दक्षिण कोरिया: शादी-विरोधी नीतियों की समीक्षा करेंगे राष्ट्रपति ली जे-म्युंग, युवाओं को राहत की उम्मीद
सारांश
मुख्य बातें
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने 8 अगस्त 2026 को घोषणा की कि सरकार उन नीतियों की व्यापक समीक्षा करेगी, जो युवाओं को शादी का पंजीकरण कराने से आर्थिक रूप से हतोत्साहित करती हैं। सोल से जारी इस बयान में राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि विवाह के बाद आवास ऋण और कल्याणकारी योजनाओं में पात्रता घटने की समस्या को दूर करना सरकार की प्राथमिकता है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब दक्षिण कोरिया दुनिया की सबसे कम जन्मदर वाले देशों में शुमार है।
समस्या की जड़: शादी से घटती पात्रता
मौजूदा व्यवस्था के तहत जब दो व्यक्ति विवाह का पंजीकरण कराते हैं, तो उनकी संयुक्त आय और संपत्ति को एक साथ जोड़कर आँका जाता है। इससे आवास ऋण, सरकारी आवास योजनाओं और सामाजिक कल्याण लाभों के लिए उनकी पात्रता कम हो जाती है। आलोचकों का कहना है कि यह व्यवस्था व्यवहारिक रूप से शादी को आर्थिक दंड में बदल देती है, जिससे कई युवा जोड़े विवाह पंजीकरण टाल रहे हैं या उससे बच रहे हैं।
राष्ट्रपति ली का एक्स पर बयान
राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 'सरकारी नीतियों के कारण युवाओं को शादी करने से कभी हतोत्साहित नहीं होना चाहिए।' उन्होंने कहा कि विवाह के बाद दंपतियों को होने वाली किसी भी संभावित असुविधा या नुकसान की सरकार पूरी तरह समीक्षा करेगी। ली के अनुसार, शादी युवाओं के लिए बोझ नहीं, बल्कि उम्मीद से भरी नई शुरुआत होनी चाहिए।
प्रस्तावित सुधार: क्या बदल सकता है
राष्ट्रपति ने बताया कि सरकार कई उपायों की समीक्षा कर रही है, जिनमें नवविवाहित जोड़ों के लिए विशेष आवास आवंटन योजनाओं में पात्रता की शर्तें सरल बनाना प्रमुख है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब ली ने इस मुद्दे को उठाया है — फरवरी में राष्ट्रपति कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में भी उन्होंने इसी तरह के निर्देश दिए थे। उस बैठक में उन्होंने ऐसी नीतियों की पहचान करने को कहा था जहाँ विवाहित जोड़ों को अविवाहित लोगों की तुलना में नुकसान होता है।
जनसांख्यिकीय संकट की पृष्ठभूमि
दक्षिण कोरिया की कुल प्रजनन दर हाल के वर्षों में विश्व में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। आँकड़ों के अनुसार, देश की युवा आबादी लगातार सिकुड़ रही है और सरकार पर जनसांख्यिकीय संकट से निपटने का दबाव बढ़ता जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब पूर्वी एशिया के कई देश — जापान, चीन और सिंगापुर — भी घटती जन्मदर की चुनौती से जूझ रहे हैं, लेकिन दक्षिण कोरिया की स्थिति उनमें सबसे गंभीर मानी जा रही है।
आगे क्या होगा
राष्ट्रपति ली की इस घोषणा के बाद अब सरकारी विभागों से विस्तृत नीतिगत प्रस्ताव तैयार करने की अपेक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नीति समीक्षा से जन्मदर में तत्काल सुधार की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि युवाओं में विवाह और बच्चे पैदा करने को लेकर सामाजिक और आर्थिक दोनों कारण जिम्मेदार हैं। फिर भी, इस कदम को नीतिगत दिशा में एक सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।