1984 दंगा पीड़ितों का राहुल गांधी की 1 नवंबर रैली से विरोध, कहा- 'जख्मों पर नमक न छिड़कें'
सारांश
मुख्य बातें
1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों ने 24 अक्टूबर 2026 को ऐलान किया कि वे नई दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की रैली का विरोध करेंगे। पीड़ित परिवारों का कहना है कि 1 नवंबर उनके लिए एक गहरी पीड़ा की तारीख है, क्योंकि 1984 में इसी दिन दिल्ली सहित अनेक स्थानों पर सिख समुदाय को बर्बर हिंसा का सामना करना पड़ा था।
पीड़ितों का विरोध और गृह मंत्री को पत्र
पीड़ित परिवारों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर मांग की है कि 1 नवंबर को होने वाली इस रैली की अनुमति न दी जाए। उनका कहना है कि यदि रैली आयोजित हुई, तो बड़ी संख्या में पीड़ित और विधवा महिलाएं रामलीला मैदान पहुँचकर विरोध प्रदर्शन करेंगी।
एक दंगा पीड़ित महिला ने कहा कि 1 से 5 नवंबर तक उनके यहाँ पाठ और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिनमें पीड़ित परिवार एक-दूसरे के साथ दुख साझा करते हैं और दिवंगत परिजनों को याद करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री शाह से अपील की कि उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए रैली की अनुमति न दी जाए।
पीड़ितों की पीड़ा — 42 वर्ष बाद भी जिंदा जख्म
एक दंगा पीड़ित ने कहा कि 1984 के कत्लेआम को 42 वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी उस हिंसा की यादें आज भी उनके परिवारों को परेशान करती हैं। उस समय लोगों को उनकी पगड़ी देखकर निशाना बनाया गया, सिखों की फैक्ट्रियाँ और पेट्रोल पंप जलाए गए और परिवार की तीन पीढ़ियाँ इस त्रासदी से प्रभावित हुईं।
एक अन्य महिला पीड़ित ने बताया कि उनके परिवार में चार लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जिन परिवारों ने अपने पति, बच्चे और रिश्तेदार खोए, उनके दुख और न्याय की माँगों पर पर्याप्त ध्यान क्यों नहीं दिया गया।
कांग्रेस और गांधी परिवार पर गंभीर आरोप
1984 के दंगा पीड़ित कमलजीत सिंह धीर ने रैली को 'शर्मनाक' बताते हुए कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित करने के बजाय सिख समुदाय से माफी माँगनी चाहिए। धीर के अनुसार, 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के समय दिल्ली में तीन हजार से अधिक सिखों की हत्या की गई थी। उन्होंने राजीव गांधी के उस कथित बयान का भी उल्लेख किया जिसमें बड़े पेड़ के गिरने पर धरती हिलने की बात कही गई थी।
एक अन्य पीड़ित ने जगदीश टाइटलर, सज्जन कुमार और कमलनाथ का नाम लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए, यह आरोप लगाते हुए कि 1984 की हिंसा के लिए जिम्मेदार बताए जाने वाले कुछ नेताओं को पार्टी ने राजनीतिक जिम्मेदारियाँ दीं। उन्होंने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी से सिख समुदाय की भावनाओं के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की अपील की।
गौरतलब है कि पीड़ितों ने जून 1984 में दरबार साहिब में हुई कार्रवाई का भी संदर्भ दिया और कहा कि मयूर विहार के पास कल्याणपुरी और त्रिलोकपुरी जैसे इलाकों में भी समुदाय को निशाना बनाया गया था। पीड़ितों ने मुआवजे को भी अपर्याप्त बताया और कहा कि 1984 के पीड़ितों के साथ न्याय के मामले में वैसा व्यवहार नहीं हुआ जैसा होना चाहिए था।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब 1 नवंबर को रामलीला मैदान में कांग्रेस का बड़ा राजनीतिक जमावड़ा प्रस्तावित है। पीड़ित संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि रैली हुई तो वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए वहाँ पहुँचेंगे। कांग्रेस की ओर से अभी तक इस विरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना बाकी है कि क्या पार्टी रैली की तारीख पर पुनर्विचार करती है अथवा विरोध के बीच कार्यक्रम पूर्वनिर्धारित तिथि पर ही होता है।