केरल PSC अध्यक्ष एमआर बैजू को परीक्षा धोखाधड़ी मामले में SIT ने दूसरी बार तलब किया
सारांश
मुख्य बातें
क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (SIT) ने केरल लोक सेवा आयोग (PSC) के अध्यक्ष एमआर बैजू को 7 नवंबर 2026 को एक नया समन जारी करते हुए उन्हें तिरुवनंतपुरम स्थित क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने का निर्देश दिया है। यह योजना बोर्ड परीक्षा धोखाधड़ी मामले में उनसे होने वाली संभावित दूसरी पूछताछ होगी। SIT का कहना है कि केरल उच्च न्यायालय ने भी जांच में अनावश्यक देरी न करने का निर्देश दिया है।
मामले की पृष्ठभूमि
बैजू ने इससे पहले SIT के समक्ष पेश होने से यह कहते हुए इनकार किया था कि जब तक केरल उच्च न्यायालय इस मामले में कोई स्पष्ट आदेश नहीं देता, वे जांचकर्ताओं के सामने नहीं आएंगे। हालांकि, SIT ने स्पष्ट किया है कि उच्च न्यायालय ने न तो जांच पर रोक लगाई है और न ही एजेंसी को पूछताछ से रोका है। SIT के अनुसार, न्यायालय ने उल्टे यह संकेत दिया था कि जांच प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रहनी चाहिए।
PSC अध्यक्ष पर क्या हैं आरोप
जांचकर्ताओं को संदेह है कि बैजू के कथित एकतरफा फैसलों के कारण परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। PSC सदस्यों के बयानों के आधार पर जांचकर्ताओं को कथित तौर पर पता चला है कि अध्यक्ष ने स्वयं प्रश्नपत्र तैयार करने वाले पैनल और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए नियुक्त किए जाने वाले लोगों का चयन किया था। सदस्यों ने यह भी कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में बैजू का हस्तक्षेप एकतरफा था।
गिरफ्तार अतिरिक्त सचिव का बयान
इस मामले में पहले गिरफ्तार किए गए अतिरिक्त सचिव आर. हरि ने जांचकर्ताओं को बताया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया से 10 प्रश्न हटाए जाने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। उनके अनुसार, यह जिम्मेदारी सेवानिवृत्त उप सचिव सतीश के पास थी और उन्हें प्रश्न हटाए जाने की कोई जानकारी नहीं थी। हालांकि, क्राइम ब्रांच इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और जांच जारी है।
SIT की चेतावनी
नवीनतम नोटिस में SIT ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि बैजू समन का पालन करने में विफल रहते हैं, तो वह केरल उच्च न्यायालय को इस बारे में सूचित करेगी। गौरतलब है कि यह मामला केरल की प्रतिष्ठित भर्ती प्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करता है, जिस पर लाखों अभ्यर्थी भरोसा करते हैं।
आगे क्या होगा
SIT अधिकारियों से पूछताछ जारी रखे हुए है और परीक्षा में कथित हेरफेर के पीछे की निर्णय प्रक्रिया की गहन जांच कर रही है। बैजू का रुख और उच्च न्यायालय में लंबित याचिका का परिणाम इस मामले की दिशा तय करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या PSC की स्वायत्तता और जांच एजेंसी की शक्तियों के बीच का यह टकराव न्यायिक हस्तक्षेप की ओर बढ़ता है।