सीटीआई ने सोनिया गांधी को पत्र: 1 नवंबर की कांग्रेस रैली से ₹10–12 हजार करोड़ के कारोबार पर संकट
सारांश
मुख्य बातें
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने 30 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर मांग की है कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में प्रस्तावित कांग्रेस की 10 लाख लोगों की महारैली को दीपावली के बाद 10 या 11 नवंबर तक टाल दिया जाए। सीटीआई का कहना है कि धनतेरस (6 नवंबर) और दीपावली (8 नवंबर) की तैयारी के इस पीक सीजन में रैली से मध्य दिल्ली और पुरानी दिल्ली के 20 ऐतिहासिक बाजारों में रोज़ाना होने वाला ₹10 से 12 हजार करोड़ का व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है।
सीटीआई की मांग और पृष्ठभूमि
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा, 'हम रैली का विरोध नहीं कर रहे हैं, हम दीपावली के पीक सीजन में अपनी रोज़ी-रोटी बचाने के लिए हाथ जोड़कर विनती कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि इससे पहले राहुल गांधी को 3 पत्र लिखे जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। अब संगठन ने सोनिया गांधी से हस्तक्षेप की अंतिम उम्मीद जताई है।
गोयल ने स्पष्ट किया कि 1 नवंबर धनतेरस और दीपावली की तैयारी का सबसे व्यस्त दिन है। उनके अनुसार, 10 लाख लोगों और 15,000 से 20,000 वाहनों के मध्य दिल्ली में प्रवेश से पूरे इलाके में चक्का जाम की स्थिति बन सकती है।
चार बड़े संकट — सीटीआई का आकलन
सीटीआई ने अपने पत्र में 4 प्रमुख संकटों का उल्लेख किया है। पहला — रामलीला मैदान में केवल 200 बड़ी बसों की पार्किंग की जगह है, जबकि 10 लाख लोगों को लाने के लिए 15,000 से 20,000 बसें, कारें और टेंपो चाहिए होंगे। ये वाहन जेएलएन मार्ग, बहादुर शाह जफर मार्ग, नेताजी सुभाष मार्ग, अजमेरी गेट और चांदनी चौक रोड के आसपास खड़े होंगे, जिससे सेंट्रल और पुरानी दिल्ली में लॉकडाउन जैसे हालात बन सकते हैं।
दूसरा — रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में 300 साल पुराने 20 बड़े थोक और रिटेल बाजार हैं, जो पूरे भारत को माल सप्लाई करते हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाजार, कनॉट प्लेस, पालिका बाजार, जनपथ, भागीरथ पैलेस, खारी बावली, कश्मीरी गेट, नया बाजार, लाजपत राय मार्केट, चावड़ी बाजार, किनारी बाजार, दरीबा कलां, बल्लीमारान, फतेहपुरी, तिलक बाजार, करोल बाग, जामा मस्जिद, नबी करीम, गफ्फार मार्केट, अजमेरी गेट-पहाड़गंज और दरियागंज शामिल हैं।
तीसरा — इन बाजारों में प्रतिदिन नरेला, बवाना, ओखला, मायापुरी, मुंडका, उद्योग नगर, मंगोलपुरी समेत 56 इंडस्ट्रियल एरिया से 5,000 ट्रक-टेंपो माल लाते हैं और यहाँ से रोज़ाना 3,000 ट्रक गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, सोनीपत, पानीपत समेत एनसीआर के 25 शहरों और देशभर के सभी राज्यों में माल पहुँचाते हैं। रैली के दिन यह पूरी सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा है।
चौथा — असर 1 नवंबर से नहीं, बल्कि 31 अक्टूबर की दोपहर से ही शुरू हो सकता है। सिंघु, टिकरी, गाजीपुर और बदरपुर जैसे दिल्ली बॉर्डर पर उसी दिन से बसें और गाड़ियाँ जमा होने लगेंगी और शाम से बहादुर शाह जफर मार्ग व जेएलएन मार्ग पर बैरिकेडिंग की आशंका है। सीटीआई के अनुसार, ट्रांसपोर्टर पहले ही 31 अक्टूबर से गाड़ी भेजने से मना कर रहे हैं।
पिछला उदाहरण — जंतर-मंतर की चेतावनी
गौरतलब है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर केवल 5,000 से 7,000 लोगों के जुटने पर 8 घंटे तक सेंट्रल दिल्ली जाम रही थी। सीटीआई ने इस उदाहरण को सामने रखते हुए तर्क दिया है कि 10 लाख की भीड़ का असर कई गुना अधिक विनाशकारी होगा। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली के व्यापारी दीपावली की बिक्री पर पूरे साल का दारोमदार रखते हैं।
सीटीआई की दो मांगें
सीटीआई ने स्पष्ट रूप से दो विकल्प सुझाए हैं। पहला — रैली को 10 या 11 नवंबर के बाद आयोजित किया जाए, ताकि धनतेरस और दीपावली के कारोबार में कोई रुकावट न आए। दूसरा — यदि रैली की तारीख नहीं बदली जा सकती, तो स्थान को रामलीला मैदान से बदलकर बुराड़ी मैदान किया जाए, जहाँ 15,000 गाड़ियों की पार्किंग उपलब्ध है।
व्यापारी संगठन की यह अपील इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव और बढ़ सकता है। अब देखना यह होगा कि सोनिया गांधी या कांग्रेस नेतृत्व इस मांग पर क्या रुख अपनाता है।