दीपावली सीजन पर विपक्षी प्रदर्शनों का असर: व्यापारियों ने जताई नाराज़गी, ₹1 लाख करोड़ के कारोबार पर संकट
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष द्वारा आयोजित विरोध-प्रदर्शनों के विरुद्ध 25 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर के पास एक बड़ा जवाबी धरना हुआ, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं और व्यापारी संगठनों ने एकजुट होकर इन प्रदर्शनों को दीपावली व्यापार सीजन के लिए विनाशकारी करार दिया। व्यापारियों का आरोप है कि इन प्रदर्शनों से ₹1 लाख करोड़ के अनुमानित दीपावली कारोबार में से हज़ारों करोड़ रुपये का नुकसान पहले ही हो चुका है।
मुख्य घटनाक्रम
भाजपा नेता जय भगवान गोयल और दिल्ली अग्रोहा विकास संगठन के प्रतिनिधि नंद किशोर अग्रवाल ने रविवार को जंतर-मंतर के पास आयोजित धरने में शिरकत की। इस धरने में दिल्ली के अलावा आगरा, बुलंदशहर, सहारनपुर, नोएडा, गाज़ियाबाद, राजस्थान और हरियाणा से व्यापारी पहुँचे।
धरने के बाद प्रतिभागियों ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आवास की ओर मार्च और राष्ट्रपति को ज्ञापन देने की घोषणा भी की।
व्यापारियों पर आर्थिक असर
नंद किशोर अग्रवाल ने कहा कि एक सर्वे के अनुसार दीपावली पर्व के दौरान देशभर में ₹1 लाख करोड़ का व्यापार होता है, और मौजूदा अशांति से इसमें से ₹10,000 करोड़ से ₹20,000 करोड़ तक का नुकसान होना निश्चित है। उनके अनुसार कपड़ों और उपभोक्ता सामान की खरीदारी एक महीने पहले से ही शुरू हो जाती है, जो इस बार बुरी तरह प्रभावित हुई है।
अग्रवाल ने चिंता जताते हुए कहा, 'साल भर में व्यापारी के लिए असली सीजन दीपावली का ही होता है। अगर इसी में नुकसान हो गया तो व्यापारी खुद को संभाल नहीं पाएगा।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि व्यापार ठप होने से जुड़े रोज़गार पर भी सीधा असर पड़ता है और छोटे व्यापारियों की स्थिति विशेष रूप से कठिन होगी।
भाजपा नेता की प्रतिक्रिया
जय भगवान गोयल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए कहा कि उन्होंने जो भी कार्य किए हैं, वे 'राष्ट्रहित में' किए हैं। गोयल ने यह भी दावा किया कि ज्ञानेश कुमार की राम जन्मभूमि ट्रस्ट गठन और अनुच्छेद 370 हटाने में प्रमुख भूमिका रही है तथा उन्होंने लाखों कथित अवैध घुसपैठियों के नाम मतदाता सूची से हटवाए।
गोयल ने आरोप लगाया कि विपक्ष ज्ञानेश कुमार को निशाना बनाकर देश में 'अराजकता फैलाने की साजिश' रच रहा है और यह नेपाल, बांग्लादेश व फ्रांस जैसी स्थिति पैदा करने की कोशिश है। उन्होंने माँग की कि 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्षी रैली की अनुमति रद्द की जाए।
व्यापारी समुदाय की माँगें
दोनों नेताओं ने प्रशासन से अपील की कि जब तक दीपावली पर्व (8 नवंबर) संपन्न नहीं हो जाता, तब तक ऐसी किसी भी रैली को अनुमति न दी जाए जो बाज़ारों और यातायात को बाधित करे।
नंद किशोर अग्रवाल ने कहा कि लोकतंत्र के स्तंभों — मीडिया, संसद, सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयोग — को 'खराब और नष्ट करने की कोशिश' न तो देश हित में है, न समाज हित में और न ही व्यापारियों के हित में। उन्होंने विपक्षी नेता राहुल गांधी पर 'लोकतांत्रिक मार्ग से विफल होने के बाद अराजकता फैलाकर नैरेटिव बदलने' की कोशिश का आरोप लगाया।
आगे क्या
प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने और विपक्षी नेताओं के विरुद्ध राष्ट्रद्रोह के मुकदमे दर्ज करने की माँग की घोषणा की है। 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित विपक्षी महारैली से पहले दिल्ली पुलिस पर अनुमति संबंधी फैसले का दबाव बढ़ सकता है। दीपावली नज़दीक आने के साथ राजनीतिक और व्यावसायिक तनाव की यह टकराहट और गहरी होने की संभावना है।