चक्रवात अर्नब से बिहार में खरीफ फसलें बर्बाद, तेजस्वी यादव ने माँगा किसानों को तत्काल मुआवजा
सारांश
मुख्य बातें
बिहार में चक्रवात अर्नब के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने राज्यभर के किसानों की खरीफ फसलों को व्यापक नुकसान पहुँचाया है। इस संकट को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने शनिवार, 31 अक्टूबर को जारी बयान में बिहार सरकार से प्रभावित किसानों को यथाशीघ्र उचित मुआवजा दिलाने की माँग की। उनका कहना है कि तैयार फसल के नष्ट होने से किसानों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
किन फसलों को हुआ नुकसान
यादव के अनुसार, चक्रवात के असर से हुई लगातार बारिश ने धान, केला, मक्का, दालों और हरी सब्जियों की फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि कई खेतों में धान की कटी हुई फसल खलिहान में रखी थी, जो लगातार बारिश के पानी में डूबकर पूरी तरह भीग गई — यानी महीनों की मेहनत एक झटके में बर्बाद हो गई।
यह ऐसे समय में आया है जब खरीफ सीजन की कटाई का काम अंतिम चरण में था और किसान अपनी उपज बाजार में लाने की तैयारी कर रहे थे। गौरतलब है कि बिहार में हर साल मानसून के बाद की बारिश किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनती रही है, और चक्रवाती प्रभाव ने इस बार नुकसान की तीव्रता को और बढ़ा दिया है।
तेजस्वी यादव की माँगें
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से तीन स्पष्ट अपेक्षाएँ रखीं — पहली, नुकसान का त्वरित सर्वेक्षण; दूसरी, मुआवजे की प्रक्रिया में बिना देरी के तेजी लाना; और तीसरी, राहत राशि इतनी हो कि वह केवल 'खानापूर्ति' न रहे बल्कि किसानों की वास्तविक क्षतिपूर्ति कर सके।
यादव ने कहा, 'नुकसान झेल रहे किसानों को मुआवजे के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़े, यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है।' उन्होंने सरकार से संवेदनशीलता के साथ तत्काल राहत की व्यवस्था करने का आग्रह किया।
किसानों पर आर्थिक असर
विशेषज्ञों के अनुसार, खड़ी या कटी हुई फसल का बारिश में नष्ट होना किसान के लिए दोहरा झटका होता है — न केवल उत्पादन लागत डूब जाती है, बल्कि आगामी रबी सीजन के लिए बीज और खाद खरीदने की क्षमता भी प्रभावित होती है। बिहार के कृषि-प्रधान जिलों में, जहाँ अधिकांश किसान छोटी जोत वाले हैं, ऐसी प्राकृतिक आपदाएँ उन्हें कर्ज के दुष्चक्र में धकेल सकती हैं।
यह पहली बार नहीं है जब बिहार के किसान बेमौसम बारिश की मार झेल रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में चक्रवाती और अतिरिक्त वर्षा की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है, जो जलवायु परिवर्तन के व्यापक प्रभावों का संकेत देती है।
सरकार की प्रतिक्रिया
फिलहाल बिहार सरकार की ओर से इस माँग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यादव ने अपेक्षा जताई है कि सरकार नुकसान के आकलन और मुआवजे की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाए।
आगे क्या
विपक्ष के दबाव और किसानों की बढ़ती परेशानी को देखते हुए यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार कितनी जल्दी नुकसान का सर्वे पूरा करती है और राहत वितरण की समयसीमा तय करती है। किसान संगठनों की ओर से भी सरकार पर दबाव बढ़ने की संभावना है।