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दिल्ली में प्रदर्शनों से व्यापार को ₹3,000 करोड़ का नुकसान, नवरात्रि-दीपावली सीजन में 700+ बाजार प्रभावित: सीटीआई

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दिल्ली में प्रदर्शनों से व्यापार को ₹3,000 करोड़ का नुकसान, नवरात्रि-दीपावली सीजन में 700+ बाजार प्रभावित: सीटीआई

सारांश

नवरात्रि और दीपावली के पीक सीजन में दिल्ली के प्रदर्शनों ने 700 से अधिक बाजारों को ठप कर दिया है। सीटीआई का कहना है कि ₹3,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है और अगर हर हफ्ते प्रदर्शन जारी रहे तो यह आँकड़ा दीपावली तक ₹10,000 करोड़ को पार कर सकता है।

मुख्य बातें

सीटीआई के अनुसार अक्टूबर 2026 में दिल्ली में हुए विरोध-प्रदर्शनों से अब तक ₹3,000 करोड़ का व्यापारिक नुकसान हुआ है।
10 अक्टूबर के प्रदर्शन से ₹2,000 करोड़ और 13-16 अक्टूबर की नाकाबंदी से ₹1,000 करोड़ का नुकसान दर्ज।
सबसे अधिक नुकसान रिटेल सेक्टर को — करीब ₹1,800 करोड़ ; 700 से ज्यादा बाजार प्रभावित।
3-4 लाख थोक खरीदार NCR और राजस्थान से दिल्ली नहीं पहुँच सके, थोक व्यापार को ₹600 करोड़ का झटका।
सीटीआई ने दीपावली तक सेंट्रल दिल्ली और लुटियंस जोन में प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध और व्यापारियों के लिए GST व बिजली-पानी बिल में छूट की माँग की।
अगर साप्ताहिक प्रदर्शन जारी रहे तो दीपावली तक नुकसान ₹10,000 करोड़ पार कर सकता है: गोयल।

नई दिल्ली में अक्टूबर 2026 के दौरान लगातार चले विरोध-प्रदर्शनों ने दिल्ली के व्यापारिक तंत्र को गहरी चोट पहुँचाई है। उद्योग संगठन चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने 17 अक्टूबर 2026 को कहा कि इन प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापार को अब तक लगभग ₹3,000 करोड़ का नुकसान हो चुका है और रास्ते बंद होने से सप्लाई चेन भी पूरी तरह टूट गई है। यह नुकसान ऐसे समय हुआ है जब नवरात्रि, रामलीला और दीपावली की पीक शॉपिंग सीजन चल रही थी, जिसे व्यापारी पूरे साल की कमाई का सबसे अहम महीना मानते हैं।

नुकसान का क्षेत्रवार विश्लेषण

सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल ने बताया कि 10 अक्टूबर को हुए पहले प्रदर्शन में ₹2,000 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके बाद 13 से 16 अक्टूबर के बीच सेंट्रल दिल्ली में नाकाबंदी, मेट्रो बंदी और सेंट्रल पार्क बंद होने से अतिरिक्त ₹1,000 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया।

क्षेत्रवार नुकसान इस प्रकार रहा: रिटेल सेक्टर को सबसे अधिक ₹1,800 करोड़, थोक व्यापार को ₹600 करोड़, हॉस्पिटैलिटी और सर्विस सेक्टर को ₹300 करोड़, ट्रांसपोर्ट, ऑटो-टैक्सी और टूरिज्म को ₹180 करोड़ और अनौपचारिक सेक्टर (दिहाड़ी मजदूर, कारीगर, लोडिंग) को ₹120 करोड़ का नुकसान हुआ।

प्रभावित बाजार और व्यापारिक केंद्र

सीटीआई के अनुसार, प्रदर्शनों की सबसे ज्यादा मार सदर बाजार, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, चावड़ी बाजार, भागीरथ प्लेस, गांधी नगर, नया बाजार, खारी बावली, करावल नगर, करोल बाग, लाजपत राय मार्केट और कनॉट प्लेस सहित दिल्ली के 700 से अधिक बाजारों पर पड़ी। ये सभी प्रमुख थोक और खुदरा केंद्र हैं, जहाँ त्योहारी सीजन में देशभर से खरीदार आते हैं।

इसके अलावा, सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नोएडा, गाजियाबाद और राजस्थान से दिल्ली आने वाले 3 से 4 लाख थोक खरीदार प्रदर्शनों के कारण नहीं पहुँच सके, जिससे थोक व्यापार को सीधा झटका लगा।

सप्लाई चेन पर असर

ट्रकों की आवाजाही ठप होने से सप्लाई चेन बुरी तरह टूट गई है। त्योहारों के लिए तैयार माल गोदामों में ही पड़ा हुआ है, जिससे उत्पादन से लेकर उपभोक्ता तक की पूरी आपूर्ति कड़ी बाधित हो गई है। गौरतलब है कि यह वह समय है जब दिल्ली के बाजारों में सालभर की सर्वाधिक खरीद-बिक्री होती है।

सीटीआई की माँगें और चेतावनी

गोयल ने चेतावनी देते हुए कहा, 'नवरात्रि, रामलीला और दीपावली हमारे लिए पूरे साल की कमाई का एकमात्र महीना है। अगर अब भी हर हफ्ते विरोध-प्रदर्शन होता रहा तो दीपावली तक नुकसान ₹10,000 करोड़ को पार कर जाएगा।'

सीटीआई ने सरकार से कई माँगें रखी हैं — दीपावली तक सेंट्रल दिल्ली, नई दिल्ली और लुटियंस जोन में धरने-प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध; भविष्य में बुराड़ी, रोहिणी और द्वारका जैसे बाहरी इलाकों में प्रदर्शन जोन बनाना; अक्टूबर में हुए नुकसान के लिए राहत पैकेज के तहत बिजली-पानी के बिल और GST में छूट; और पुलिस प्रशासन से यह सुनिश्चित करना कि दुकानदारों पर जबरन दुकान बंद करने का दबाव न डाला जाए, बल्कि बाजार खुले रखने की सुरक्षा प्रदान की जाए।

आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार और प्रदर्शनकारी दोनों पक्ष दीपावली से पहले कोई मध्यमार्ग निकाल पाते हैं या नहीं, क्योंकि हर बीतते दिन के साथ व्यापारियों का नुकसान बढ़ता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ का आँकड़ा स्वयं-रिपोर्टेड है और इसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया है — फिर भी यह दिल्ली के त्योहारी व्यापार पर प्रदर्शनों के व्यापक असर को रेखांकित करता है। असली सवाल यह है कि क्या प्रशासन ने शहर के वाणिज्यिक केंद्र में प्रदर्शनों की अनुमति देते समय आर्थिक प्रभाव का कोई आकलन किया था। नवरात्रि-दीपावली जैसे सीजन में जब अनौपचारिक क्षेत्र — दिहाड़ी मजदूर, कारीगर, रेहड़ी-पटरी — सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, तब प्रदर्शन-स्थल की पसंद एक नीतिगत प्रश्न बन जाती है। सीटीआई की 'आउटर दिल्ली जोन' वाली माँग व्यावहारिक है, लेकिन इसे लागू करना लोकतांत्रिक अधिकारों और आर्थिक हितों के बीच नाजुक संतुलन की माँग करता है।
RashtraPress
17 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में प्रदर्शनों से व्यापारियों को कितना नुकसान हुआ है?
सीटीआई के अनुसार अक्टूबर 2026 में हुए विरोध-प्रदर्शनों से दिल्ली के व्यापार को अब तक लगभग ₹3,000 करोड़ का नुकसान हुआ है। इसमें 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से ₹2,000 करोड़ और 13-16 अक्टूबर की नाकाबंदी से ₹1,000 करोड़ शामिल हैं।
कौन-कौन से बाजार और क्षेत्र प्रभावित हुए हैं?
सदर बाजार, चांदनी चौक, कश्मीरी गेट, करोल बाग, कनॉट प्लेस सहित दिल्ली के 700 से अधिक बाजार प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा सोनीपत, पानीपत, गुरुग्राम, नोएडा और राजस्थान से आने वाले 3-4 लाख थोक खरीदार भी नहीं पहुँच सके।
सप्लाई चेन पर क्या असर पड़ा है?
ट्रकों की आवाजाही रुकने से सप्लाई चेन टूट गई है और त्योहारों के लिए तैयार माल गोदामों में पड़ा हुआ है। इससे उत्पादन से उपभोक्ता तक की पूरी आपूर्ति कड़ी बाधित हो गई है, जो नवरात्रि-दीपावली जैसे पीक सीजन में खासतौर पर नुकसानदेह है।
सीटीआई ने सरकार से क्या माँगें रखी हैं?
सीटीआई ने माँग की है कि दीपावली तक सेंट्रल दिल्ली, नई दिल्ली और लुटियंस जोन में धरने-प्रदर्शन पर पूर्ण रोक लगाई जाए। साथ ही व्यापारियों को ₹3,000 करोड़ के नुकसान के लिए राहत पैकेज, GST और बिजली-पानी के बिल में छूट, तथा भविष्य में बुराड़ी, रोहिणी, द्वारका में प्रदर्शन जोन बनाने की भी माँग है।
अगर प्रदर्शन जारी रहे तो कुल नुकसान कितना हो सकता है?
सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, अगर हर हफ्ते प्रदर्शन जारी रहे तो दीपावली तक कुल नुकसान ₹10,000 करोड़ को पार कर सकता है। नवरात्रि से दीपावली तक का महीना व्यापारियों के लिए पूरे साल की कमाई का सबसे अहम समय होता है।
राष्ट्र प्रेस
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