आजम खां जेल से निकले, ईडी ने तुरंत हिरासत में लिया; बोले— 'मुसलमान होना ही गुनाह है क्या?'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खां को 31 अक्टूबर 2026 की शाम रामपुर जेल से रिहा होते ही प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हिरासत में ले लिया। दो पैनकार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकले थे कि ईडी की टीम ने उन्हें घेर लिया और पूछताछ के लिए गाजियाबाद स्थित अपने कार्यालय ले गई। यह हिरासत जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कथित धन शोधन मामले के सिलसिले में हुई।
घटनाक्रम: जेल गेट पर ईडी की प्रतीक्षा
रामपुर के अपर पुलिस अधीक्षक अनिल सिंह सिसोदिया के अनुसार, ईडी की टीम शाम करीब 6:15 बजे जेल के मुख्य द्वार पर पहुँच गई थी। उसके साथ चार थानों की पुलिस और लगभग 50 सीआरपीएफ जवान तैनात थे। शाम सात बजे जैसे ही आजम खां जेल से बाहर निकले, अधिकारियों ने एक आदेश दिखाते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। कुछ देर तक अधिकारियों और आजम खां के बीच बातचीत भी हुई, जिसके बाद उन्हें गाजियाबाद रवाना किया गया।
आजम खां का बयान: 'मुसलमान होना क्या गुनाह है?'
जेल से बाहर निकलते ही आजम खां ने मीडिया से कहा, 'अब कहने को क्या है? मैं क्या कहूं? कानून का वजूद खत्म हो चुका है। क्या यह एक मुसलमान होने की सजा है? हमारी गलती यह थी कि एक मुसलमान ने यूनिवर्सिटी बनाई। यही हमारा गुनाह है। हमने बच्चों के लिए स्कूल बनाए। क्या यह हमारा गुनाह है?' उनके इस बयान ने सियासी हलचल तेज कर दी है। उल्लेखनीय है कि करीब 11 महीने 14 दिन की जेल के बाद उनकी रिहाई हुई थी, जिसके बाद तत्काल हिरासत की यह कार्रवाई विवाद का केंद्र बन गई है।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि 'आज के हुक्मरानों को याद रखना चाहिए कि जब वक्त बदलता है तो तख्त भी बदल जाता है। आजम खां के खिलाफ मुकदमों की साजिश को पूरा देश ही नहीं, पूरी दुनिया देख रही है।' उन्होंने यह भी कहा कि एक उम्रदराज व्यक्ति को इस तरह के मुकदमों में फंसाकर बार-बार जेल भेजना बेहद कायराना हरकत है और सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, वक्त बदलने पर उसे खुद भी इसका सामना करना पड़ेगा।
पैनकार्ड मामला और कानूनी पृष्ठभूमि
17 नवंबर 2025 को एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दो पैनकार्ड मामले में आजम खां और अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल की सजा सुनाई थी और दोनों पर ₹50-50 हजार का जुर्माना लगाया था। दोनों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील की, जिसने 29 अक्टूबर 2026 को जमानत मंजूर की। रामपुर की अदालतों में रिहाई की कानूनी औपचारिकताएँ पूरी होने में दो दिन लगे।
जौहर ट्रस्ट मामला और ईडी की कार्रवाई का संदर्भ
ईडी ने 13 अक्टूबर 2026 को जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी और आजम खां समेत पाँच लोगों के खिलाफ अजीमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। इसी मामले में ईडी की यह कार्रवाई रिहाई के तत्काल बाद हुई, जिससे सियासी आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विपक्षी दल पहले से ही एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं।
आने वाले दिनों में ईडी की पूछताछ के बाद यह स्पष्ट होगा कि आजम खां की न्यायिक लड़ाई का अगला पड़ाव क्या होगा।