20 अक्टूबर 2026
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आरएसएस का विजयादशमी पर अयोध्या में शौर्य प्रदर्शन, संघ स्थापना के 100 वर्ष पर रामलला नगर से पथ संचलन

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आरएसएस का विजयादशमी पर अयोध्या में शौर्य प्रदर्शन, संघ स्थापना के 100 वर्ष पर रामलला नगर से पथ संचलन

सारांश

संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर अयोध्या के रामलला नगर में विजयादशमी का यह आयोजन महज परंपरा नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक संदेश था — जहाँ राम जन्मभूमि के मुख्य द्वार तक पथ संचलन हुआ और शस्त्र पूजन की सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई।

मुख्य बातें

आरएसएस ने 20 अक्टूबर 2026 को अयोध्या के रामलला नगर में विजयादशमी पर शस्त्र पूजन और पथ संचलन आयोजित किया।
इस वर्ष संघ स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने के कारण आयोजन विशेष महत्व का रहा।
पथ संचलन तुलसी उद्यान से हनुमानगढ़ी और राम जन्मभूमि के मुख्य द्वार तक गया।
राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन और नगर संघचालक जयरामदास कार्यक्रम में उपस्थित रहे।
जयपुर के झोटवाड़ा में भी संघ ने विजयादशमी पर रूट मार्च का आयोजन किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने 20 अक्टूबर 2026 को अयोध्या के रामलला नगर में विजयादशमी पर्व अनुशासन और परंपरागत उत्साह के साथ मनाया। शस्त्र पूजन, ध्वजारोहण और पथ संचलन कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। यह आयोजन इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है क्योंकि इस वर्ष संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

कार्यक्रम की शुरुआत रामलला नगर में शाखा से हुई, जिसमें ध्वज प्रणाम, प्रार्थना और बौद्धिक कार्यक्रम शामिल थे। इसके उपरांत शस्त्र पूजन और ध्वजारोहण की विधिवत परंपरा निभाई गई। महानगर सेवा प्रमुख बालेंद्र ने स्वयंसेवकों को संबोधित किया।

कार्यक्रम में राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन और नगर संघचालक जयरामदास सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे। स्वयंसेवक सफेद शर्ट, खाकी पैंट और काली टोपी की पारंपरिक वेशभूषा में लाठी के साथ अनुशासित कतार में चलते नजर आए।

पथ संचलन का मार्ग

नगर संघचालक जयरामदास ने बताया कि पथ संचलन तुलसी उद्यान से प्रारंभ होकर लता चौक, हनुमानगढ़ी और श्री राम जन्मभूमि के मुख्य द्वार तक गया। इसके पश्चात हनुमानगढ़ी रोड से होते हुए संचलन वापस तुलसी उद्यान में आकर संपन्न हुआ। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

नेताओं के वक्तव्य

राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने कहा, 'आज विजयादशमी का दिन है। यह हमारे संघ के प्रमुख उत्सवों में से एक है। इस वर्ष संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो गए हैं। इसी संदर्भ में यहां स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण हुआ और पथ संचलन का आयोजन किया गया।'

नगर संघचालक जयरामदास ने परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा अत्याचारी और पापाचारी रावण का अंत करने वाले भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी के यश और प्रतिष्ठा में वृद्धि के लिए निभाई जाती है।

आयोजन का व्यापक संदर्भ

यह आयोजन ऐसे समय में हुआ है जब संघ अपनी शताब्दी वर्षगांठ मना रहा है। गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के पश्चात यह रामलला नगर में संघ का एक विशेष प्रतीकात्मक महत्व का आयोजन था। देश के अन्य हिस्सों में भी संघ ने इसी तरह के कार्यक्रम आयोजित किए — जयपुर, राजस्थान के झोटवाड़ा इलाके में भी स्वयंसेवकों ने पारंपरिक रूट मार्च में भाग लिया।

आने वाले दिनों में संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े अन्य आयोजनों की भी संभावना जताई जा रही है, जो संगठन की राष्ट्रव्यापी उपस्थिति को रेखांकित करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सोचा-समझा प्रतीकात्मक कदम है — शताब्दी वर्ष में संगठन की बढ़ती सांस्कृतिक उपस्थिति का स्पष्ट संकेत। गौरतलब है कि यह आयोजन उस नगर में हो रहा है जहाँ संघ की वैचारिक जड़ें सबसे गहरी मानी जाती हैं। यह देखना रोचक होगा कि शताब्दी वर्ष में संघ देशभर में ऐसे आयोजनों को किस हद तक व्यापक राजनीतिक-सामाजिक एजेंडे से जोड़ता है।
RashtraPress
20 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या में आरएसएस का विजयादशमी पथ संचलन कहाँ से कहाँ तक गया?
पथ संचलन तुलसी उद्यान से शुरू होकर लता चौक, हनुमानगढ़ी और श्री राम जन्मभूमि के मुख्य द्वार तक गया और वहाँ से हनुमानगढ़ी रोड होते हुए वापस तुलसी उद्यान में संपन्न हुआ।
इस वर्ष आरएसएस का विजयादशमी आयोजन क्यों विशेष है?
इस वर्ष संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे हो रहे हैं, इसीलिए देशभर में विजयादशमी आयोजन विशेष महत्व के साथ मनाए जा रहे हैं। अयोध्या में यह आयोजन राम मंदिर के पास रामलला नगर में हुआ, जो इसे प्रतीकात्मक रूप से और भी महत्वपूर्ण बनाता है।
विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा क्यों निभाई जाती है?
नगर संघचालक जयरामदास के अनुसार, भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी द्वारा रावण के अंत के उपलक्ष्य में उनके यश और प्रतिष्ठा की वृद्धि के लिए हर वर्ष शस्त्र पूजन किया जाता है। यह संघ की वार्षिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा है।
अयोध्या के अलावा और कहाँ विजयादशमी पर आरएसएस ने आयोजन किए?
जयपुर, राजस्थान के झोटवाड़ा इलाके में भी आरएसएस ने विजयादशमी के अवसर पर रूट मार्च आयोजित किया, जिसमें स्वयंसेवकों ने पारंपरिक जुलूस में भाग लिया।
पथ संचलन में स्वयंसेवकों की वेशभूषा कैसी थी?
पथ संचलन में स्वयंसेवक सफेद शर्ट, खाकी पैंट और काली टोपी की पारंपरिक वेशभूषा में लाठी के साथ अनुशासित कतार में चले। सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।
राष्ट्र प्रेस
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