केरल PSC विश्वसनीयता संकट: हाईकोर्ट ने क्राइम ब्रांच जांच जारी रखने की दी अनुमति
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर विश्वसनीयता संकट से गुज़र रहा है। तिरुवनंतपुरम में 13 अक्टूबर को केरल हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्लानिंग बोर्ड परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी क्राइम ब्रांच की जांच बिना किसी बाधा के जारी रह सकती है — भले ही PSC की FIR रद्द करने की याचिका अदालत के समक्ष विचाराधीन हो।
अदालत का रुख और मुख्य घटनाक्रम
न्यायमूर्ति बदरुद्दीन ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान साफ कहा कि याचिका दायर होने मात्र से जांच पर कोई रोक नहीं लगती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत ने कोई स्टे आदेश नहीं दिया था और केवल याचिका पर विचार कर रही थी। PSC की ओर से क्राइम ब्रांच की रिपोर्ट का जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय माँगा गया, जिसके बाद अदालत ने कहा कि वह दो दिन बाद मामले की फिर से सुनवाई करेगी।
क्राइम ब्रांच के गंभीर आरोप
क्राइम ब्रांच ने हाईकोर्ट को बताया है कि 10 प्रश्नों को — जिनके कुल 58 अंक थे — कथित तौर पर जानबूझकर बिना जाँचे छोड़ दिया गया था। इस आरोप ने परीक्षा संचालन और रैंक सूची तैयार करने की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बाद में हुए पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) से रैंकिंग में बदलाव आया और शिकायतकर्ता श्याम कृष्णन संशोधित सूची में प्रथम स्थान पर आ गए। इसके बाद PSC ने नई रैंक सूची के आधार पर एक एडवाइस मेमो जारी किया।
SIT को 150 से अधिक शिकायतें
रिपोर्टों के अनुसार, इस विवाद की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को अब तक 150 से अधिक शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। जांच का दायरा बढ़ता जा रहा है — PSC के और कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है। गौरतलब है कि यह मामला अब केवल एक परीक्षा की अनियमितता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरी भर्ती प्रणाली की जवाबदेही का सवाल बन गया है।
राजनीतिक आयाम
इस विवाद ने PSC की संरचना पर भी ध्यान खींचा है। मौजूदा आयोग के सभी 16 सदस्यों की नियुक्ति पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली पिछली सरकार ने की थी। आलोचकों का कहना है कि प्लानिंग बोर्ड में वह नियुक्ति — जिसे बाद में रद्द कर दिया गया — एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ी है जिसे वामपंथी विचारधारा का समर्थक माना जाता है। इन आरोपों ने मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी बाकी है।
आम उम्मीदवारों और जनता पर असर
PSC वर्षों से उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद का प्रतीक रहा है जो सरकारी नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी में अपना समय और ऊर्जा लगाते हैं। इस संकट ने उस भरोसे को गहरी चोट पहुँचाई है। उम्मीदवार और आम जनता जांच पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं। क्राइम ब्रांच की जांच का नतीजा न केवल सीधे प्रभावित अभ्यर्थियों के लिए, बल्कि केरल की समूची सार्वजनिक भर्ती प्रणाली में जनता के विश्वास के लिए निर्णायक साबित होगा।