केरल PSC अध्यक्ष डॉ. बैजू को SIT का नोटिस, योजना बोर्ड भर्ती अनियमितताओं की जांच तेज
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) के अध्यक्ष डॉ. एम.आर. बैजू को अपराध शाखा की विशेष जांच दल (SIT) ने नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्हें राज्य योजना बोर्ड के उद्योग और अवसंरचना प्रभाग में एक वरिष्ठ अधिकारी की भर्ती में कथित अनियमितताओं के संबंध में पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। यह दूसरा मौका है जब PSC के शीर्ष नेतृत्व को इस मामले में जांच एजेंसी के सामने पेश होना पड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद राज्य योजना बोर्ड के उद्योग और अवसंरचना प्रभाग प्रमुख के पद के चयन में कथित गड़बड़ियों से जुड़ा है। शिकायत दर्ज होने के बाद पुनर्मूल्यांकन कराया गया, जिसमें नियुक्त उम्मीदवार पाँचवें स्थान पर खिसक गया और शिकायतकर्ता ने पहली रैंक हासिल की। बाद में केरल उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप से वह नियुक्ति रद्द कर दी गई।
गौरतलब है कि इससे पहले जांच एजेंसी के PSC अध्यक्ष और सदस्यों से पूछताछ के प्रयास असफल रहे थे, जिसके बाद आयोग ने स्वयं उच्च न्यायालय में जांच को चुनौती दी थी।
उच्च न्यायालय की कड़ी फटकार
यह ताज़ा नोटिस उच्च न्यायालय द्वारा जांच की गति पर कड़ी आलोचना के कुछ दिनों बाद आया है। न्यायालय ने सवाल उठाया था कि मुख्य आरोपियों से पूछताछ क्यों नहीं की गई और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ जब्त क्यों नहीं किए गए। सरकार और PSC के बीच किसी भी मिलीभगत के विरुद्ध चेतावनी देते हुए न्यायालय ने टिप्पणी की कि जनता इस प्रकार की साँठगाँठ से घृणा करेगी।
सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीसन ने सोमवार को विधानसभा में बताया कि PSC परीक्षाओं में अनियमितताओं से जुड़ी अब तक 180 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। इनमें से 3 शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच कर रही है, जबकि 5 अन्य की आंतरिक सतर्कता शाखा द्वारा जाँच जारी है।
दूसरी ओर, पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने PSC का बचाव करते हुए कहा कि आयोग ने पिछले एक दशक में लाखों उम्मीदवारों को पारदर्शी तरीके से नियुक्तियाँ दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक भर्ती प्रकरण को आधार बनाकर पूरे संस्थान की साख को नष्ट करने का एक 'संगठित षड्यंत्र' रचा जा रहा है।
राज्यपाल की सिफारिश और राजनीतिक विवाद
निवर्तमान राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर ने अनियमितताओं के आरोपों का हवाला देते हुए डॉ. बैजू को हटाने और आयोग को भंग करने की सिफारिश की, जिससे विवाद और गहरा गया। उल्लेखनीय है कि वर्तमान PSC के सभी 16 सदस्यों की नियुक्ति विजयन के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान हुई थी।
आगे क्या होगा
जांच अभी जारी है और आयोग नेतृत्व के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि बाकी है। SIT की पूछताछ के नतीजे और उच्च न्यायालय की आगामी सुनवाई यह तय करेगी कि यह मामला केरल के सार्वजनिक भर्ती तंत्र की विश्वसनीयता पर क्या असर डालता है।