रामलीला मैदान कांग्रेस रैली से दिल्ली के 20 थोक बाज़ार खतरे में, व्यापारियों ने जताई ₹10,000 करोड़ नुकसान की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) सहित दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की राजनीतिक रैली को लेकर गहरी चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस (6 नवंबर) और दिवाली से ठीक पहले इस आयोजन से राजधानी के प्रमुख थोक बाज़ारों में ₹10,000 करोड़ से अधिक का व्यापारिक नुकसान हो सकता है। सीटीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को दिवाली के बाद तक स्थगित करने का अनुरोध किया है।
रैली से कौन-से बाज़ार प्रभावित होंगे
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के 20 बड़े थोक हब स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाज़ार, खारी बावली, नया बाज़ार, दरियागंज, कश्मीरी गेट और अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्र शामिल हैं। गोयल ने बताया कि रैली में लगभग 10 लाख लोगों के जुटने का अनुमान है, जबकि मैदान की क्षमता केवल 50 हज़ार व्यक्तियों की है।
व्यापारियों की मुख्य आशंकाएँ
गोयल ने कहा, 'रामलीला रैली में 10 लाख लोगों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि वहाँ लोगों के इकट्ठा होने की क्षमता करीब 50 हज़ार लोगों की है। ऐसे में रामलीला मैदान के आसपास के बाज़ारों पर इसका गहरा असर होने की उम्मीद है।' उन्होंने यह भी कहा, 'बाहर से रोज़ाना तीन-चार लाख खरीदार दिल्ली में आता है — वह नहीं आएगा, पैनिक फैलेगा तो स्थानीय खरीदार भी नहीं आएँगे।'
एपीएमए कश्मीरी गेट के अध्यक्ष विनय नारंग ने बताया कि दिल्ली के व्यापारी 2 अक्टूबर से ही लगातार विभिन्न कारणों से नुकसान झेल रहे हैं। नारंग ने कहा, 'यदि 1 नवंबर को बड़ी रैली होती है तो बाहरी राज्यों से आने वाले व्यापारी और खरीदार दिल्ली आने से बचेंगे क्योंकि बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंधों के कारण कारोबार प्रभावित होगा।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रामलीला मैदान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बेहद करीब है, इसलिए कई थोक खरीदार अपनी यात्राएँ रद्द कर सकते हैं।
पिछले प्रदर्शनों का हवाला
गोयल ने 10 अक्टूबर के जंतर-मंतर आयोजन का उदाहरण दिया, जहाँ कथित तौर पर केवल दो-चार हज़ार लोगों के जुटने पर भी मेट्रो सेवाएँ बाधित हुईं, बैरिकेड लगाए गए और दिल्ली के 20 से अधिक बाज़ार बंद रहे। उनका तर्क है कि यदि उससे कहीं बड़ी भीड़ रामलीला मैदान में जुटती है, तो व्यापार पर असर कई गुना अधिक होगा।
त्योहारी सीज़न और आर्थिक दबाव
व्यापारिक संगठनों के अनुसार, अक्टूबर-नवंबर का महीना पूरे वर्ष का सबसे महत्त्वपूर्ण कारोबारी दौर होता है। धनतेरस 6 नवंबर को है और इससे ठीक पहले होने वाली किसी बड़ी घटना से बाज़ारों में डर और अनिश्चितता का माहौल बन सकता है। नारंग ने यह भी चेताया कि रैली के कारण जो खरीदार नहीं आएँगे, उनकी खरीदारी बाद में पूरी तरह वापस नहीं लौटेगी — अनेक खरीदार स्थानीय स्तर पर या अन्य शहरों से सामान ले लेंगे, जिससे दिल्ली के व्यापारियों को स्थायी नुकसान होगा।
व्यापारियों की माँग
सीटीआई और एपीएमए दोनों संगठनों ने कांग्रेस नेतृत्व से अनुरोध किया है कि रैली को दिवाली के बाद आयोजित किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी सीज़न में व्यापार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि यही समय सालभर की कमाई का बड़ा हिस्सा तय करता है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस अनुरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।