25 अक्टूबर 2026
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आरएसएस की शताब्दी पर इंदौर में भव्य पथ संचलन, चार जिलों के स्वयंसेवकों ने दिखाई अनुशासन की मिसाल

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आरएसएस की शताब्दी पर इंदौर में भव्य पथ संचलन, चार जिलों के स्वयंसेवकों ने दिखाई अनुशासन की मिसाल

सारांश

आरएसएस की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर इंदौर की बस्तियों में भव्य पथ संचलन निकला। चार जिलों के स्वयंसेवकों की अनुशासित कदमताल और ध्वनि घोष दल ने शताब्दी वर्ष के जश्न को विशेष स्वरूप दिया — एक ऐसी परंपरा जो 1925 से अनवरत चली आ रही है।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 25 अक्टूबर 2026 को इंदौर में बस्ती स्तरीय पथ संचलन आयोजित किया गया।
चार जिलों की विभिन्न बस्तियों से स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
संचलन में ध्वनि घोष दल सम्मिलित रहे; भगवा ध्वज को गुरु-स्वरूप मानकर परंपरा का पालन किया गया।
मुख्य अतिथि जगदीश गोयल ने स्वयंसेवकों की अनुशासन-भावना को प्रेरणादायक बताया।
संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी; यह शताब्दी वर्ष की विशेष गतिविधियों का हिस्सा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर 25 अक्टूबर 2026 को इंदौर में बस्ती स्तर पर भव्य पथ संचलन आयोजित किया गया। चार जिलों की विभिन्न बस्तियों से बड़ी संख्या में स्वयंसेवक इस संचलन में सम्मिलित हुए और अपनी अनुशासित कदमताल तथा सामूहिक एकजुटता से उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष की गतिविधियों में विशेष स्थान रखता है।

पथ संचलन का आयोजन और स्वरूप

इंदौर की विभिन्न बस्तियों में स्थानीय स्तर पर आयोजित इस पथ संचलन में स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों से पूरी तरह अनुशासित होकर निकले। सभी प्रतिभागी एक पंक्ति में कदम से कदम मिलाकर चलते दिखे, जो आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। भगवा ध्वज को गुरु-स्वरूप मानकर संघ की परंपरा के अनुसार स्वयंसेवकों ने संचलन में भाग लिया।

पथ संचलन में ध्वनि घोष दल भी सम्मिलित रहे। घोष की सुमधुर धुनों के बीच एकसमान कदमताल करते स्वयंसेवकों की अनुशासित कतारें पूरे आयोजन को एक विशेष गरिमा प्रदान करती रहीं। शहर के विभिन्न इलाकों में वातावरण संघमय बना रहा।

शताब्दी वर्ष का विशेष महत्व

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के शुभ अवसर पर हुई थी। संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के कारण इस वर्ष के आयोजनों का महत्व और भी अधिक हो गया। विजयादशमी पर पथ संचलन संघ की प्रमुख और प्राचीन परंपराओं में से एक है, जिसके माध्यम से स्वयंसेवक अनुशासन, संगठन-शक्ति और सामाजिक एकजुटता का संदेश समाज को देते हैं।

गौरतलब है कि यह वह अवसर है जब संघ ने अपनी एक शताब्दी की यात्रा पूरी की है — एक ऐसा संगठन जो देश के कोने-कोने में सक्रिय है और जिसकी परंपराएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी अनवरत चली आ रही हैं। इंदौर में आयोजित बस्ती स्तरीय पथ संचलन इसी निरंतरता का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया।

मुख्य अतिथि की प्रतिक्रिया

मुख्य अतिथि जगदीश गोयल ने पथ संचलन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, 'पथ संचलन देखकर मुझे बहुत खुशी है। इस पथ संचलन से पता चलता है कि 100 साल पुरानी परंपरा को स्वयंसेवक आज भी निभा रहे हैं। स्वयंसेवक बहुत ही अनुशासित रहते हैं, जिनसे सभी को प्रेरणा लेने की जरूरत है।'

आम जनता पर असर

इंदौर की बस्तियों में निकले इस पथ संचलन ने स्थानीय नागरिकों में उत्साह का संचार किया। स्वयंसेवकों की अनुशासित पंक्तियाँ और सामूहिक कदमताल देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मार्गों पर एकत्र हुए। यह आयोजन समाज में संगठन और अनुशासन के मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश लेकर आया।

आगे की गतिविधियाँ

संघ की शताब्दी वर्ष की गतिविधियाँ पूरे देश में विभिन्न स्तरों पर आयोजित की जा रही हैं। इंदौर का यह बस्ती-स्तरीय पथ संचलन उन्हीं व्यापक आयोजनों की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। आने वाले समय में शताब्दी वर्ष के अन्य कार्यक्रम भी देशभर में आयोजित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संघ के शताब्दी वर्ष की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो जमीनी स्तर पर संगठन की उपस्थिति को रेखांकित करती है। 1925 से अनवरत चली आ रही यह परंपरा यह संकेत देती है कि संघ ने अपने सांगठनिक ढाँचे को दशकों में किस तरह जीवित रखा है। हालाँकि मुख्यधारा की कवरेज अक्सर बड़े केंद्रीय आयोजनों पर केंद्रित रहती है, परंतु बस्ती-स्तरीय संचलन ही वह नींव है जो संगठन को शहरी और अर्ध-शहरी समाज से जोड़ती है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदौर में आरएसएस का पथ संचलन क्यों आयोजित किया गया?
यह पथ संचलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। संघ की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी और विजयादशमी पर पथ संचलन उसकी प्रमुख परंपराओं में से एक है।
इंदौर पथ संचलन में कितने जिलों के स्वयंसेवक शामिल हुए?
इंदौर में आयोजित इस पथ संचलन में चार जिलों की विभिन्न बस्तियों के स्वयंसेवकों ने सहभागिता की। बस्ती स्तर पर आयोजन किए जाने के कारण स्थानीय स्तर पर भागीदारी व्यापक रही।
आरएसएस का पथ संचलन क्या होता है?
पथ संचलन आरएसएस की एक अनुशासन-प्रदर्शन परंपरा है जिसमें स्वयंसेवक निर्धारित मार्गों पर एक पंक्ति में कदम से कदम मिलाकर चलते हैं। इस दौरान भगवा ध्वज को गुरु-स्वरूप माना जाता है और ध्वनि घोष दल भी संचलन का हिस्सा होते हैं।
आरएसएस की स्थापना कब हुई थी?
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के दिन हुई थी। इस वर्ष संघ ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण किए हैं, जिसे शताब्दी वर्ष के रूप में विशेष आयोजनों के साथ मनाया जा रहा है।
इंदौर पथ संचलन में मुख्य अतिथि कौन थे और उन्होंने क्या कहा?
इंदौर पथ संचलन में मुख्य अतिथि जगदीश गोयल थे। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों का अनुशासन 100 साल पुरानी परंपरा की जीवंत निरंतरता है और समाज को उनसे प्रेरणा लेने की जरूरत है।
राष्ट्र प्रेस
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