7 नवंबर 2026
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दिवाली पर दिल्ली का कारोबार ₹80,000 करोड़ पार करने की उम्मीद, देशभर में ₹5 लाख करोड़ का कारोबार: CTI

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दिवाली पर दिल्ली का कारोबार ₹80,000 करोड़ पार करने की उम्मीद, देशभर में ₹5 लाख करोड़ का कारोबार: CTI

सारांश

दिवाली 2026 की त्योहारी खरीदारी ने दिल्ली के बाज़ारों में नई रौनक ला दी है। CTI के अनुमान के मुताबिक़ राजधानी में ₹80,000 करोड़ और देशभर में ₹5 लाख करोड़ का कारोबार होने की उम्मीद है। विरोध प्रदर्शनों से ₹14,000 करोड़ का नुकसान झेलने वाले व्यापारी अब बंपर सीज़न से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

मुख्य बातें

CTI के अनुमान के अनुसार दिवाली सीज़न में दिल्ली में ₹80,000 करोड़ और देशभर में ₹5 लाख करोड़ का कारोबार होने की संभावना है।
1 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 के बीच रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को अनुमानतः ₹14,000 करोड़ का नुकसान हुआ था।
त्योहारी सीज़न में देशभर में खुदरा ऑटोमोबाइल बिक्री में कुल 55% की वृद्धि; तिपहिया वाहनों में सर्वाधिक 110% उछाल।
इस वर्ष दिवाली पर लगभग 5 करोड़ उपहारों का आदान-प्रदान हुआ; स्वदेशी उत्पादों की माँग विशेष रूप से मज़बूत।
CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि चाँदनी चौक , सदर बाज़ार , लाजपत नगर समेत दिल्ली के प्रमुख बाज़ारों में ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ रही है।

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने 7 नवंबर 2026 को जानकारी दी कि दिवाली त्योहारी सीज़न के दौरान नई दिल्ली में अकेले लगभग ₹80,000 करोड़ का कारोबार होने की संभावना है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आँकड़ा ₹5 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है। CTI के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि स्वदेशी उत्पादों की उपभोक्ताओं के बीच मज़बूत माँग और बंपर त्योहारी खरीदारी ने बाज़ारों में नई जान फूँक दी है।

व्यापार अनुमान का आधार

CTI ने यह अनुमान होटल एवं बैंक्वेट एसोसिएशन, रेस्तरां और मॉल एसोसिएशन, सिनेमा एसोसिएशन, ऑटोमोबाइल डीलर एसोसिएशन, मेकअप और सैलून एसोसिएशन, टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन और अन्य बाज़ार संगठनों के प्रतिनिधियों से व्यापक परामर्श के बाद तैयार किया। गोयल के अनुसार इस अनुमान में दिवाली की सीधी खरीदारी के साथ-साथ संबंधित सेवाओं से उत्पन्न कारोबार भी शामिल है।

यह ऐसे समय में आया है जब 1 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 के बीच राजधानी में हुई रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को अनुमानतः ₹14,000 करोड़ का व्यावसायिक नुकसान उठाना पड़ा था। CTI के मुताबिक़, त्योहारी सीज़न की जोरदार खरीदारी इस नुकसान की भरपाई का मौका बन रही है।

ऑटोमोबाइल बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि

गोयल ने ऑटोमोबाइल उद्योग की सर्वोच्च संस्था की हालिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि त्योहारी सीज़न में देशभर में खुदरा वाहन बिक्री में कुल 55 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। श्रेणीवार आँकड़ों के अनुसार, दोपहिया वाहनों में 52%, तिपहिया में 110%, वाणिज्यिक वाहनों में 48%, यात्री वाहनों में 70% और ट्रैक्टरों में 58% की वृद्धि हुई है।

गौरतलब है कि तिपहिया वाहनों की बिक्री में तीन अंकीय उछाल सबसे अधिक ध्यान खींचने वाला आँकड़ा है, जो शायद त्योहारी माँग और आखिरी घड़ी की डिलीवरी ज़रूरतों का मिला-जुला असर दर्शाता है।

स्वदेशी उत्पादों की माँग और प्रमुख श्रेणियाँ

CTI ने बताया कि इस वर्ष दिवाली सीज़न में पाँच करोड़ से अधिक उपहारों का आदान-प्रदान हुआ — किफ़ायती से लेकर प्रीमियम उत्पादों तक। संगठन के अनुसार, मिट्टी के दीये, देवी-देवताओं की मूर्तियाँ, हस्तशिल्प, देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश पूजन सामग्री, तथा स्थानीय कारीगरों और शिल्पकारों के सजावटी उत्पादों की माँग विशेष रूप से मज़बूत रही।

इसके साथ ही FMCG, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएँ, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फ़ोन, कपड़े-परिधान, सौंदर्य प्रसाधन, फर्नीचर, मिठाई-स्नैक्स, खिलौने और घरेलू साज-सज्जा समेत दर्जनों श्रेणियों में भी जोरदार बिक्री दर्ज की जा रही है। CTI ने यह भी कहा कि GST सुधारों ने भारतीय निर्मित वस्तुओं को उपभोक्ताओं के बीच अधिक मान्यता दिलाने में मदद की है।

दिल्ली के बाज़ारों में उमड़ी भीड़

गोयल ने बताया कि चाँदनी चौक, सदर बाज़ार, कमला नगर, राजौरी गार्डन, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, लाजपत नगर, शाहदरा और लक्ष्मी नगर समेत राजधानी के प्रमुख बाज़ारों में ग्राहकों की आवाजाही में ज़बरदस्त इज़ाफ़ा देखा जा रहा है। ऑटोमोबाइल शोरूम भी त्योहारी अवधि में अच्छी बिक्री दर्ज कर रहे हैं।

आगे की संभावनाएँ

CTI के अनुमानों के अनुसार, व्यावसायिक गतिविधियाँ अब तेज़ी से पटरी पर लौट रही हैं और विरोध प्रदर्शनों से हुए नुकसान की भरपाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। संगठन का मानना है कि स्वदेशी उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता और उपभोक्ता खर्च में तेज़ी आने वाले महीनों में भी जारी रह सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि ये आँकड़े उद्योग-प्रतिनिधि संगठन के हैं, न कि किसी स्वतंत्र आर्थिक एजेंसी के। विरोध प्रदर्शनों से ₹14,000 करोड़ के नुकसान का दावा भी इसी स्रोत से है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। ऑटोमोबाइल बिक्री के आँकड़े उद्योग संस्था की रिपोर्ट पर आधारित हैं और वे ज़्यादा ठोस हैं — तिपहिया में 110% की वृद्धि विशेष रूप से उल्लेखनीय है। असली सवाल यह है कि क्या यह त्योहारी उछाल टिकाऊ उपभोक्ता भावना को दर्शाता है या महज़ टाली गई खरीदारी का एकमुश्त विस्फोट — यह अंतर आने वाले महीनों के खुदरा आँकड़ों में स्पष्ट होगा।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिवाली 2026 पर दिल्ली में कितने कारोबार का अनुमान है?
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुसार दिवाली त्योहारी सीज़न में अकेले दिल्ली में लगभग ₹80,000 करोड़ और देशभर में ₹5 लाख करोड़ का कारोबार होने की उम्मीद है। CTI ने यह अनुमान होटल, रेस्तरां, ऑटोमोबाइल और मार्केट एसोसिएशन सहित कई क्षेत्रों से परामर्श के बाद तैयार किया है।
दिवाली सीज़न में ऑटोमोबाइल बिक्री में कितनी वृद्धि हुई?
ऑटोमोबाइल उद्योग संस्था की रिपोर्ट के अनुसार त्योहारी सीज़न में देशभर में खुदरा वाहन बिक्री में कुल 55% की वृद्धि हुई है। श्रेणीवार देखें तो तिपहिया वाहनों में सर्वाधिक 110%, यात्री वाहनों में 70%, ट्रैक्टरों में 58%, दोपहिया में 52% और वाणिज्यिक वाहनों में 48% की वृद्धि दर्ज की गई।
दिल्ली के व्यापारियों को विरोध प्रदर्शनों से कितना नुकसान हुआ था?
CTI की रिपोर्ट के अनुसार 1 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 के बीच हुई रैलियों और विरोध प्रदर्शनों के कारण दिल्ली के व्यापारियों को अनुमानतः ₹14,000 करोड़ का व्यावसायिक नुकसान हुआ। CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल ने कहा कि व्यापारी दिवाली की बंपर खरीदारी से इस नुकसान की भरपाई की उम्मीद रख रहे हैं।
इस दिवाली सीज़न में किन उत्पादों की सबसे अधिक माँग है?
CTI के अनुसार मिट्टी के दीये, हस्तशिल्प, पूजन सामग्री, सजावटी वस्तुएँ और स्थानीय कारीगरों के उत्पादों की विशेष माँग है। इसके अलावा FMCG, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फ़ोन, कपड़े, मिठाई, फर्नीचर और सौंदर्य प्रसाधन जैसी श्रेणियों में भी अच्छी बिक्री दर्ज हो रही है।
CTI कौन सा संगठन है और इसके अनुमान कितने विश्वसनीय हैं?
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) दिल्ली के व्यापारियों का एक प्रमुख संगठन है जो विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करता है। इसके अनुमान उद्योग-आधारित परामर्श पर टिके हैं और इन्हें किसी स्वतंत्र सरकारी एजेंसी ने प्रमाणित नहीं किया है, इसलिए इन्हें संकेतक आँकड़ों के रूप में देखा जाना चाहिए।
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