30 अक्टूबर 2026
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कांग्रेस की 1 नवंबर रैली पर BJP का हमला: 'गुमराह करके चुनाव नहीं जीता जाता'

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कांग्रेस की 1 नवंबर रैली पर BJP का हमला: 'गुमराह करके चुनाव नहीं जीता जाता'

सारांश

BJP और JDU ने कांग्रेस की 1 नवंबर रैली को तीन मोर्चों से घेरा — दिवाली की भीड़, 1984 के सिख दंगों की तारीख और मतदाता सूची पर 'बिना सबूत के' आरोप। NDA की एकजुट प्रतिक्रिया दिखाती है कि यह महज रैली-विरोध नहीं, चुनावी नैरेटिव की लड़ाई है।

मुख्य बातें

BJP और JDU ने 30 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस की 1 नवंबर प्रस्तावित रैली पर एकजुट विरोध दर्ज कराया।
BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने दिवाली के मौसम और व्यापारियों की आपत्ति का हवाला देते हुए तारीख बदलने की माँग की।
BJP नेता राम कदम ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी न्यायपालिका और चुनाव आयोग पर राजनीतिक दबाव डाल रहे हैं।
BJP राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने 1 नवंबर 1984 के सिख दंगों की तारीख से रैली को जोड़ते हुए इसे संवेदनहीन बताया।
JDU के संजय झा ने कहा कि विपक्ष चुनाव में हार के डर से अराजकता फैला रहा है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 30 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता राहुल गांधी की 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली के विरोध में तीखी प्रतिक्रिया दी। BJP और उसके सहयोगी दलों के नेताओं ने एक साथ मोर्चा खोलते हुए आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर अराजकता फैलाने की कोशिश कर रहा है और जनता को भ्रमित करके सत्ता हासिल नहीं कर सकता।

दिवाली और 1984 — दोहरा विवाद

BJP सांसद योगेंद्र चंदोलिया ने कहा, 'लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है, चाहे वह विपक्षी दल हों या कोई और। लेकिन फैसला लेते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।' उन्होंने बताया कि दिल्ली में इन दिनों दिवाली का माहौल है और देशभर के व्यापारी राजधानी में हैं। उनके अनुसार, सभी व्यापारियों ने अनुरोध किया है कि रैली की तारीख थोड़ा आगे-पीछे खिसकाई जाए, लेकिन राहुल गांधी अपने फैसले पर अड़े हुए हैं।

चंदोलिया ने यह भी कहा कि 1 नवंबर 1984 को देश में बड़े दंगे हुए थे और इस दिन रैली रखना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, रैली 2 नवंबर या 12 नवंबर को भी रखी जा सकती थी।

BJP नेता राम कदम का संवैधानिक संस्थाओं पर तर्क

BJP नेता राम कदम ने राहुल गांधी पर सीधा हमला करते हुए कहा, 'राहुल गांधी का आचरण, चरित्र और हाल के फैसले पूरी तरह संवैधानिक संस्थाओं को अपमानित करने वाले हैं।' उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस एक तरफ संविधान का सम्मान करने का दावा करती है, लेकिन दूसरी तरफ न्यायपालिका और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर राजनीतिक दबाव डालती है।

कदम ने मतदाता सूची में सुधार के मुद्दे पर कहा कि जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, वे अपनी बात रख सकते हैं क्योंकि दावे जमा करने की समय-सीमा भी बढ़ा दी गई है। उनके शब्दों में, 'उनके पास कोई सबूत या सुझाव नहीं है, वे बस लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों को गुमराह करके आप चुनाव नहीं जीत सकते।'

BJP प्रवक्ता का 1984 दंगों पर तीखा बयान

BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने सबसे तीखा बयान देते हुए कहा, '1 नवंबर 1984 को कत्लेआम शुरू हुआ था। उसको लेकर सिखों में आज भी रोष है, उनके जख्म आज भी हरे हैं। 1 नवंबर को राहुल गांधी ने रैली रखकर उन सब जख्मों को वापस हरा कर दिया है।' उन्होंने आगे कहा कि राहुल गांधी को दुनिया की एकमात्र विधवा कॉलोनी में जाकर अपने पिता और दादी की गलतियों की माफी माँगनी चाहिए।

JDU का विपक्ष पर हमला

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कांग्रेस की रैली पर कहा, 'विपक्ष के लोग सिर्फ अराजक स्थिति पैदा कर रहे हैं। इन लोगों के साथ ऐसे लोग हैं, जो चाहते हैं कि बिना वोट के सत्ता पलट कर दें।'

झा ने यह भी कहा कि विपक्ष को पहले से पता है कि वह चुनाव नहीं जीत सकता, इसलिए यह प्रदर्शन किए जा रहे हैं। उन्होंने बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि जहाँ विपक्ष जीतता है, वहाँ सब ठीक लगता है, लेकिन जहाँ हार होती है, वहाँ गड़बड़ी के आरोप लगने लगते हैं।

आगे क्या होगा

कांग्रेस की 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली पर BJP और NDA के सहयोगी दलों का विरोध तेज होता दिख रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में दिवाली का उत्सव चल रहा है और व्यापारी वर्ग ने भी तारीख बदलने की अपील की है। आने वाले घंटों में कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और रैली के स्वरूप पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

1984 की तारीख की संवेदनशीलता और मतदाता सूची पर 'बेबुनियाद' आरोप — जो दिखाता है कि सत्तापक्ष इस रैली को महज एक विरोध-प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनावी नैरेटिव की लड़ाई मान रहा है। गौरतलब है कि मतदाता सूची विवाद पर विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए BJP ने दावे दर्ज कराने की समय-सीमा बढ़ाने का तथ्य सामने रखा, जो एक ठोस प्रक्रियागत जवाब है — लेकिन मूल आरोपों की स्वतंत्र जाँच की माँग अनुत्तरित रहती है। 1984 के दंगों की तारीख का हवाला देना राजनीतिक रूप से तीखा दाँव है, पर यह रैली के औचित्य पर नहीं, उसकी तारीख पर सवाल उठाता है — एक महत्वपूर्ण अंतर जिसे मुख्यधारा की कवरेज अक्सर नजरअंदाज कर देती है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP ने कांग्रेस की 1 नवंबर रैली का विरोध क्यों किया?
BJP ने तीन प्रमुख आधारों पर विरोध किया — दिवाली के मौसम में व्यापारियों की असुविधा, 1 नवंबर 1984 के सिख दंगों की संवेदनशील तारीख, और मतदाता सूची पर विपक्ष के 'बिना सबूत' के आरोप। पार्टी नेताओं ने रैली को अराजकता फैलाने की कोशिश बताया।
1 नवंबर 1984 का रैली की तारीख से क्या संबंध है?
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह के अनुसार, 1 नवंबर 1984 को सिख विरोधी दंगों की शुरुआत हुई थी। उन्होंने कहा कि इस तारीख पर रैली रखकर राहुल गांधी ने सिखों के घावों को हरा कर दिया है।
मतदाता सूची विवाद पर BJP का क्या जवाब है?
BJP नेता राम कदम ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार के दावे जमा करने की समय-सीमा बढ़ा दी गई है और जिन लोगों के नाम छूटे हैं, वे अपनी बात रख सकते हैं। उन्होंने विपक्ष से ठोस सबूत पेश करने की माँग की।
JDU ने इस विवाद पर क्या कहा?
JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि विपक्ष को पता है वह चुनाव नहीं जीत सकता, इसलिए अराजकता फैला रहा है। उन्होंने बिहार में SIR प्रक्रिया का हवाला देते हुए कहा कि देश की जनता विपक्ष को बार-बार आईना दिखा रही है।
कांग्रेस की रैली किस मुद्दे पर प्रस्तावित है?
स्रोत सामग्री के अनुसार, रैली मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विपक्ष के विरोध के तहत प्रस्तावित है। BJP ने इन आरोपों को मनगढ़ंत और झूठा बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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