27 अक्टूबर 2026
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दक्षिण कोरिया में गर्भपात गोलियों के नियमों पर ह्यूमन राइट्स वॉच की आपत्ति, WHO मानकों का दिया हवाला

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दक्षिण कोरिया में गर्भपात गोलियों के नियमों पर ह्यूमन राइट्स वॉच की आपत्ति, WHO मानकों का दिया हवाला

सारांश

दक्षिण कोरिया गर्भपात की दवाओं को अगले साल औपचारिक मंजूरी देने जा रहा है — लेकिन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि नौ सप्ताह की सीमा और केवल बड़े अस्पतालों तक पहुँच की शर्त WHO मानकों से पीछे है और लाखों महिलाओं की पहुँच सीमित कर सकती है।

मुख्य बातें

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने 26 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में दक्षिण कोरिया के प्रस्तावित गर्भपात गोलियों के नियमों पर आपत्ति जताई।
दक्षिण कोरियाई सरकार ने गर्भावस्था के नौ सप्ताह तक और केवल बड़े चिकित्सा संस्थानों के जरिये दवाएँ उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है।
HRW के अनुसार चिकित्सा मानक 12 सप्ताह तक दवाओं द्वारा गर्भपात की अनुमति देते हैं और WHO व्यापक स्वास्थ्यकर्मियों को यह सेवा देने की सिफारिश करता है।
HRW की सुजैन बर्गस्टेन ने चेताया कि कड़े नियम महिलाओं के लिए खर्च और पहुँच दोनों को कठिन बना सकते हैं।
दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने 2019 में गर्भपात प्रतिबंध को असंवैधानिक बताया था, लेकिन विधायी संशोधन अभी तक अधूरे हैं।
HRW ने नेशनल असेंबली से गर्भपात सेवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा के तहत शामिल करने की भी माँग की है।

ह्यूमन राइट्स वॉच (HRW) ने दक्षिण कोरिया सरकार के प्रस्तावित गर्भपात गोलियों (अबॉर्शन पिल्स) के नियमों पर गंभीर आपत्ति जताई है, यह कहते हुए कि अत्यधिक कड़े प्रतिबंध महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षित एवं किफायती प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच को बाधित कर सकते हैं। संगठन ने रविवार, 26 अक्टूबर 2026 को जारी बयान में दक्षिण कोरियाई सरकार से इन नियमों को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुरूप बनाने की अपील की।

प्रस्तावित व्यवस्था का ढाँचा

दक्षिण कोरियाई सरकार ने सितंबर 2026 में घोषणा की थी कि वह गर्भावस्था के नौ सप्ताह तक गर्भपात की दवाओं के उपयोग को औपचारिक मंजूरी देने की योजना बना रही है। प्रस्ताव के अनुसार, शुरुआती दो वर्षों तक केवल बड़े चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर ही ये दवाएँ लिख सकेंगे और सीधे उपलब्ध करा सकेंगे। इसके बाद व्यवस्था में संशोधन पर विचार किया जाएगा।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य महिलाओं के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की रक्षा करना है, ताकि वे अप्रमाणित तरीकों का सहारा लेने के बजाय सुरक्षित चिकित्सा व्यवस्था के भीतर उपचार प्राप्त कर सकें।

HRW की मुख्य आपत्तियाँ

HRW ने प्रस्तावित व्यवस्था के दो बिंदुओं पर विशेष रूप से आपत्ति जताई है। पहला, गर्भपात की दवाओं के उपयोग को गर्भावस्था के नौ सप्ताह तक सीमित रखना — जबकि प्रचलित चिकित्सा मानक 12 सप्ताह तक दवाओं द्वारा गर्भपात की अनुमति देते हैं। दूसरा, शुरुआती दो वर्षों में दवाएँ लिखने और उपलब्ध कराने का अधिकार केवल बड़े चिकित्सा संस्थानों तक सीमित रखना।

HRW की कार्यवाहक महिला अधिकार शोध सहायक सुजैन बर्गस्टेन ने कहा कि पिल्स की अनुमति देना महत्वपूर्ण है, लेकिन नियम इतने कड़े नहीं होने चाहिए कि महिलाएँ इस अधिकार से वंचित हो जाएँ या उनके लिए खर्च वहन करना कठिन हो जाए।

WHO के मानकों से तुलना

संगठन के अनुसार, WHO की सिफारिशें स्पष्ट करती हैं कि उचित प्रशिक्षण प्राप्त स्वास्थ्यकर्मियों का एक व्यापक समूह — न केवल बड़े अस्पतालों के विशेषज्ञ — ऐसी चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध करा सकता है। HRW का तर्क है कि दवाएँ लिखने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या सीमित रखने से उन महिलाओं को समय पर सहायता मिलने में बाधा आएगी, जिन्हें बड़े अस्पतालों तक पहुँचने में कठिनाई होती है — विशेष रूप से ग्रामीण या दूरदराज़ के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएँ।

क़ानूनी पृष्ठभूमि

दक्षिण कोरिया में गर्भपात से जुड़े कानून लंबे समय से अनिश्चितता में रहे हैं। देश की संवैधानिक अदालत ने 2019 में गर्भपात पर लागू प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया था और कानून में बदलाव की आवश्यकता बताई थी। गौरतलब है कि उस फैसले के सात वर्ष बाद भी आवश्यक विधायी संशोधन नहीं हो सके, जिसके चलते गर्भपात की दवाओं की उपलब्धता एवं उपयोग को लेकर नियामकीय खालीपन बना रहा।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर प्रजनन अधिकारों को लेकर बहस तेज़ हो रही है और कई देश अपनी नीतियों में बदलाव कर रहे हैं।

आगे की राह और माँगें

HRW ने दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली से गर्भपात से जुड़े कानूनों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप बनाने की अपील की है। इसके साथ ही संगठन ने माँग की है कि गर्भपात संबंधी सेवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया जाए और मरीजों तथा चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने वाले पेशेवरों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाए जाएँ। अब सभी की निगाहें दक्षिण कोरियाई सरकार की प्रतिक्रिया और नेशनल असेंबली में होने वाली विधायी बहस पर टिकी हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दक्षिण कोरिया में गर्भपात गोलियों को लेकर क्या प्रस्ताव है?
दक्षिण कोरियाई सरकार ने सितंबर 2026 में प्रस्ताव रखा कि गर्भावस्था के नौ सप्ताह तक गर्भपात की दवाओं के उपयोग को औपचारिक मंजूरी दी जाएगी। शुरुआती दो वर्षों में केवल बड़े चिकित्सा संस्थानों के डॉक्टर ही इन दवाओं को लिख और उपलब्ध करा सकेंगे।
ह्यूमन राइट्स वॉच को दक्षिण कोरिया के नियमों पर क्यों आपत्ति है?
HRW का कहना है कि प्रचलित चिकित्सा मानक 12 सप्ताह तक दवाओं द्वारा गर्भपात की अनुमति देते हैं, जबकि प्रस्तावित सीमा केवल नौ सप्ताह है। इसके अलावा दवाएँ लिखने वाले स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या सीमित रखने से दूरदराज़ की महिलाओं की पहुँच बाधित होगी।
WHO की इस विषय में क्या सिफारिश है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिफारिशें कहती हैं कि उचित प्रशिक्षण प्राप्त स्वास्थ्यकर्मियों का एक व्यापक समूह — न केवल बड़े अस्पतालों के विशेषज्ञ — गर्भपात संबंधी दवाएँ उपलब्ध करा सकता है। WHO 12 सप्ताह तक दवाओं द्वारा गर्भपात को सुरक्षित मानता है।
दक्षिण कोरिया में गर्भपात कानून की स्थिति क्या है?
दक्षिण कोरिया की संवैधानिक अदालत ने 2019 में गर्भपात प्रतिबंध को असंवैधानिक करार दिया था। हालाँकि, तब से अब तक आवश्यक विधायी संशोधन नहीं हो सके, जिससे गर्भपात दवाओं की उपलब्धता को लेकर नियामकीय अनिश्चितता बनी रही।
HRW ने दक्षिण कोरिया की नेशनल असेंबली से क्या माँगें रखी हैं?
HRW ने नेशनल असेंबली से गर्भपात कानूनों को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप बनाने, गर्भपात सेवाओं को राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा में शामिल करने और मरीजों व स्वास्थ्य पेशेवरों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान बनाने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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