1 नवंबर 2026
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बिलासपुर बैंक लोन घोटाला: ईओडब्ल्यू-एसीबी ने ₹5 करोड़ की धोखाधड़ी में दो आरोपियों पर चालान पेश किया

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बिलासपुर बैंक लोन घोटाला: ईओडब्ल्यू-एसीबी ने ₹5 करोड़ की धोखाधड़ी में दो आरोपियों पर चालान पेश किया

सारांश

बिलासपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा की एक शाखा से ₹5 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी का मामला अब अदालत तक पहुँचा। 11 फर्जी फर्में, फर्जी दस्तावेज और बैंक अधिकारी की मिलीभगत — ईओडब्ल्यू-एसीबी ने जाँच पूरी कर दो आरोपियों के खिलाफ चालान दाखिल किया।

मुख्य बातें

ईओडब्ल्यू-एसीबी ने 30 अक्टूबर 2026 को बिलासपुर विशेष न्यायालय में चालान क्रमांक 84/2026 दाखिल किया।
आरोपी राहुल कुमार सिन्हा (तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक) और विश्वजीत भौमिक पर 11 फर्जी फर्मों के नाम लोन स्वीकृत कराने का आरोप।
बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर शाखा को ₹5 करोड़ 4 लाख 15 हजार की आर्थिक क्षति हुई।
जाँच में तीन फर्मों के पंजीयन प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए; किसी भी फर्म की वास्तविक व्यावसायिक इकाई नहीं मिली।
सभी 11 ऋण खाते वर्ष 2019 में ही एनपीए हो गए थे; ऋण राशि का अंतिम लाभार्थी विश्वजीत भौमिक पाया गया।
दोनों आरोपियों पर धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज।

बिलासपुर में बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर शाखा से जुड़े ₹5 करोड़ 4 लाख 15 हजार के फर्जी लोन घोटाले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ईओडब्ल्यू-एसीबी) ने 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय में चालान दाखिल किया। तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और एजेंट विश्वजीत भौमिक के विरुद्ध चालान क्रमांक 84/2026 प्रस्तुत किया गया है।

मुख्य घटनाक्रम

ईओडब्ल्यू-एसीबी के अनुसार, दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर 11 फर्जी फर्मों के नाम पर बैंक से कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट, बैंक गारंटी और टर्म लोन सहित विभिन्न ऋण सुविधाएँ स्वीकृत कराईं। जाँच पूरी होने के बाद विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर में यह चालान दाखिल किया गया।

जाँच में सामने आया कि सभी 11 ऋण खाते वर्ष 2019 में ही अनर्जक आस्तियों (एनपीए) में तब्दील हो गए थे, जिससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

आरोपियों की भूमिका

जाँच एजेंसी के मुताबिक, विश्वजीत भौमिक जरहाभाठा स्थित उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय के माध्यम से लोगों को ऋण दिलाने का काम करता था। इस दौरान वह लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी और संपत्ति संबंधी दस्तावेज हासिल करता था। आरोप है कि इन्हीं दस्तावेजों का उपयोग कर संबंधित व्यक्तियों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी फर्में पंजीकृत कराई गईं।

वहीं, तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा पर बैंक के नियमों की अनदेखी कर इन 11 फर्मों को ऋण स्वीकृत करने और जानबूझकर गलत निरीक्षण रिपोर्ट तैयार करने का आरोप है। जाँच में तीन फर्मों के दुकान एवं स्थापना पंजीयन प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए।

धन का दुरुपयोग

जाँच एजेंसी के अनुसार, ऋण की राशि फर्मों के कारोबार में लगाने के बजाय अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर निकाल ली गई। इस पूरे षड्यंत्र का अंतिम लाभार्थी विश्वजीत भौमिक को पाया गया। बैंक के निरीक्षण में किसी भी फर्म की वास्तविक व्यावसायिक इकाई का अस्तित्व नहीं मिला, जो इस घोटाले की सुनियोजित प्रकृति को उजागर करता है।

कानूनी कार्रवाई

दोनों आरोपियों के विरुद्ध धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया है। यह मामला इस बात का उदाहरण है कि किस तरह बैंकिंग प्रणाली में अंदरूनी मिलीभगत से बड़े पैमाने पर वित्तीय अपराध को अंजाम दिया जा सकता है।

आगे क्या होगा

चालान दाखिल होने के बाद अब मामला विशेष न्यायालय में सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा। ईओडब्ल्यू-एसीबी की जाँच यह भी स्थापित करती है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक से ऋण स्वीकृत करने की यह प्रक्रिया वर्षों तक अनदेखी रही। न्यायालय में आरोप सिद्ध होने पर दोनों आरोपियों को कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी जाँच और चालान तक पहुँचने में वर्षों लग गए — यह विलंब स्वयं में एक प्रश्न है। माइक्रो फाइनेंस संस्थाओं के माध्यम से आम नागरिकों के दस्तावेजों के दुरुपयोग की यह पद्धति छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं है; यह एक राष्ट्रीय समस्या है जिस पर नियामकीय कसाव की दरकार है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिलासपुर बैंक लोन घोटाला क्या है?
यह बैंक ऑफ बड़ौदा की राजकिशोर नगर शाखा, बिलासपुर से जुड़ा ₹5 करोड़ 4 लाख 15 हजार का फर्जी ऋण मामला है, जिसमें 11 काल्पनिक फर्मों के नाम पर कैश क्रेडिट, ओवरड्राफ्ट और टर्म लोन स्वीकृत कराए गए। ईओडब्ल्यू-एसीबी ने जाँच पूरी कर 30 अक्टूबर 2026 को विशेष न्यायालय में चालान दाखिल किया।
इस मामले में किन लोगों पर चालान पेश किया गया है?
तत्कालीन वरिष्ठ शाखा प्रबंधक राहुल कुमार सिन्हा और उड़ान माइक्रो फाइनेंस से जुड़े विश्वजीत भौमिक के विरुद्ध चालान क्रमांक 84/2026 प्रस्तुत किया गया है। दोनों पर धोखाधड़ी, कूटरचना, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ लगाई गई हैं।
विश्वजीत भौमिक ने घोटाले को कैसे अंजाम दिया?
विश्वजीत भौमिक उड़ान माइक्रो फाइनेंस कार्यालय के माध्यम से लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड, केवाईसी और संपत्ति दस्तावेज एकत्र करता था। इन्हीं दस्तावेजों से संबंधित व्यक्तियों की जानकारी के बिना उनके नाम पर फर्जी फर्में बनाकर बैंक से ऋण लिया गया और राशि अंततः उसके पास पहुँची।
बैंक ऑफ बड़ौदा को कितना नुकसान हुआ और ऋण राशि कहाँ गई?
बैंक को कुल ₹5 करोड़ 4 लाख 15 हजार की आर्थिक क्षति हुई। जाँच के अनुसार ऋण की राशि फर्मों के व्यापार में लगाने के बजाय अलग-अलग खातों में स्थानांतरित कर निकाल ली गई; सभी 11 ऋण खाते वर्ष 2019 में ही एनपीए हो गए थे।
अब मामला आगे कहाँ जाएगा?
चालान दाखिल होने के बाद मामला विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), बिलासपुर में सुनवाई के लिए आगे बढ़ेगा। आरोप सिद्ध होने पर दोनों आरोपियों को संबंधित धाराओं के तहत कठोर दंड का सामना करना पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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