27 अक्टूबर 2026
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राहुल गांधी के रैली पर अड़े रहने के बाद CTI ने फिर उठाई तारीख बदलने की मांग, ₹10,000 करोड़ नुकसान की आशंका

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राहुल गांधी के रैली पर अड़े रहने के बाद CTI ने फिर उठाई तारीख बदलने की मांग, ₹10,000 करोड़ नुकसान की आशंका

सारांश

दिवाली के ठीक पहले दिल्ली के सबसे बड़े बाज़ारों के व्यापारी रामलीला मैदान में 1 नवंबर की इंडिया गठबंधन रैली से घबराए हुए हैं। CTI ने ₹10,000 करोड़ नुकसान की चेतावनी दी है — लेकिन राहुल गांधी के एक्स पोस्ट के बाद भी रैली टलती नहीं दिख रही।

मुख्य बातें

CTI ने 27 अक्टूबर 2026 को फिर माँग की कि 1 नवंबर की इंडिया गठबंधन रैली स्थगित हो।
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि रामलीला मैदान में रैली का इरादा बरकरार है।
CTI के अनुसार रैली से 21 प्रमुख बाज़ार सीधे प्रभावित होंगे और नुकसान ₹10,000 करोड़ तक पहुँच सकता है।
10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर 3,000-4,000 लोगों के प्रदर्शन से ही ₹3,000 करोड़ का नुकसान हुआ था।
CTI ने सुझाव दिया — रैली 10 नवंबर के बाद या स्थल बदलकर बुराड़ी ग्राउंड या JN स्टेडियम पर हो।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी का पोस्ट व्यापारियों की चिंता का समाधान नहीं।

दिल्ली के व्यापारिक संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 27 अक्टूबर 2026 को एक बार फिर माँग दोहराई कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की रैली को स्थगित किया जाए। यह माँग उस वक्त सामने आई जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि रैली आयोजित करने का इरादा बरकरार है। CTI के अनुसार, दिवाली के पहले के इस व्यस्ततम खरीदारी सीजन में रैली से ₹10,000 करोड़ तक का व्यापारिक नुकसान हो सकता है।

व्यापारियों की मुख्य चिंताएँ

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रामलीला मैदान के आसपास स्थित 20 से अधिक प्रमुख बाज़ारों के व्यापारी रैली की घोषणा के बाद से असमंजस और भय के माहौल में हैं। संगठन ने सवाल उठाया है कि यदि कांग्रेस नेताओं के अनुमान के अनुसार रैली में 10 लाख लोग और 15,000 से 20,000 वाहन शामिल होते हैं, तो पार्किंग की व्यवस्था कहाँ होगी — जबकि रामलीला मैदान के आसपास 200 वाहनों के लिए भी अधिकृत पार्किंग उपलब्ध नहीं है।

व्यापारियों को यह भी आशंका है कि 31 अक्टूबर से ही बैरिकेडिंग शुरू हो सकती है, कई प्रमुख मार्ग बंद हो सकते हैं और ग्राहकों को बाज़ारों तक पहुँचने में गंभीर कठिनाई होगी। संगठन का दावा है कि रैली से 21 प्रमुख बाज़ार सीधे प्रभावित होंगे, जिनमें पुरानी दिल्ली और मध्य दिल्ली के बड़े थोक-खुदरा केंद्र शामिल हैं।

पिछले प्रदर्शन से सबक

CTI ने याद दिलाया कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन में केवल 3,000 से 4,000 लोग शामिल थे, फिर भी मध्य दिल्ली के बड़े हिस्से में यातायात प्रतिबंध लगाने पड़े और व्यापारियों को लगभग ₹3,000 करोड़ का नुकसान हुआ। संगठन का तर्क है कि 10 लाख लोगों की प्रस्तावित रैली के दौरान नुकसान का पैमाना कई गुना बड़ा हो सकता है।

राहुल गांधी का रुख

सोमवार को राहुल गांधी ने एक्स पर दिल्ली के व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा, 'हम आपको सुनते हैं और आपकी परवाह करते हैं। सरकार ने मेट्रो बंद कर दी, सड़कें सील कर दीं और राजधानी को लॉकडाउन जैसा बना दिया। अगर मोदी आरोपित नंबर-4 ज्ञानेश कुमार को हटा दें तो विरोध प्रदर्शन 30 सेकंड में खत्म हो सकते हैं।' हालाँकि CTI ने कहा कि इस बयान से व्यापारियों की चिंताएँ दूर नहीं हुई हैं, क्योंकि रैली अभी भी उसी तारीख और उसी स्थान पर आयोजित होने वाली है।

BJP सांसद और CAIT का रुख

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के महासचिव और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी कहा कि राहुल गांधी का सोशल मीडिया पोस्ट व्यापारियों की चिंताओं का समाधान नहीं है। उनका कहना था कि जब राहुल गांधी स्वयं यह स्वीकार कर रहे हैं कि मेट्रो बंद हुई और सड़कें सील हुईं, तो यह भी सोचना चाहिए कि प्रशासन को ऐसे कदम उठाने की ज़रूरत क्यों पड़ी। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की प्रमुख चिंता है कि बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों से त्योहारी सीजन में कारोबार प्रभावित न हो।

CTI का वैकल्पिक सुझाव

CTI ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र भेजकर माँग की है कि वे इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों से इस विषय पर चर्चा करें। संगठन ने सुझाव दिया है कि यदि तारीख बदलना संभव हो तो रैली 10 नवंबर के बाद — यानी भाई दूज के बाद — आयोजित की जाए। यदि तारीख बदलना संभव न हो, तो रैली को बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम जैसे खुले स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए, जहाँ आसपास के बाज़ारों पर असर कम होगा। अब यह देखना होगा कि इंडिया गठबंधन व्यापारियों की इस माँग पर कोई ठोस जवाब देता है या रैली तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यापारियों की असल चिंता — रैली की तारीख और स्थान — को अनुत्तरित छोड़ दिया; यह विरोधाभास उल्लेखनीय है। CTI का ₹10,000 करोड़ नुकसान का अनुमान भले ही अनुमानित हो, लेकिन 10 अक्टूबर के ₹3,000 करोड़ के दावे से इसका तार्किक संबंध है — और उस दावे को किसी ने चुनौती नहीं दी। असली सवाल यह है कि लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार और त्योहारी सीजन में छोटे व्यापारियों की आजीविका के बीच संतुलन कौन बनाएगा — क्योंकि इंडिया गठबंधन और सत्तारूढ़ दल, दोनों ही व्यापारी समुदाय को अपना समर्थक बताते हैं।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CTI ने 1 नवंबर की इंडिया गठबंधन रैली पर क्यों आपत्ति जताई है?
CTI का कहना है कि रामलीला मैदान दिल्ली के सबसे बड़े थोक और खुदरा बाज़ारों से घिरा है, और 1 नवंबर की रैली दिवाली से पहले के व्यस्ततम खरीदारी सीजन के बीच पड़ती है। संगठन को आशंका है कि रैली में 10 लाख लोगों और 15,000-20,000 वाहनों की भागीदारी से 21 प्रमुख बाज़ारों पर गंभीर असर पड़ेगा और ₹10,000 करोड़ तक का नुकसान हो सकता है।
राहुल गांधी ने दिल्ली व्यापारियों को क्या जवाब दिया?
राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वे व्यापारियों की बात सुनते हैं और उनकी परवाह करते हैं, साथ ही सरकार पर मेट्रो बंद करने और सड़कें सील करने का आरोप लगाया। हालाँकि उन्होंने रैली की तारीख या स्थान बदलने का कोई संकेत नहीं दिया, जिससे CTI ने कहा कि व्यापारियों की चिंताएँ दूर नहीं हुई हैं।
CTI ने रैली के लिए क्या वैकल्पिक सुझाव दिए हैं?
CTI ने माँग की है कि रैली भाई दूज के बाद, यानी 10 नवंबर के बाद, आयोजित की जाए। यदि तारीख बदलना संभव न हो तो रैली रामलीला मैदान की बजाय बुराड़ी ग्राउंड या जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम पर स्थानांतरित की जाए, जहाँ आसपास के बाज़ारों पर असर कम होगा।
10 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन का व्यापारियों ने उदाहरण क्यों दिया?
CTI के अनुसार 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर केवल 3,000-4,000 लोगों के प्रदर्शन के दौरान मध्य दिल्ली में यातायात प्रतिबंध के कारण व्यापारियों को लगभग ₹3,000 करोड़ का नुकसान हुआ था। उस आँकड़े को आधार बनाकर संगठन ने तर्क दिया कि 10 लाख लोगों की रैली से नुकसान का पैमाना कई गुना अधिक होगा।
CAIT और BJP का इस मुद्दे पर क्या रुख है?
CAIT के महासचिव और BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि राहुल गांधी का एक्स पोस्ट व्यापारियों की चिंताओं का समाधान नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि जब राहुल गांधी स्वयं मेट्रो बंद और सड़क सीलिंग की बात कर रहे हैं, तो यह सोचना ज़रूरी है कि प्रशासन को ऐसे कदम उठाने की ज़रूरत क्यों पड़ी।
राष्ट्र प्रेस
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