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रामलीला मैदान कांग्रेस रैली से दिल्ली के 20 थोक बाज़ार खतरे में, व्यापारियों ने जताई ₹10,000 करोड़ नुकसान की आशंका

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रामलीला मैदान कांग्रेस रैली से दिल्ली के 20 थोक बाज़ार खतरे में, व्यापारियों ने जताई ₹10,000 करोड़ नुकसान की आशंका

सारांश

धनतेरस से ठीक पाँच दिन पहले रामलीला मैदान में 10 लाख लोगों की भीड़ का अनुमान — और दिल्ली के 20 बड़े थोक हब उसी दायरे में। व्यापारियों की चेतावनी है कि यह सिर्फ एक दिन की बाधा नहीं, बल्कि साल की सबसे बड़ी कमाई का मौका छिन जाने का खतरा है।

मुख्य बातें

1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस रैली से दिल्ली के 20 प्रमुख थोक बाज़ारों पर व्यापक असर की आशंका।
सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल ने ₹10,000 करोड़ से अधिक के व्यापारिक नुकसान की चेतावनी दी।
रैली में 10 लाख लोगों के जुटने का अनुमान, जबकि मैदान की क्षमता केवल 50 हज़ार ।
चांदनी चौक, सदर बाज़ार, खारी बावली, दरियागंज, कश्मीरी गेट सहित बड़े व्यापारिक केंद्र 5 किलोमीटर के दायरे में।
धनतेरस 6 नवंबर को है — रैली उससे ठीक पाँच दिन पहले होगी, जो साल का सबसे व्यस्त कारोबारी दौर है।
सीटीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली दिवाली के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) सहित दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने 1 नवंबर 2026 को रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की राजनीतिक रैली को लेकर गहरी चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस (6 नवंबर) और दिवाली से ठीक पहले इस आयोजन से राजधानी के प्रमुख थोक बाज़ारों में ₹10,000 करोड़ से अधिक का व्यापारिक नुकसान हो सकता है। सीटीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को दिवाली के बाद तक स्थगित करने का अनुरोध किया है।

रैली से कौन-से बाज़ार प्रभावित होंगे

सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के 20 बड़े थोक हब स्थित हैं। इनमें चांदनी चौक, सदर बाज़ार, खारी बावली, नया बाज़ार, दरियागंज, कश्मीरी गेट और अन्य प्रमुख व्यापारिक केंद्र शामिल हैं। गोयल ने बताया कि रैली में लगभग 10 लाख लोगों के जुटने का अनुमान है, जबकि मैदान की क्षमता केवल 50 हज़ार व्यक्तियों की है।

व्यापारियों की मुख्य आशंकाएँ

गोयल ने कहा, 'रामलीला रैली में 10 लाख लोगों के आने की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि वहाँ लोगों के इकट्ठा होने की क्षमता करीब 50 हज़ार लोगों की है। ऐसे में रामलीला मैदान के आसपास के बाज़ारों पर इसका गहरा असर होने की उम्मीद है।' उन्होंने यह भी कहा, 'बाहर से रोज़ाना तीन-चार लाख खरीदार दिल्ली में आता है — वह नहीं आएगा, पैनिक फैलेगा तो स्थानीय खरीदार भी नहीं आएँगे।'

एपीएमए कश्मीरी गेट के अध्यक्ष विनय नारंग ने बताया कि दिल्ली के व्यापारी 2 अक्टूबर से ही लगातार विभिन्न कारणों से नुकसान झेल रहे हैं। नारंग ने कहा, 'यदि 1 नवंबर को बड़ी रैली होती है तो बाहरी राज्यों से आने वाले व्यापारी और खरीदार दिल्ली आने से बचेंगे क्योंकि बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंधों के कारण कारोबार प्रभावित होगा।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रामलीला मैदान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के बेहद करीब है, इसलिए कई थोक खरीदार अपनी यात्राएँ रद्द कर सकते हैं।

पिछले प्रदर्शनों का हवाला

गोयल ने 10 अक्टूबर के जंतर-मंतर आयोजन का उदाहरण दिया, जहाँ कथित तौर पर केवल दो-चार हज़ार लोगों के जुटने पर भी मेट्रो सेवाएँ बाधित हुईं, बैरिकेड लगाए गए और दिल्ली के 20 से अधिक बाज़ार बंद रहे। उनका तर्क है कि यदि उससे कहीं बड़ी भीड़ रामलीला मैदान में जुटती है, तो व्यापार पर असर कई गुना अधिक होगा।

त्योहारी सीज़न और आर्थिक दबाव

व्यापारिक संगठनों के अनुसार, अक्टूबर-नवंबर का महीना पूरे वर्ष का सबसे महत्त्वपूर्ण कारोबारी दौर होता है। धनतेरस 6 नवंबर को है और इससे ठीक पहले होने वाली किसी बड़ी घटना से बाज़ारों में डर और अनिश्चितता का माहौल बन सकता है। नारंग ने यह भी चेताया कि रैली के कारण जो खरीदार नहीं आएँगे, उनकी खरीदारी बाद में पूरी तरह वापस नहीं लौटेगी — अनेक खरीदार स्थानीय स्तर पर या अन्य शहरों से सामान ले लेंगे, जिससे दिल्ली के व्यापारियों को स्थायी नुकसान होगा।

व्यापारियों की माँग

सीटीआई और एपीएमए दोनों संगठनों ने कांग्रेस नेतृत्व से अनुरोध किया है कि रैली को दिवाली के बाद आयोजित किया जाए। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारी सीज़न में व्यापार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, क्योंकि यही समय सालभर की कमाई का बड़ा हिस्सा तय करता है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस अनुरोध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का आँकड़ा सीटीआई का अनुमान है, जिसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है, लेकिन त्योहारी सीज़न में थोक बाज़ारों की निर्भरता एक दिन की भी बाधा को असामान्य रूप से महँगा बना सकती है। कांग्रेस की चुप्पी और तारीख पर कायम रहने की स्थिति यह बताएगी कि विपक्ष लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और आम व्यापारी की आजीविका के बीच संतुलन को किस तरह देखता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामलीला मैदान की कांग्रेस रैली से दिल्ली के बाज़ारों को क्यों नुकसान होगा?
रैली में 10 लाख लोगों के जुटने के अनुमान के चलते पुलिस बैरिकेड, मेट्रो बाधा और यातायात प्रतिबंध लगने की आशंका है, जिससे बाहरी राज्यों से रोज़ाना आने वाले तीन-चार लाख खरीदार दिल्ली नहीं आ पाएँगे। रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में दिल्ली के 20 बड़े थोक हब हैं, जो सीधे प्रभावित होंगे।
धनतेरस 2026 कब है और रैली उससे कितने दिन पहले है?
धनतेरस 6 नवंबर 2026 को है। प्रस्तावित कांग्रेस रैली 1 नवंबर को है, यानी धनतेरस से ठीक पाँच दिन पहले — जो व्यापारियों के लिए साल का सबसे महत्त्वपूर्ण कारोबारी समय होता है।
सीटीआई ने ₹10,000 करोड़ नुकसान का अनुमान कैसे लगाया?
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, रोज़ाना दिल्ली आने वाले लाखों थोक खरीदारों के न आने, मेट्रो बाधा, बैरिकेडिंग और बाज़ारों के बंद रहने के संयुक्त प्रभाव से यह नुकसान हो सकता है। यह सीटीआई का अनुमान है और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है।
व्यापारियों ने किसे पत्र लिखा और क्या माँग की?
सीटीआई ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को दिवाली के बाद तक स्थगित करने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि केवल कुछ दिनों की देरी से त्योहारी सीज़न का व्यापार सुरक्षित रहेगा।
कौन-से बाज़ार सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं?
चांदनी चौक, सदर बाज़ार, खारी बावली, नया बाज़ार, दरियागंज और कश्मीरी गेट सहित दिल्ली के 20 बड़े थोक केंद्र रामलीला मैदान के 5 किलोमीटर के दायरे में हैं। एपीएमए कश्मीरी गेट के अध्यक्ष विनय नारंग ने बताया कि मैदान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के भी करीब है, जिससे ट्रेन से आने वाले खरीदार भी रुक सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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