राहुल गांधी का 1 नवंबर दिल्ली रैली के लिए आह्वान: 'वोट चुराया जा रहा, चुपचाप नहीं सहेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 25 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर छात्रों, युवाओं, किसानों और मजदूरों से 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की प्रस्तावित महारैली में शामिल होने की अपील की। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों से नाम काटे जा रहे हैं और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है।
राहुल गांधी का एक्स पोस्ट और मुख्य आरोप
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, 'हमारा वोट चुराया जा रहा है और ये हम किसी हाल में चुपचाप नहीं सहेंगे। मतदाता सूचियों से नाम काटे गए। नियम-कानून तोड़े गए। और सवाल पूछने वालों पर लाठियां चलीं। अब जवाब देश देगा।' इसी पोस्ट में उन्होंने रैली की घोषणा करते हुए लिखा, '1 नवंबर — चलो दिल्ली। वोट बचाओ — देश बचाओ जन मार्च और महारैली।'
कांग्रेस नेता ने समाज के विभिन्न वर्गों — छात्र, किसान, मजदूर, महिलाएं, नौजवान और व्यापारी — को संबोधित करते हुए कहा कि जिस-जिस को लोकतंत्र की फिक्र है, वो ज़रूर आए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है।
भाजपा पर तंज
राहुल गांधी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उसके सहयोगियों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, 'भाजपा और उसके साथियों का दिल से धन्यवाद, जो इस कार्यक्रम का इतना जोर-शोर से प्रचार कर रहे हैं और इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचा रहे हैं। बस अगले 7 दिन भी यही जोश और लगन बनाए रखिए।' इस बयान को राजनीतिक हलकों में सत्ता पक्ष की आलोचना के प्रति पलटवार के रूप में देखा जा रहा है।
व्यापारियों का विरोध और आर्थिक चिंता
रैली की घोषणा के साथ ही दिल्ली के व्यापारी वर्ग ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। व्यापारियों ने राहुल गांधी से रैली टालने की अपील की, यह तर्क देते हुए कि धनतेरस और दीपावली की खरीददारी नवंबर के पहले सप्ताह में शुरू हो जाती है। व्यापारियों के अनुसार, त्योहारी सीजन में दिल्ली में करीब ₹25 हजार करोड़ का कारोबार होता है और यदि पुलिस ने रास्ते बंद किए तो लगभग ₹10 हजार करोड़ का नुकसान हो सकता है।
गौरतलब है कि रामलीला मैदान राजधानी का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र के करीब स्थित है और बड़े राजनीतिक आयोजनों के दौरान इस क्षेत्र में यातायात प्रतिबंध अनिवार्यतः लगाए जाते हैं।
1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ितों का विरोध
1984 के सिख-विरोधी दंगों के पीड़ित परिवारों ने भी इस रैली का विरोध करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि 1 नवंबर उनके लिए अत्यंत संवेदनशील तारीख है, क्योंकि 1984 में इसी दिन दिल्ली सहित कई स्थानों पर सिख समुदाय को निशाना बनाया गया था। पीड़ित परिवारों ने आरोप लगाया कि इस तारीख पर राजनीतिक रैली आयोजित करना उनके पुराने जख्मों को फिर से हरा करने जैसा है।
यह ध्यान देने योग्य है कि कांग्रेस के शासनकाल में हुए उन दंगों के लिए पार्टी आज भी आलोचना के घेरे में रहती है, जिससे यह तारीख और अधिक संवेदनशील हो जाती है।
आगे क्या होगा
कांग्रेस ने अभी तक रैली रद्द करने या तारीख बदलने के कोई संकेत नहीं दिए हैं। 1 नवंबर को प्रस्तावित यह 'वोट बचाओ — देश बचाओ जन मार्च और महारैली' विपक्ष के लिए सरकार पर चुनावी प्रक्रिया को लेकर दबाव बनाने का बड़ा मंच हो सकती है। व्यापारियों और पीड़ित समूहों के विरोध के बीच यह देखना होगा कि प्रशासन किस प्रकार स्थिति को संभालता है।