27 अगस्त 2026
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सीबीआई ने पोस्ट ऑफिस सेविंग्स फ्रॉड में फरार ब्रांच पोस्ट मास्टर को बरगढ़ से दबोचा, ₹13.98 लाख के गबन का आरोप

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सीबीआई ने पोस्ट ऑफिस सेविंग्स फ्रॉड में फरार ब्रांच पोस्ट मास्टर को बरगढ़ से दबोचा, ₹13.98 लाख के गबन का आरोप

सारांश

सीबीआई ने पोस्ट ऑफिस सेविंग्स फ्रॉड में ₹13.98 लाख के गबन की आरोपी फरार ब्रांच पोस्ट मास्टर शब्दा स्वैन को ओडिशा के बरगढ़ से दबोचा — 2015 में आरोप तय होने के बाद से फरार थीं। इसी हफ्ते दिल्ली से भी बैंक धोखाधड़ी के दो फरार आरोपी गिरफ्तार।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 27 अगस्त 2026 को ओडिशा के बरगढ़ से फरार ब्रांच पोस्ट मास्टर शब्दा स्वैन को गिरफ्तार किया।
आरोप है कि स्वैन ने 2008 से 2014 के बीच बोंडा पोस्ट ऑफिस में ₹13,98,232 का गबन किया और पासबुक में फर्जी एंट्री की।
31 दिसंबर 2015 को आरोप तय होने के बाद से फरार थीं; 2022 में गैर-जमानती वारंट जारी हुआ था।
नई दिल्ली से भी सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी के दो अलग मामलों में जितेंद्र कुमार ( 17 वर्ष से फरार, ₹65.90 लाख की धोखाधड़ी) और पूजा पाहवा ( 4 वर्ष से फरार, ₹10.16 करोड़ की धोखाधड़ी) को गिरफ्तार किया।
तीनों आरोपियों को संबंधित सक्षम अदालतों के समक्ष पेश किया जा रहा है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 27 अगस्त 2026 को ओडिशा के बरगढ़ से पोस्ट ऑफिस सेविंग्स फ्रॉड मामले में एक फरार आरोपी को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान शब्दा स्वैन के रूप में हुई है, जो 2008 से 2014 के बीच ओडिशा के बोंडा पोस्ट ऑफिस में ब्रांच पोस्ट मास्टर के पद पर तैनात थीं। आरोप है कि उन्होंने इस अवधि में जमाकर्ताओं की राशि में से ₹13,98,232 रुपए का गबन किया।

मुख्य घटनाक्रम

जांच एजेंसी के अनुसार, शब्दा स्वैन ने पासबुक में फर्जी एंट्री कर जमाकर्ताओं से एकत्र की गई राशि को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया, जिससे यह घोटाला वर्षों तक छिपा रहा। 31 दिसंबर 2015 को सीबीआई के केस नंबर आरसी 17(ए)/2014-बीबीएस में आरोप तय होने के बाद से वह फरार थीं। 2022 में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) जारी किया गया था।

सीबीआई की सतत निगरानी और खोजबीन के बाद आरोपी को बरगढ़ में एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के दौरान पकड़ा गया। उन्हें अब भुवनेश्वर की सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है।

नई दिल्ली से दो और गिरफ्तारियाँ

इसी सप्ताह बैंक धोखाधड़ी के अलग-अलग मामलों में सीबीआई ने नई दिल्ली से दो और घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया। पहले आरोपी जितेंद्र कुमार पर 2002-03 में जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से फर्जी वेतन प्रमाणपत्रों के आधार पर होम लोन लेने का आरोप है, जिससे संस्था को ₹65.90 लाख का नुकसान हुआ। ऋण वितरण के तुरंत बाद ही संबंधित खाता एनपीए घोषित हो गया था। जितेंद्र कुमार करीब 17 वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर थे।

दूसरी आरोपी पूजा पाहवा पर इंडियन ओवरसीज बैंक से प्राप्त कैश क्रेडिट सुविधा के दुरुपयोग और धन की हेराफेरी का आरोप है। जांच के अनुसार, फर्जी और जाली दस्तावेजों के आधार पर यह सुविधा हासिल की गई, जिससे बैंक को ₹10.16 करोड़ का नुकसान हुआ। संबंधित खाता 2012 में एनपीए घोषित हुआ था और पूजा पाहवा करीब 4 वर्षों से फरार थीं।

आम जनता पर असर

यह मामला इस बात की याद दिलाता है कि डाक विभाग की बचत योजनाओं में आम नागरिकों का भरोसा किस तरह दांव पर लग सकता है। बोंडा जैसे छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्ट ऑफिस बचत खाता अक्सर निम्न-आय परिवारों की एकमात्र वित्तीय जमापूंजी होती है। ऐसे में ब्रांच स्तर पर गबन का असर सीधे उन जमाकर्ताओं पर पड़ता है जो लंबे समय तक अपनी राशि की वापसी के लिए संघर्ष करते हैं।

क्या होगा आगे

तीनों आरोपियों को संबंधित अदालतों के समक्ष पेश किया जा रहा है। सीबीआई के अनुसार इन मामलों में आगे की जांच और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई भी की जा सकती है। गौरतलब है कि सीबीआई की यह कार्रवाई लंबे समय से फरार आरोपियों के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए इस स्तर पर धोखाधड़ी की सामाजिक कीमत आँकड़ों से कहीं अधिक है। सीबीआई की इस त्रिस्तरीय कार्रवाई — ओडिशा और दिल्ली में एक साथ — यह संकेत देती है कि एजेंसी पुराने लंबित मामलों को सक्रिय रूप से बंद करने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि पीड़ित जमाकर्ताओं को उनकी राशि वापस मिलने की कोई ठोस व्यवस्था है या नहीं।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शब्दा स्वैन पर क्या आरोप हैं और उन्हें कहाँ से गिरफ्तार किया गया?
शब्दा स्वैन पर आरोप है कि उन्होंने 2008 से 2014 के बीच ओडिशा के बोंडा पोस्ट ऑफिस में ब्रांच पोस्ट मास्टर रहते हुए जमाकर्ताओं की ₹13,98,232 की राशि का गबन किया और पासबुक में फर्जी एंट्री कर इसे छिपाया। उन्हें 27 अगस्त 2026 को ओडिशा के बरगढ़ में एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान गिरफ्तार किया गया।
शब्दा स्वैन कितने समय से फरार थीं?
31 दिसंबर 2015 को आरोप तय होने के बाद से शब्दा स्वैन फरार थीं। 2022 में उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था, यानी वह करीब एक दशक से अधिक समय तक कानून की पकड़ से बाहर रहीं।
नई दिल्ली में किन दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और उन पर क्या आरोप हैं?
नई दिल्ली से जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा को गिरफ्तार किया गया। जितेंद्र कुमार पर जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से फर्जी वेतन प्रमाणपत्रों के आधार पर होम लोन लेकर ₹65.90 लाख की धोखाधड़ी का आरोप है, जबकि पूजा पाहवा पर इंडियन ओवरसीज बैंक से कैश क्रेडिट सुविधा के दुरुपयोग से ₹10.16 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है।
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स फ्रॉड में जमाकर्ताओं की राशि का क्या होगा?
फिलहाल तीनों आरोपियों को संबंधित अदालतों के समक्ष पेश किया जा रहा है। जमाकर्ताओं की राशि की वसूली अदालती प्रक्रिया और संपत्ति कुर्की की कार्रवाई पर निर्भर करेगी, जिसकी संभावना सीबीआई जांच के अगले चरण में है।
सीबीआई ने इन फरार आरोपियों को कैसे पकड़ा?
सीबीआई ने लगातार निगरानी और खोजबीन के बाद शब्दा स्वैन को बरगढ़ में एक पारिवारिक कार्यक्रम के दौरान पकड़ा। नई दिल्ली में जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा की गिरफ्तारी भी एजेंसी के चल रहे फरार आरोपी-विरोधी अभियान का हिस्सा बताई जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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