केरल PSC भर्ती घोटाला: कांग्रेस नेता MM हसन ने अध्यक्ष बैजू और सभी 16 सदस्यों को हटाने की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
केरल लोक सेवा आयोग (PSC) भर्ती घोटाले में क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई तेज होने के बाद वरिष्ठ कांग्रेस नेता एमएम हसन ने 31 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार से मांग की कि वह PSC अध्यक्ष एमआर बैजू और आयोग के सभी सदस्यों को पद से हटाने के लिए तुरंत राष्ट्रपति को सिफारिश भेजे। हसन ने स्पष्ट कहा कि गंभीर आरोपों से घिरे लोगों का संवैधानिक पद पर बने रहना न कानूनी दृष्टि से उचित है और न ही नैतिक दृष्टि से।
मुख्य घटनाक्रम
PSC अध्यक्ष बैजू और आयोग के तीन सदस्यों से SIT पहले ही पूछताछ कर चुकी है। 31 अक्टूबर को PSC सचिव साजू जॉर्ज SIT के समक्ष पेश हुए। इससे एक रात पहले, शुक्रवार की रात, SIT ने PSC परीक्षा विभाग के निलंबित अतिरिक्त सचिव आर. हरि को कोच्चि में एक रिश्तेदार के घर से गिरफ्तार किया — वे पिछले कई दिनों से फरार थे।
इससे पहले घोटाले में एक अन्य आरोपी, सेवानिवृत्त उप सचिव पी. सतीश को दो दिन पूर्व गिरफ्तार किया गया था और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
नए मामले और आरोपों का विस्तार
एक अहम घटनाक्रम में SIT ने मत्स्य पालन विस्तार अधिकारियों की भर्ती में कथित अनियमितताओं के आरोप में अध्यक्ष बैजू, आयोग के सदस्यों और अधिकारियों के विरुद्ध एक अलग मामला भी दर्ज किया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, रैंकिंग में हेरफेर कर अयोग्य उम्मीदवारों को लाभ पहुँचाया गया और योग्य अभ्यर्थियों को उनके उचित अवसर से वंचित किया गया।
जांच में राज्य योजना बोर्ड में भर्ती की कथित अनियमितताओं का भी खुलासा हुआ है, जहाँ अधिकारियों पर मूल्यांकन प्रक्रिया में हेरफेर करने का आरोप है। यह ऐसे समय में आया है जब केरल उच्च न्यायालय ने हाल ही में जांच की धीमी गति पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए पूछा था कि प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार या पूछताछ के लिए क्यों नहीं बुलाया गया।
कांग्रेस की माँग और राजनीतिक दबाव
हसन ने कहा कि केरल में क्राइम ब्रांच द्वारा PSC अध्यक्ष और सदस्यों से पूछताछ अपने आप में अभूतपूर्व है। उन्होंने कांग्रेस नेता वीडी सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार से तत्काल संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करने की अपील की। हसन ने यह भी सुझाव दिया कि जांच पूरी होने तक अध्यक्ष और सदस्यों को उनके आधिकारिक दायित्वों से अलग रखने पर विचार होना चाहिए।
गौरतलब है कि निवर्तमान राज्यपाल राजेंद्र वी. अर्लेकर ने इससे पूर्व राष्ट्रपति को पत्र लिखकर 16 सदस्यीय PSC बोर्ड — अध्यक्ष सहित 15 सदस्यों — को हटाने की सिफारिश की थी। इस प्रकार राज्यपाल और प्रमुख विपक्षी दल दोनों की मांगें अब एक दिशा में आ गई हैं।
आम युवाओं पर असर
हसन ने आयोग पर बेरोज़गार युवाओं के साथ विश्वासघात करने और सार्वजनिक भर्ती प्रणाली में जनता के भरोसे को नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को संवैधानिक पद पर बने रहने की अनुमति नहीं दे सकती जो गंभीर आपराधिक जांच का सामना कर रहे हों।
आगे क्या होगा
SIT की जांच जारी है और मामले की सुनवाई केरल उच्च न्यायालय की निगरानी में हो रही है। राज्य सरकार पर विपक्ष, राज्यपाल और अदालत — तीनों तरफ से दबाव बढ़ता जा रहा है। PSC अध्यक्ष और सदस्यों के भविष्य का फैसला अब केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया और संवैधानिक प्रक्रिया पर टिका है।