केरल हाई कोर्ट का PSC जांच पर कड़ा सवाल: मुख्य आरोपी से पूछताछ के बिना जांच कैसे?
सारांश
मुख्य बातें
केरल उच्च न्यायालय ने शनिवार, 24 अक्टूबर को केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं की क्राइम ब्रांच जांच की प्रगति पर तीखे सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि चयन प्रक्रिया से सीधे जुड़े मुख्य व्यक्ति से पूछताछ किए बिना जांच आगे कैसे बढ़ सकती है। यह मामला राज्य योजना बोर्ड के उद्योग एवं बुनियादी ढाँचा प्रभाग के प्रमुख पद की भर्ती से जुड़ा है।
मामले की पृष्ठभूमि
PSC ने जुलाई 2023 में राज्य योजना बोर्ड के वरिष्ठ पद के लिए परीक्षा आयोजित की थी। बाद में एक उम्मीदवार ने पाया कि उत्तर पुस्तिकाओं में कई प्रश्नों का मूल्यांकन ही नहीं किया गया था। क्राइम ब्रांच के अनुसार, कुल 58 अंकों के 10 प्रश्नों का मूल्यांकन नहीं हुआ, जिसका असर परीक्षा में शामिल कई उम्मीदवारों की उत्तर पुस्तिकाओं पर पड़ा।
मूल चयन सूची में अरुण जे. प्रताप पहले स्थान पर थे और उन्होंने योजना बोर्ड में पदभार भी संभाल लिया था। तीसरे स्थान पर रहे श्याम कृष्णन ने मूल्यांकन प्रक्रिया को चुनौती दी। पुनर्मूल्यांकन और साक्षात्कार के बाद श्याम कृष्णन पहले स्थान पर आ गए, जबकि अरुण जे. प्रताप पाँचवें स्थान पर खिसक गए।
अदालत की तीखी टिप्पणियाँ
सुनवाई के दौरान केरल उच्च न्यायालय ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि PSC और सरकार 'भाई-भाई' की तरह काम करेंगे तो आम जनता को पूरी चयन प्रक्रिया पर संदेह करने का कारण मिलेगा। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि मुख्य संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ किए बिना जांच की विश्वसनीयता संदिग्ध बनी रहेगी।
गौरतलब है कि यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई जिसमें PSC ने क्राइम ब्रांच जांच को रद्द करने की माँग की है। PSC का तर्क है कि लागू नियमों के तहत इस प्रकार की जांच की अनुमति नहीं है।
सरकार और PSC के परस्पर विरोधी दावे
केरल सरकार ने अदालत को बताया कि जांच जारी है, लेकिन साथ ही यह भी स्वीकार किया कि PSC जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। इसके जवाब में PSC ने दावा किया कि कथित अनियमितताएँ केवल एक लिपिकीय (क्लेरिकल) गलती का परिणाम थीं और चयन प्रक्रिया में हेरफेर करने की कोई जानबूझकर कोशिश नहीं की गई। सरकार ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कोई नियम नहीं है जो जांच को रोकता हो।
क्राइम ब्रांच यह निर्धारित करने की कोशिश कर रही है कि मूल्यांकन में यह चूक महज तकनीकी भूल थी या इसके पीछे कोई जानबूझकर की गई गड़बड़ी थी।
PSC की विश्वसनीयता पर असर
यह ऐसे समय में सामने आया है जब सार्वजनिक भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता को लेकर देशभर में बहस तेज है। PSC जैसी संस्थाएँ निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। उच्च न्यायालय की ताज़ा टिप्पणियों के बाद PSC के रवैये पर सार्वजनिक निगरानी और बढ़ गई है।
अगली सुनवाई
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर के लिए निर्धारित की है। उस दिन यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि क्राइम ब्रांच जांच जारी रहेगी या PSC की याचिका पर कोई अंतरिम राहत दी जाएगी।