बांग्लादेश: इकबाल सोभन चौधरी की जेल को मानवाधिकार संगठन ने बताया 'राजनीतिक उत्पीड़न'
सारांश
मुख्य बातें
फ्रांस स्थित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश (JMBF) ने डीबीसी न्यूज के चेयरमैन और वरिष्ठ पत्रकार इकबाल सोभन चौधरी की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की कड़ी निंदा की है। संगठन का कहना है कि उनकी राजनीतिक पहचान और पेशेवर पृष्ठभूमि को आपराधिक रूप देने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग किया गया है। यह मामला बांग्लादेश में प्रेस स्वतंत्रता पर गहराते संकट की ओर नई बहस छेड़ रहा है।
मामले का घटनाक्रम
ढाका मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट सारा फरजाना हक ने जाँच अधिकारी की याचिका के आधार पर इकबाल सोभन चौधरी को जुलाई 2024 के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े एक हत्या मामले में जेल भेजने का आदेश जारी किया। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकारी अभियोजक मुहम्मद शम्सुदोहा चौधरी ने इस आदेश की पुष्टि की।
उल्लेखनीय है कि इकबाल सोभन चौधरी अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के पूर्व सूचना सलाहकार भी रह चुके हैं। JMBF का आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर बांग्लादेश अवामी लीग से जुड़ाव और 1971 के मुक्ति संग्राम के आदर्शों के समर्थन के कारण निशाना बनाया गया है।
मानवाधिकार संगठन के आरोप
JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा, 'हम वरिष्ठ पत्रकार इकबाल सोभन चौधरी की राजनीतिक रूप से प्रेरित गिरफ्तारी और उन्हें जेल भेजने की कड़ी निंदा करते हैं। उत्पीड़न का यह चिंताजनक सिलसिला मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पिछली अंतरिम सरकार के समय शुरू हुआ था और अब भी बांग्लादेश में बुनियादी आज़ादी के लिए खतरा बना हुआ है।'
संगठन ने यह भी कहा कि अदालत के सामने पेश किए गए विवरण में ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है जो हत्या में उनकी सीधी संलिप्तता या यह साबित करे कि उन्होंने किसी को ऐसा करने का निर्देश दिया था। इस्लाम के अनुसार, 'राजनीतिक विचारों के लिए सज़ा देने और पत्रकारों की आवाज़ दबाने के लिए आपराधिक कानूनों का हथियार की तरह इस्तेमाल करना राज्य सत्ता का घोर दुरुपयोग है।'
सरकार से माँगें
JMBF ने बांग्लादेश सरकार से माँग की है कि इकबाल सोभन चौधरी को तुरंत रिहा किया जाए, उनकी 'राजनीतिक रूप से प्रेरित' हिरासत और मुकदमे को समाप्त किया जाए, तथा उनके राजनीतिक जुड़ाव, पेशेवर पद या 1971 के मुक्ति संग्राम के आदर्शों के समर्थन के आधार पर लगाए गए सभी आरोपों को वापस लिया जाए।
संगठन ने स्पष्ट किया कि किसी पूर्व सरकार के साथ राजनीतिक जुड़ाव या पेशेवर संबंध होने मात्र से किसी व्यक्ति को आपराधिक कृत्य के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता — इसके लिए ठोस साक्ष्य आवश्यक हैं।
अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील
JMBF ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR), अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत और वैश्विक प्रेस स्वतंत्रता संगठनों से आग्रह किया है कि वे इस मामले को बांग्लादेशी अधिकारियों के समक्ष उठाएँ, अभियोजन के आधार बने साक्ष्यों को सार्वजनिक करने की माँग करें और पूरी कानूनी कार्यवाही पर कड़ी नज़र रखें।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश में राजनीतिक परिवर्तन के बाद मीडिया और विपक्षी नेताओं पर मुकदमों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। आने वाले हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय दबाव और बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया इस प्रकरण की दिशा तय करेगी।