20 अगस्त 2026
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सीबीआई ने संसद में नौकरी के नाम पर ₹50,000 की ठगी करने वाले घोषित अपराधी को लुधियाना से किया गिरफ्तार

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सीबीआई ने संसद में नौकरी के नाम पर ₹50,000 की ठगी करने वाले घोषित अपराधी को लुधियाना से किया गिरफ्तार

सारांश

2009 में संसद में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ₹50,000 ठगने वाला जितेंद्र पाठक 17 साल बाद लुधियाना से सीबीआई की गिरफ्त में आया। ट्रायल कोर्ट ने 2016 में उसे घोषित अपराधी करार दिया था। उसी दिन पानीपत में एक डीजीएफटी अधिकारी भी ₹30,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 20 अगस्त 2026 को पंजाब के लुधियाना से घोषित अपराधी जितेंद्र पाठक को गिरफ्तार किया।
पाठक पर 2009 में लोकसभा सचिवालय का कर्मचारी बनकर एक युवक से ₹50,000 की ठगी का आरोप है।
एफआईआर 13 जुलाई 2009 को दर्ज हुई; चार्जशीट दिसंबर 2009 में दाखिल; ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2016 को 'घोषित अपराधी' घोषित किया।
सीबीआई ने तकनीकी विश्लेषण के ज़रिए एफआईआर के लगभग 17 वर्ष बाद आरोपी को दबोचा।
अलग मामले में हरियाणा के पानीपत में असिस्टेंट डीजीएफटी अधिकारी को ₹30,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 20 अगस्त 2026 को पंजाब के लुधियाना से एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया, जो 2009 में लोकसभा सचिवालय का कर्मचारी बनकर एक युवक से संसद में नौकरी दिलाने के नाम पर ₹50,000 की धोखाधड़ी करने के मामले में वर्षों से फरार था। ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2016 को आरोपी जितेंद्र पाठक को 'घोषित अपराधी' करार दिया था, और तब से वह कानून की पकड़ से बाहर था।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई ने 13 जुलाई 2009 को जितेंद्र पाठक और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि पाठक ने खुद को लोकसभा सचिवालय का कर्मचारी बताकर एक निजी व्यक्ति से संसद में नौकरी दिलाने का वादा कर ₹50,000 की रिश्वत ली। जांच पूरी होने के बाद एक अन्य आरोपी के साथ पाठक के खिलाफ दिसंबर 2009 में चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन वह कभी अदालत में पेश नहीं हुआ।

वर्षों तक चली तलाश

सीबीआई के अनुसार, ट्रायल के दौरान आरोपी का पता लगाने के लिए लगातार और सघन प्रयास किए गए, परंतु उसका कोई सुराग नहीं मिला। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2016 को पाठक को 'घोषित अपराधी' घोषित किया। गौरतलब है कि एफआईआर दर्ज होने के लगभग सात वर्ष बाद यह कदम उठाया गया था।

तकनीकी ऑपरेशन से हुई गिरफ्तारी

सीबीआई ने बताया कि फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान मिली सूचना से पता चला कि पाठक लुधियाना में छिपा हुआ था। एजेंसी ने तकनीकी विश्लेषण की सहायता से एक सटीक अभियान चलाया और बुधवार को उसे सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी एफआईआर दर्ज होने के लगभग 17 वर्ष बाद हुई।

पानीपत में भी सीबीआई की कार्रवाई

एक अलग मामले में सीबीआई ने उसी दिन हरियाणा के पानीपत स्थित जॉइंट डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) के कार्यालय में एक असिस्टेंट डीजीएफटी अधिकारी को रिश्वतखोरी के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि अधिकारी ने शिकायतकर्ता के क्लाइंट से जुड़ी एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) ऑथराइजेशन फाइल की कमियों को दूर करने और उसे प्रोसेस करने के बदले ₹30,000 की रिश्वत मांगी थी। सीबीआई ने जाल बिछाकर अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ा।

आगे क्या होगा

घोषित अपराधी जितेंद्र पाठक को अब ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा, जहाँ लंबित मुकदमे की कार्यवाही फिर से शुरू होने की संभावना है। पानीपत में गिरफ्तार असिस्टेंट डीजीएफटी के खिलाफ भी विभागीय और न्यायिक कार्रवाई अपेक्षित है। दोनों मामले सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की चल रही मुहिम का हिस्सा हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह मामला यह भी दर्शाता है कि फरार आरोपियों को ट्रेस करने की प्रणाली में संरचनात्मक खामियाँ हैं। पानीपत में डीजीएफटी अधिकारी की रंगे हाथों गिरफ्तारी बताती है कि सरकारी फाइलों को 'प्रोसेस' करने के नाम पर रिश्वतखोरी की संस्कृति अभी भी जड़ें जमाए है। दोनों मामले मिलकर एक बड़े सत्य को रेखांकित करते हैं — भ्रष्टाचार विरोधी तंत्र की धार तभी पैनी होती है जब पकड़ तेज़ और सज़ा त्वरित हो।
RashtraPress
20 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जितेंद्र पाठक को किस मामले में गिरफ्तार किया गया है?
जितेंद्र पाठक को 2009 में लोकसभा सचिवालय का कर्मचारी बनकर एक युवक से संसद में नौकरी दिलाने के नाम पर ₹50,000 की धोखाधड़ी करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई ने 13 जुलाई 2009 को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी।
पाठक को 'घोषित अपराधी' कब और क्यों घोषित किया गया था?
ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2016 को पाठक को 'घोषित अपराधी' करार दिया, क्योंकि दिसंबर 2009 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी वह कभी अदालत में पेश नहीं हुआ और तमाम प्रयासों के बावजूद उसका पता नहीं चल सका।
सीबीआई ने पाठक को कैसे पकड़ा?
सीबीआई ने फील्ड वेरिफिकेशन और तकनीकी विश्लेषण की मदद से पता लगाया कि पाठक पंजाब के लुधियाना में छिपा हुआ था। इसके बाद एक सटीक ऑपरेशन चलाकर 20 अगस्त 2026 को उसे गिरफ्तार किया गया।
पानीपत में डीजीएफटी अधिकारी पर क्या आरोप है?
हरियाणा के पानीपत में जॉइंट डीजीएफटी कार्यालय के असिस्टेंट डीजीएफटी अधिकारी पर आरोप है कि उसने शिकायतकर्ता के क्लाइंट की ईपीसीजी ऑथराइजेशन फाइल प्रोसेस करने के बदले ₹30,000 की रिश्वत मांगी। सीबीआई ने जाल बिछाकर उसे रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा।
इन गिरफ्तारियों के बाद आगे क्या होगा?
जितेंद्र पाठक को ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा, जहाँ लंबित मुकदमे की कार्यवाही फिर से शुरू होगी। पानीपत में गिरफ्तार डीजीएफटी अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच और न्यायिक कार्रवाई अपेक्षित है।
राष्ट्र प्रेस
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