25 अक्टूबर 2026
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मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने ई-संजीवनी की तारीफ की, अंडमान से लद्दाख तक के मरीजों की कहानी सुनाई

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मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने ई-संजीवनी की तारीफ की, अंडमान से लद्दाख तक के मरीजों की कहानी सुनाई

सारांश

मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने ई-संजीवनी को महज़ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि जारवा जनजाति के बच्चे से लेकर लद्दाख की गर्भवती महिला तक — एक जीवन रेखा के रूप में पेश किया। 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के साथ यह डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचा दूरस्थ भारत की तस्वीर बदलने की कोशिश कर रहा है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा की सफलता का उल्लेख किया।
अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के 7 वर्षीय बच्चे ओहो-ताहाने को निमोनिया में ई-संजीवनी से तत्काल विशेषज्ञ सहायता मिली।
लद्दाख , लक्षद्वीप और नागालैंड के मरीजों को भी ई-संजीवनी के ज़रिए दूरस्थ विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त हुआ।
देशभर में 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर पंचायत स्तर पर वेलनेस सेंटर के रूप में कार्यरत हैं।
ई-संजीवनी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है, जो स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप से ऑनलाइन परामर्श देती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को प्रसारित 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा ई-संजीवनी का विशेष उल्लेख किया और बताया कि यह सेवा देश के दूर-दराज और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए किस तरह जीवनरक्षक साबित हो रही है। उन्होंने अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, लद्दाख और नागालैंड के वास्तविक मामलों के उदाहरण देकर इस डिजिटल स्वास्थ्य पहल की सफलता को रेखांकित किया।

मुख्य घटनाक्रम

मोदी ने अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में रहने वाले जारवा जनजाति के सात वर्षीय बच्चे ओहो-ताहाने का उदाहरण दिया, जिसे तेज बुखार के साथ-साथ सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क किया, जिसके बाद पता चला कि बच्चे को निमोनिया था। विशेषज्ञ की निगरानी में उपचार शुरू होते ही उसकी स्थिति में तेज़ सुधार दर्ज किया गया।

दूसरे राज्यों से मामले

लक्षद्वीप के कल्पेनी में रहने वाले लगभग 60 वर्षीय कुन्ही कोया की तबीयत अचानक बिगड़ी, तो समुद्र पार कवरत्ती में बैठे अनुभवी चिकित्सक ने ई-संजीवनी के ज़रिए स्थानीय मेडिकल टीम को उपचार में मार्गदर्शन किया और उन्हें राहत मिली।

लद्दाख के जांस्कर की कुंजांग डोलमा को गर्भावस्था के दौरान जटिलताएं उत्पन्न हुईं। इस मुश्किल घड़ी में ई-संजीवनी के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सक ने तत्काल सहायता प्रदान की। इसी तरह नागालैंड के पेरेन में 12 वर्षीय मिशेम के कान में संक्रमण और बुखार था — विशेषज्ञ ने त्वरित निदान कर सही दवाइयाँ सुझाईं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर और डिजिटल स्वास्थ्य ढाँचा

प्रधानमंत्री ने बताया कि आज देशभर में लगभग 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित हो रहे हैं, जो पंचायत स्तर पर वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाँव के लोग भी अब नियमित स्वास्थ्य जाँच करवाने लगे हैं और इसमें ई-संजीवनी की भूमिका केंद्रीय है।

ई-संजीवनी क्या है

ई-संजीवनी केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन सेवा है। इसके ज़रिए नागरिक स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप से घर बैठे डॉक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञों से ऑनलाइन परामर्श ले सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देश के दूरस्थ इलाकों में चिकित्सा बुनियादी ढाँचे की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

आम जनता पर असर

गौरतलब है कि भारत के आदिवासी, पहाड़ी और द्वीपीय क्षेत्रों में किसी विशेषज्ञ से मिलने के लिए कई घंटों — कभी-कभी कई दिनों — की यात्रा करनी पड़ती है। ई-संजीवनी ने इस भौगोलिक बाधा को डिजिटल माध्यम से कम करने का प्रयास किया है। ओहो-ताहाने और मिशेम जैसे उदाहरण दर्शाते हैं कि समय पर मिला परामर्श जीवन-मृत्यु का फर्क पैदा कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि क्या इस सेवा का विस्तार उन क्षेत्रों तक भी होता है जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी अस्थिर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी यह है कि क्या यह सेवा उन लाखों लोगों तक पहुँच रही है जहाँ इंटरनेट कनेक्टिविटी अभी भी अनिश्चित है। 'मन की बात' में चुनिंदा सफलता की कहानियाँ सुनाना एक बात है, परंतु ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के वास्तविक उपयोग के स्वतंत्र आँकड़े उपलब्ध नहीं कराए गए। 1.90 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिरों का आँकड़ा उत्साहजनक है, लेकिन इनकी गुणवत्ता, स्टाफिंग और प्रति केंद्र औसत परामर्श संख्या जैसे संकेतक सार्वजनिक किए बिना यह तस्वीर अधूरी रहती है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा क्या है?
ई-संजीवनी केंद्र सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित राष्ट्रीय टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म है। इसके ज़रिए नागरिक स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप से ऑनलाइन डॉक्टर और चिकित्सा विशेषज्ञों से परामर्श ले सकते हैं, विशेषकर वे जो दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहते हैं।
PM मोदी ने 'मन की बात' में ई-संजीवनी का उल्लेख क्यों किया?
25 अक्टूबर 2026 को प्रसारित 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने देश के दूर-दराज इलाकों — अंडमान-निकोबार, लक्षद्वीप, लद्दाख और नागालैंड — से वास्तविक मामलों के उदाहरण देकर बताया कि यह सेवा किस तरह जीवनरक्षक साबित हो रही है। इसका उद्देश्य डिजिटल स्वास्थ्य पहल के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना था।
बाराटांग द्वीप के बच्चे ओहो-ताहाने का मामला क्या था?
अंडमान-निकोबार के बाराटांग द्वीप में जारवा जनजाति के 7 वर्षीय बच्चे ओहो-ताहाने को तेज बुखार और सांस लेने में कठिनाई हो रही थी। स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों ने ई-संजीवनी के ज़रिए विशेषज्ञ से संपर्क किया, जाँच में निमोनिया का पता चला और उपचार शुरू होते ही बच्चे की स्थिति में तेज़ सुधार हुआ।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर क्या हैं और इनकी संख्या कितनी है?
आयुष्मान आरोग्य मंदिर पंचायत स्तर पर स्थापित वेलनेस सेंटर हैं, जो ग्रामीण नागरिकों को प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराते हैं। PM मोदी के अनुसार, देशभर में अब लगभग 1.90 लाख ऐसे केंद्र संचालित हो रहे हैं और इनमें ई-संजीवनी के माध्यम से नियमित जाँच भी होती है।
ई-संजीवनी से दूरदराज के लोगों को कैसे फायदा होता है?
ई-संजीवनी भौगोलिक दूरी की बाधा को डिजिटल माध्यम से खत्म करती है — मरीज़ को विशेषज्ञ तक पहुँचने के लिए लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ती। लक्षद्वीप के कुन्ही कोया और लद्दाख की कुंजांग डोलमा जैसे मामलों में दिखा कि दूर बैठे विशेषज्ञ ने स्थानीय टीम को मार्गदर्शन देकर समय पर उपचार सुनिश्चित किया।
राष्ट्र प्रेस
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