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इंदापुर में एआई डेटा सेंटर समेत 4 परियोजनाओं पर विवाद, जनसुनवाई के आश्वासन के बाद रोहित पवार ने आंदोलन स्थगित किया

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इंदापुर में एआई डेटा सेंटर समेत 4 परियोजनाओं पर विवाद, जनसुनवाई के आश्वासन के बाद रोहित पवार ने आंदोलन स्थगित किया

सारांश

उजनी बांध क्षेत्र में एआई डेटा सेंटर, परमाणु संयंत्र, सौर और हाइड्रोजन परियोजनाओं को लेकर भड़के विधायक रोहित पवार ने घंटों में आंदोलन वापस लिया — लेकिन चेतावनी दी कि जनसुनवाई के बिना काम हुआ तो 4-5 लाख लोग सड़क पर उतरेंगे।

मुख्य बातें

राकांपा (एसपी) विधायक रोहित पवार ने 31 अक्टूबर को उजनी बांध और इंदापुर क्षेत्र की 4 परियोजनाओं के खिलाफ आंदोलन किया।
विवादित परियोजनाओं में एआई डेटा सेंटर , परमाणु ऊर्जा संयंत्र , जलीय सौर ऊर्जा प्रकल्प और हाइड्रोजन परियोजना शामिल हैं।
अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जनसुनवाई से पहले कोई काम या भूमिपूजन नहीं होगा।
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी पालकमंत्री के इशारे पर गलत जानकारी फैला रहे थे।
पवार ने चेतावनी दी कि यदि सहमति के बिना काम शुरू हुआ तो 4 से 5 लाख लोग सड़कों पर उतर सकते हैं।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने शनिवार, 31 अक्टूबर को पुणे के उजनी बांध और इंदापुर क्षेत्र में प्रस्तावित एआई डेटा सेंटर, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, जलीय सौर ऊर्जा प्रकल्प और हाइड्रोजन परियोजना — इन चार परियोजनाओं के खिलाफ तीव्र आंदोलन की चेतावनी दी। हालाँकि, अधिकारियों द्वारा जनसुनवाई पूरी होने तक किसी भी परियोजना पर कोई काम शुरू नहीं करने का आश्वासन मिलने के बाद रोहित पवार ने कुछ ही घंटों में आंदोलन वापस ले लिया।

विवाद की जड़: चार परियोजनाओं वाला एमओयू

रोहित पवार ने आरोप लगाया कि सरकार ने स्थानीय किसानों और नागरिकों को विश्वास में लिए बिना इन परियोजनाओं को मंजूरी दी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के सामने संबंधित समझौता ज्ञापन (एमओयू) पढ़कर सुनाया, जिसमें चारों परियोजनाओं — एआई डेटा सेंटर, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, पानी पर तैरने वाला सौर ऊर्जा प्रकल्प और हाइड्रोजन परियोजना — का स्पष्ट उल्लेख था। पवार के अनुसार, इससे परियोजनाओं को लेकर दी जा रही आधिकारिक जानकारी की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

अधिकारियों का आश्वासन और आंदोलन की वापसी

आंदोलन के दौरान अधिकारियों ने स्पष्ट आश्वासन दिया कि जनसुनवाई पूरी होने तक एक प्रतिशत काम भी शुरू नहीं किया जाएगा और परियोजनाओं का भूमिपूजन भी नहीं होगा। इस आश्वासन के बाद रोहित पवार ने किसानों और स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया। उन्होंने पुलिस से अपील की कि आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए।

गलत जानकारी फैलाने का आरोप

रोहित पवार ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी पालकमंत्री या अन्य प्रभावशाली लोगों के कहने पर जनता के बीच परियोजनाओं को लेकर गलत जानकारी फैला रहे थे। उन्होंने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में बड़े औद्योगिक निवेश और स्थानीय समुदायों के हितों के बीच टकराव की घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं।

शरद पवार की भूमिका पर सवाल

परियोजनाओं को लागू करने वाली कंपनी के कुछ अधिकारियों की वरिष्ठ नेता शरद पवार से मुलाकात की तस्वीरें सामने आने पर रोहित पवार ने कहा कि उनसे कोई भी व्यक्ति या कारोबारी मिल सकता है। उन्होंने भरोसा जताया कि शरद पवार स्थानीय लोगों, किसानों, मछुआरों और वारकरी समुदाय के साथ मजबूती से खड़े रहेंगे। रोहित पवार ने कहा, 'हमें विश्वास है कि शरद पवार यहाँ के भूमिपुत्रों, किसानों, मछुआरों और वारकरी समुदाय के साथ 100 प्रतिशत खड़े रहेंगे। उनके मार्गदर्शन में ही हमने यह आंदोलन किया है।'

आगे की चेतावनी और जन-समर्थन का दावा

रोहित पवार ने कहा कि शनिवार के आंदोलन में बहुत कम समय में सूचना देने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग अपने खर्च पर पहुँचे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए बिना काम शुरू करने की कोशिश की, तो भविष्य में चार से पाँच लाख लोग सड़कों पर उतर सकते हैं। एमओयू में शामिल किसी परियोजना को रद्द करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह निर्णय सरकार को लेना है, लेकिन जनसुनवाई और स्थानीय सहमति अनिवार्य है। गौरतलब है कि उजनी बांध क्षेत्र कृषि और मत्स्य पालन के लिए अत्यंत संवेदनशील है, जिससे इन परियोजनाओं का सीधा असर तीनों जिलों के लाखों किसानों और मछुआरों पर पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर विरोध के बाद 'जनसुनवाई' का आश्वासन देती है। असली सवाल यह है कि क्या यह जनसुनवाई महज औपचारिकता होगी या परियोजनाओं की दिशा को वास्तव में प्रभावित करेगी। उजनी बांध क्षेत्र में किसानों और मछुआरों की आजीविका दाँव पर है, और एमओयू में चार बड़ी परियोजनाओं का एक साथ उल्लेख यह संकेत देता है कि स्थानीय सहमति प्रक्रिया बाद की सोची गई, पहले नहीं। शरद पवार से जुड़ी कंपनी अधिकारियों की तस्वीरें इस विवाद में एक और परत जोड़ती हैं, जिस पर राजनीतिक स्पष्टता अभी बाकी है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इंदापुर में किन 4 परियोजनाओं पर विवाद है?
विवाद उजनी बांध और इंदापुर क्षेत्र में प्रस्तावित एआई डेटा सेंटर, परमाणु ऊर्जा संयंत्र, पानी पर तैरने वाला सौर ऊर्जा प्रकल्प और हाइड्रोजन परियोजना को लेकर है। इन चारों का उल्लेख एक ही एमओयू में है, जिसे रोहित पवार ने अधिकारियों के सामने पढ़कर सुनाया।
रोहित पवार ने आंदोलन क्यों वापस लिया?
अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जनसुनवाई पूरी होने तक कोई भी काम या भूमिपूजन नहीं होगा। इस आश्वासन के बाद रोहित पवार ने किसानों और स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर आंदोलन वापस लेने का फैसला किया।
रोहित पवार ने अधिकारियों पर क्या आरोप लगाए?
रोहित पवार ने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी पालकमंत्री या अन्य प्रभावशाली लोगों के कहने पर जनता के बीच परियोजनाओं को लेकर गलत जानकारी फैला रहे थे। उन्होंने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है।
शरद पवार का इस विवाद से क्या संबंध है?
परियोजनाओं को लागू करने वाली कंपनी के अधिकारियों की वरिष्ठ नेता शरद पवार से मुलाकात की तस्वीरें सामने आई हैं। रोहित पवार ने कहा कि उनसे कोई भी मिल सकता है और उन्हें भरोसा है कि शरद पवार किसानों, मछुआरों और वारकरी समुदाय के साथ खड़े रहेंगे।
अगर सरकार ने जनसुनवाई के बिना काम शुरू किया तो क्या होगा?
रोहित पवार ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने स्थानीय लोगों को विश्वास में लिए बिना काम शुरू करने की कोशिश की, तो 4 से 5 लाख लोग सड़कों पर उतर सकते हैं। उन्होंने कहा कि शनिवार का आंदोलन बहुत कम समय में आयोजित हुआ था, फिर भी बड़ी संख्या में लोग पहुँचे।
राष्ट्र प्रेस
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