नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका और उद्योग नगर सहित 56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5,000 ट्रक-टेंपो इन बाज़ारों में माल लेकर आते हैं, और यहाँ से 3,000 ट्रक एनसीआर समेत पूरे देश में जाते हैं — आज वह पूरी आपूर्ति श्रृंखला टूट गई है।
गोयल ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि धनतेरस (6 नवंबर) का माल गोदामों में पड़ा है और दुकानों तक नहीं पहुँच पा रहा, जो व्यापारियों के लिए सबसे बड़ी चिंता है।
दिवाली पीक सीज़न पर असर
सीटीआई ने अपने पत्र में रेखांकित किया कि 6 नवंबर को धनतेरस और 8 नवंबर को दिवाली है। 1 नवंबर तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। संगठन के अनुसार, बाज़ार बंद और ट्रांसपोर्ट ठप रहने से 20 लाख व्यापारियों और 75 लाख लोगों की रोज़ी-रोटी पर सीधा संकट आया है।
यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के व्यापारी दिवाली के पूर्व-उत्सव की खरीदारी पर निर्भर करते हैं — साल का सबसे बड़ा कारोबारी मौका।
सीटीआई का पक्ष और भाजपा एजेंट वाले आरोपों का खंडन
बृजेश गोयल ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें सीटीआई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का एजेंट बताया गया। उन्होंने कहा कि 100 बड़ी मार्केट एसोसिएशनें रैली टालने की अपील पहले ही कर चुकी थीं और वे किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं हैं — बल्कि दिवाली के पीक सीज़न में अपनी आजीविका बचाने की गुहार लगा रहे हैं।
गौरतलब है कि सीटीआई ने स्पष्ट किया कि वे रैली के विरोधी नहीं हैं, लेकिन उनकी माँग है कि इसे 20 प्रमुख बाज़ारों के दिवाली व्यापार की कीमत पर आयोजित न किया जाए।
आगे क्या
सीटीआई ने राहुल गांधी से सीधा सवाल पूछा है कि जब बाज़ारें बंद हों, ट्रांसपोर्ट ठप हो और रास्ते जाम हों, तो रैली में आने वाले लोग खरीदारी कहाँ करने जाएंगे। धनतेरस और दिवाली से पहले आपूर्ति श्रृंखला बहाल होने की उम्मीद में व्यापारी इस संकट के टलने का इंतज़ार कर रहे हैं।