राहुल गांधी की 1 नवंबर रैली टालें — NDA नेताओं की माँग, बोले '₹10,000 करोड़ का नुकसान होगा व्यापारियों को'
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली तत्काल स्थगित करने की माँग की है। उनका तर्क है कि दिवाली, धनतेरस और छठ के त्योहारी सत्र के बीच यह रैली दिल्ली के व्यापारियों और दुकानदारों को ₹10,000 करोड़ तक के कारोबारी नुकसान में डाल सकती है।
व्यापारियों के हितों का हवाला
बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने भी कांग्रेस से रैली स्थगित करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह माँग दिल्ली के हज़ारों व्यापारियों, दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के हितों को ध्यान में रखकर की गई है।
सरावगी ने जोर देकर कहा कि त्योहारी मौसम में देशभर से लोग खरीदारी के लिए दिल्ली आते हैं और यह समय व्यापारियों के लिए सालभर की आजीविका से जुड़ा होता है। उनके अनुसार, रैली के कारण यातायात और भीड़ की वजह से व्यापारिक गतिविधियाँ बाधित हो सकती हैं और कारोबारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
1984 की तारीख को लेकर आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने 1 नवंबर की तारीख जानबूझकर चुनी है, जो 1984 के सिख विरोधी दंगों की वर्षगाँठ से जुड़ी है। सरावगी ने कहा कि उस दौर में दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में हज़ारों सिखों की हत्या हुई थी, और ऐसे दिन रामलीला मैदान में रैली करना कांग्रेस की मानसिकता को उजागर करता है।
JDU का कांग्रेस पर हमला
जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को अपने अतीत की गलतियों के लिए देश की जनता से माफी माँगनी चाहिए। उनका यह भी कहना था कि चुनाव आयोग (ECI) पर लगातार सवाल उठाने से पार्टी को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलने वाला।
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि राहुल गांधी की कथित उदासीनता के कारण कांग्रेस अपना जनाधार खोती जा रही है। उन्होंने सुझाया कि पार्टी को अनावश्यक मुद्दों पर शोर मचाने के बजाय अपनी विश्वसनीयता बहाल करने पर ध्यान देना चाहिए।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब दिल्ली में विधानसभा चुनाव का माहौल करवट ले रहा है और कांग्रेस अपनी राजनीतिक उपस्थिति को नए सिरे से मज़बूत करने की कोशिश में है। आलोचकों का कहना है कि NDA की यह माँग व्यापारियों की चिंताओं से प्रेरित है, जबकि विरोधियों का तर्क है कि यह विपक्षी सभाओं को रोकने की एक राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस इस दबाव के बीच अपनी 1 नवंबर की रैली पर अड़ी रहती है या स्थगन का निर्णय लेती है।