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मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने किया IIT मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का जिक्र

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मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने किया IIT मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का जिक्र

सारांश

मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने IIT मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर की उपलब्धि साझा की — 100 मानव मस्तिष्कों की थ्री-डी मैपिंग, परम शक्ति सुपर कंप्यूटर और ओपन-सोर्स डेटा के साथ। अल्जाइमर जैसी बीमारियों से लड़ने में यह मिशन दुनिया में अपनी तरह का पहला है।

मुख्य बातें

PM मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में आईआईटी मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर की उपलब्धियाँ साझा कीं।
सेंटर 100 मानव मस्तिष्कों की हाई-रिज़ॉल्यूशन थ्री-डी मैपिंग का लक्ष्य लेकर चल रहा है — दुनिया में अपनी तरह का पहला मिशन।
इस कार्य के लिए परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है।
ब्रेन डेटा भविष्य में ओपन सोर्स के रूप में वैश्विक वैज्ञानिकों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
मोदी ने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी के परिवार के अंगदान के फैसले को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को 'मन की बात' के 139वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए ब्रेन रिसर्च के क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों की चर्चा की। उन्होंने आईआईटी मद्रास स्थित सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर द्वारा विकसित विश्व-स्तरीय ब्रेन इमेजिंग प्लेटफॉर्म को विशेष रूप से रेखांकित किया। साथ ही, अंगदान के महत्व पर भी उन्होंने गहरी बात कही।

चेन्नई दौरे का अनुभव और वैज्ञानिकों से मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने बताया, 'अक्टूबर की शुरुआत में मैं चेन्नई गया था। वहाँ मेरी मुलाकात देश के कई वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं से हुई।' उन्होंने कहा कि यह देखकर गर्व होता है कि भारत के युवा आज ऐसे विषयों पर काम कर रहे हैं जो पूरी मानवता के भविष्य को बदलने की क्षमता रखते हैं। इसी यात्रा के दौरान उन्होंने आईआईटी मद्रास में सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का लोकार्पण किया था।

ब्रेन इमेजिंग प्लेटफॉर्म — दुनिया में अपनी तरह का पहला

मोदी ने इस सेंटर की तकनीकी क्षमता का विवरण देते हुए कहा कि यहाँ मानव मस्तिष्क की हाई-रिज़ॉल्यूशन डिजिटल थ्री-डी तस्वीरें तैयार की जा रही हैं। इस प्लेटफॉर्म का लक्ष्य 100 मानव मस्तिष्कों की थ्री-डी मैपिंग कर उनका सूक्ष्म अध्ययन करना है, जिसे उन्होंने दुनिया में अपनी तरह का पहला मिशन बताया। इस महत्वाकांक्षी कार्य के लिए परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज की खोज तेज़ हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विज्ञान ने कितनी भी प्रगति कर ली हो, मानव मस्तिष्क आज भी एक बड़ी पहेली है, और जितनी गहराई से इसे समझा जाएगा, स्वास्थ्य के क्षेत्र में उतने नए रास्ते खुलेंगे।

ओपन-सोर्स डेटा — वैश्विक अनुसंधान को मिलेगा लाभ

प्रधानमंत्री ने जानकारी दी कि 100 मानव मस्तिष्कों से जुड़ा यह डेटा भविष्य में ओपन सोर्स के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि दुनियाभर के वैज्ञानिक और शोधकर्ता इसका लाभ उठा सकें। गौरतलब है कि इस रिसर्च सेंटर के निर्माण में उद्योग जगत ने सरकार के साथ मिलकर भूमिका निभाई है और आईआईटी मद्रास के कई पूर्व छात्र व शिक्षाविद इससे जुड़े हैं। यह सार्वजनिक-निजी सहयोग का एक उल्लेखनीय उदाहरण है।

अंगदान की अहमियत — नर्मदापुरम की शिवानी की प्रेरक कहानी

मोदी ने इस उन्नत शोध में अंगदान की भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण दिया, जो एक सड़क हादसे में असमय चली गईं। उनके परिवार ने इस कठिन समय में भी अंगदान का साहसी निर्णय लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस फैसले ने पूरे समाज को एक बड़ा संदेश दिया — मानवता की दिशा में उठाया गया एक छोटा कदम किसी अन्य परिवार की खुशियाँ लौटा सकता है और वैज्ञानिक अनुसंधान को भी आगे बढ़ा सकता है।

आगे की राह

सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर का यह ब्रेन मैपिंग मिशन भारत को वैश्विक न्यूरोसाइंस अनुसंधान के मानचित्र पर एक नई पहचान दिला सकता है। डेटा के ओपन-सोर्स होने से अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाएँ भी खुलेंगी, और अल्जाइमर व डिमेंशिया जैसी बीमारियों के उपचार की दिशा में नई खोजों को बल मिल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब यह डेटा वैश्विक स्तर पर उपलब्ध हो और अल्जाइमर जैसी बीमारियों पर ठोस शोध परिणाम सामने आएँ। अंगदान की चर्चा को नीतिगत दिशा से जोड़ना भी ज़रूरी है — भारत में अंगदान की दर अभी भी विश्व औसत से काफी कम है, और इस दिशा में जागरूकता अभियान से आगे ठोस तंत्र की दरकार है।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर क्या है और यह कहाँ है?
सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर आईआईटी मद्रास, चेन्नई में स्थित एक अत्याधुनिक न्यूरोसाइंस शोध केंद्र है। इसका उद्घाटन PM मोदी ने अक्टूबर 2026 में चेन्नई दौरे के दौरान किया था। यह केंद्र मानव मस्तिष्क की हाई-रिज़ॉल्यूशन थ्री-डी इमेजिंग और मैपिंग के क्षेत्र में अग्रणी कार्य कर रहा है।
100 मानव मस्तिष्कों की 3D मैपिंग का क्या उद्देश्य है?
इस मिशन का उद्देश्य मानव मस्तिष्क की संरचना और कार्यप्रणाली को सूक्ष्म स्तर पर समझना है, जो अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों के इलाज की दिशा में नई संभावनाएँ खोल सकता है। PM मोदी के अनुसार यह दुनिया में अपनी तरह का पहला मिशन है। इस डेटा को भविष्य में ओपन-सोर्स के रूप में वैश्विक शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।
परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का इस रिसर्च में क्या योगदान है?
परम शक्ति सुपर कंप्यूटर का उपयोग ब्रेन इमेजिंग डेटा की जटिल प्रोसेसिंग और थ्री-डी मैपिंग के लिए किया जा रहा है। इस स्तर की हाई-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग के लिए असाधारण कम्प्यूटेशनल शक्ति की आवश्यकता होती है, जो परम शक्ति प्रदान करता है।
मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने अंगदान पर क्या कहा?
PM मोदी ने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण दिया, जो एक सड़क दुर्घटना में असमय चली गईं और जिनके परिवार ने कठिन समय में भी अंगदान का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के उन्नत ब्रेन रिसर्च में अंगदान की महत्वपूर्ण भूमिका है। मोदी ने अंगदान को मानवता की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया।
मन की बात कार्यक्रम का 139वाँ एपिसोड कब प्रसारित हुआ?
मन की बात का 139वाँ एपिसोड 25 अक्टूबर 2026 को रविवार को प्रसारित हुआ। इसमें PM मोदी ने विज्ञान, अनुसंधान और मानवता से जुड़े कई विषयों पर बात की, जिनमें IIT मद्रास के सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर की उपलब्धि केंद्र में रही।
राष्ट्र प्रेस
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