1 नवंबर 2026
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अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला: 'मॉक पार्लियामेंट में ही बन सकते हैं PM, असली संसद में नंबर नहीं आएगा'

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अमित शाह का राहुल गांधी पर हमला: 'मॉक पार्लियामेंट में ही बन सकते हैं PM, असली संसद में नंबर नहीं आएगा'

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने चंडीगढ़ में राहुल गांधी पर दोहरा हमला बोला — एक तरफ 15 साल की चुनावी हार का हवाला देकर उनकी PM की दावेदारी को खारिज किया, दूसरी तरफ 1 नवंबर को दिल्ली रैली आयोजित करने पर 1984 दंगों के ज़ख्म उखाड़ने का आरोप लगाया। यह टकराव दिल्ली चुनावी रणनीति का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 1 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ में राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि वे केवल 'मॉक पार्लियामेंट' में ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
शाह ने कहा कि राहुल गांधी पिछले 15 वर्षों से लगातार चुनाव हार रहे हैं और सोनिया गांधी का उन्हें PM के रूप में देखने का सपना अधूरा है।
शाह ने 1 नवंबर 1984 के सिख विरोधी दंगों का हवाला देते हुए उसी तारीख को दिल्ली में कांग्रेस रैली आयोजित करने की कड़ी निंदा की।
उन्होंने आरोप लगाया कि सिख संगठनों और BJP की अपील के बावजूद राहुल गांधी ने कथित तौर पर विदेश से निर्देश लेकर रैली की।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पश्चिम दिल्ली में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च का नेतृत्व किया और एक्स पर 1984 की अपनी व्यक्तिगत यादें साझा कीं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार, 1 नवंबर 2026 को चंडीगढ़ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। शाह ने कहा कि यदि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने की तमन्ना है, तो वे केवल 'मॉक पार्लियामेंट' में ही यह सपना पूरा कर सकते हैं — असली संसद में उनका नंबर कभी नहीं आने वाला।

मॉक महाभियोग के संदर्भ में निशाना

गृह मंत्री की यह टिप्पणी कांग्रेस द्वारा एक दिन पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध आयोजित मॉक 'महाभियोग कार्यवाही' की पृष्ठभूमि में आई। शाह ने कहा कि राहुल गांधी पिछले 15 वर्षों से चुनावी पराजय का सामना करते आ रहे हैं और उनकी माँ सोनिया गांधी का अपने बेटे को प्रधानमंत्री की कुर्सी पर देखने का सपना अब तक अधूरा है। शाह के अनुसार, जनादेश बार बार कांग्रेस को नकारता रहा है।

1984 सिख विरोधी दंगों पर कड़ी आलोचना

शाह ने 1 नवंबर 1984 को नई दिल्ली में हुए सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "1 नवंबर 1984 को कांग्रेस ने दिल्ली में हजारों निर्दोष सिखों का नरसंहार करवाया था और आज उसी दिन राहुल गांधी ने दिल्ली में रैली आयोजित की। यह पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।"

शाह ने यह भी आरोप लगाया कि सिख संगठनों और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से रैली न करने की अपील के बावजूद राहुल गांधी ने रविवार को यह आयोजन किया। उनके अनुसार, यह निर्णय कथित तौर पर विदेश से मिले निर्देशों पर लिया गया।

व्यापारियों और समाज की अपील को नज़रअंदाज़ करने का आरोप

गृह मंत्री ने कहा, "दिल्ली के व्यापारियों ने भी अपील की थी कि रैली दिवाली के बाद आयोजित की जाए, क्योंकि इससे कारोबार को भारी नुकसान होगा। लेकिन राहुल बाबा को सिख नरसंहार के दिन ही रैली करनी थी।" शाह ने कहा कि राहुल गांधी की इस असंवेदनशीलता के चलते उनकी 'मोहब्बत की दुकान' लोगों को नफरत के अलावा कुछ नहीं दे पाएगी।

सरकार के न्याय प्रयासों का दावा

शाह ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने 1984 के दंगों के दोषी कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध मामलों को दोबारा खुलवाया, उन्हें जेल भिजवाया, पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिलाया और नौकरियाँ भी उपलब्ध कराईं।

हरदीप सिंह पुरी का मार्च और एक्स पोस्ट

इस बीच, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पश्चिम दिल्ली में BJP द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च का नेतृत्व किया, जिसका उद्देश्य 1984 के दंगा पीड़ितों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करना था। पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में 1984 की अपनी व्यक्तिगत यादें साझा कीं — उन्होंने बताया कि उस समय उनके माता पिता दिल्ली में थे और कुछ हिंदू मित्रों ने उन्हें शरण देकर मानवता की मिसाल पेश की थी।

पुरी ने कहा कि 1984 का नरसंहार केवल एक समुदाय की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के इतिहास पर लगा एक ऐसा घाव है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने पीड़ितों को न्याय दिलाने और राष्ट्रीय एकता को मज़बूत करने को उस दर्दनाक इतिहास की सबसे बड़ी सीख बताया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और BJP तथा कांग्रेस दोनों सिख समुदाय की भावनाओं को लेकर राजनीतिक मोर्चे पर आमने सामने हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन शाह का यह दावा कि रैली 'विदेश से निर्देश' पर हुई, अभी तक सत्यापित नहीं है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि इस पूरे विमर्श में 1984 के वास्तविक पीड़ितों की आवाज़ और उनके न्याय की स्थिति पर ध्यान कम, राजनीतिक स्कोरिंग ज़्यादा है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने राहुल गांधी के बारे में 'मॉक पार्लियामेंट' वाली बात क्यों कही?
यह टिप्पणी कांग्रेस द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध आयोजित मॉक 'महाभियोग कार्यवाही' की प्रतिक्रिया में आई। शाह ने व्यंग्य करते हुए कहा कि राहुल गांधी 15 वर्षों की चुनावी हार को देखते हुए केवल ऐसे नाटकीय आयोजनों में ही प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
1 नवंबर को दिल्ली रैली पर शाह ने क्या आरोप लगाया?
शाह ने कहा कि 1 नवंबर 1984 को कांग्रेस के शासन में सिख विरोधी नरसंहार हुआ था, और उसी तारीख को दिल्ली में रैली आयोजित करना पीड़ित परिवारों के घावों पर नमक छिड़कने जैसा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिख संगठनों और BJP की अपील के बावजूद राहुल गांधी ने कथित तौर पर विदेश से निर्देश लेकर यह आयोजन किया।
हरदीप सिंह पुरी ने 1 नवंबर को क्या किया?
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने पश्चिम दिल्ली में BJP द्वारा आयोजित 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' मार्च का नेतृत्व किया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर 1984 की अपनी व्यक्तिगत यादें साझा कीं और कहा कि उस त्रासदी के दौरान उनके माता पिता को हिंदू मित्रों ने शरण दी थी।
BJP सरकार ने 1984 दंगा पीड़ितों के लिए क्या किया?
अमित शाह के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने दोषी कांग्रेस नेताओं के विरुद्ध मामले दोबारा खुलवाए, उन्हें जेल भिजवाया, पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया और उन्हें नौकरियाँ भी उपलब्ध कराईं।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस की कार्यवाही क्या थी?
कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध एक मॉक 'महाभियोग कार्यवाही' आयोजित की, जो अमित शाह की टिप्पणियों की तात्कालिक पृष्ठभूमि बनी। यह कार्यवाही रविवार, 1 नवंबर 2026 से एक दिन पहले आयोजित की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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