प्रज्वल रेवन्ना केस: जांच करने वाले कर्नाटक SIT के 3 अधिकारियों को गृह मंत्रालय का उत्कृष्टता पदक
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक की विशेष जांच टीम (SIT) और अपराध जांच विभाग (CID) के तीन अधिकारियों को पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना से जुड़े यौन उत्पीड़न मामलों की जांच में असाधारण योगदान के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय का प्रतिष्ठित 'मेडल फॉर एक्सीलेंस इन इन्वेस्टिगेशन' प्रदान किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह सम्मान 31 अक्टूबर 2026 को घोषित किया गया।
सम्मानित अधिकारी कौन हैं
पदक पाने वाले अधिकारियों में इंस्पेक्टर शोभा, सहायक उपनिरीक्षक रत्नम्मा और CHC बालकृष्ण शामिल हैं। ये तीनों उस SIT टीम का अभिन्न हिस्सा थे जिसने रेवन्ना के विरुद्ध दर्ज यौन उत्पीड़न के मामलों की बारीकी से जांच की और अदालत में ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री कार्यालय ने तीनों को इस उपलब्धि पर बधाई दी है।
मामले की पृष्ठभूमि
पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के पोते और पूर्व जनता दल (सेक्युलर) सांसद प्रज्वल रेवन्ना को 1 अगस्त 2025 को बेंगलुरु की सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों की विशेष अदालत ने दोषी करार दिया था। अगले ही दिन 2 अगस्त 2025 को उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।
मामला वर्ष 2021 में एक 47 वर्षीय घरेलू महिला कर्मचारी के साथ कथित यौन उत्पीड़न और बार-बार दुष्कर्म से जुड़ा था। आरोपों के अनुसार, ये घटनाएँ परिवार के फार्महाउस और आवास पर हुई थीं। मामले में आपत्तिजनक वीडियो बनाने और उन्हें प्रसारित करने के आरोप भी शामिल थे।
जांच की चुनौतियाँ और फोरेंसिक कौशल
जांच के दौरान SIT को गंभीर तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लीक और बरामद किए गए कई वीडियो में आरोपी का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे में जांचकर्ताओं ने शरीर पर मौजूद जन्मचिह्न, तिल और टैटू जैसी विशेष पहचान के आधार पर मेडिकल परीक्षण की तस्वीरों और फोरेंसिक तकनीकों का सहारा लेते हुए आरोपी की पहचान सुनिश्चित की।
SIT ने सैकड़ों वीडियो और हजारों डिजिटल स्क्रीनशॉट की जांच की। अलग-अलग पीड़िताओं से जुड़े रिकॉर्ड तैयार किए गए और फार्महाउस तथा निजी आवासों सहित विभिन्न स्थानों पर हुई घटनाओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया। यह जांच अपने आप में एक जटिल डिजिटल-फोरेंसिक अभियान थी।
अदालत का फैसला और सजा
अदालत ने प्रज्वल रेवन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(के) और 376(2)(एन) के तहत शेष प्राकृतिक जीवन तक कारावास की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त यौन उत्पीड़न, महिला की मर्यादा भंग करने के प्रयास, वॉयूरिज्म, आपराधिक धमकी, साक्ष्य नष्ट करने और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के उल्लंघन से जुड़े मामलों में भी सजा सुनाई गई।
अदालत ने रेवन्ना पर ₹11.50 लाख से अधिक का जुर्माना भी लगाया, जिसमें से लगभग ₹11.25 लाख पीड़िता को मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया गया।
अपील और सुरक्षा विवाद
रेवन्ना ने अपनी दोषसिद्धि और सजा को कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। हालाँकि, दिसंबर 2025 में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सजा पर रोक लगाने और जमानत देने की उनकी याचिका खारिज कर दी — अदालत ने अपराध की गंभीरता और लंबित मामलों को आधार बनाया।
जांच और सुनवाई के दौरान पीड़ितों और गवाहों को कथित तौर पर धमकियाँ मिलीं, जिसके चलते अदालत को पुलिस सुरक्षा के निर्देश देने पड़े। इसके अलावा रेवन्ना की हाई-सिक्योरिटी जेल सेल से मोबाइल फोन और पेन ड्राइव जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं की बरामदगी ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। इस हाई-प्रोफाइल मामले की सफल जांच के लिए तीनों अधिकारियों को केंद्र सरकार द्वारा सम्मानित किया जाना, भविष्य की संवेदनशील जांचों के लिए एक मजबूत संदेश है।