सीबीआई ने संसद में नौकरी के नाम पर ₹50,000 की ठगी करने वाले घोषित अपराधी को लुधियाना से किया गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 20 अगस्त 2026 को पंजाब के लुधियाना से एक घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया, जो 2009 में लोकसभा सचिवालय का कर्मचारी बनकर एक युवक से संसद में नौकरी दिलाने के नाम पर ₹50,000 की धोखाधड़ी करने के मामले में वर्षों से फरार था। ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2016 को आरोपी जितेंद्र पाठक को 'घोषित अपराधी' करार दिया था, और तब से वह कानून की पकड़ से बाहर था।
मामले की पृष्ठभूमि
सीबीआई ने 13 जुलाई 2009 को जितेंद्र पाठक और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोप था कि पाठक ने खुद को लोकसभा सचिवालय का कर्मचारी बताकर एक निजी व्यक्ति से संसद में नौकरी दिलाने का वादा कर ₹50,000 की रिश्वत ली। जांच पूरी होने के बाद एक अन्य आरोपी के साथ पाठक के खिलाफ दिसंबर 2009 में चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन वह कभी अदालत में पेश नहीं हुआ।
वर्षों तक चली तलाश
सीबीआई के अनुसार, ट्रायल के दौरान आरोपी का पता लगाने के लिए लगातार और सघन प्रयास किए गए, परंतु उसका कोई सुराग नहीं मिला। सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ट्रायल कोर्ट ने 28 सितंबर 2016 को पाठक को 'घोषित अपराधी' घोषित किया। गौरतलब है कि एफआईआर दर्ज होने के लगभग सात वर्ष बाद यह कदम उठाया गया था।
तकनीकी ऑपरेशन से हुई गिरफ्तारी
सीबीआई ने बताया कि फील्ड वेरिफिकेशन के दौरान मिली सूचना से पता चला कि पाठक लुधियाना में छिपा हुआ था। एजेंसी ने तकनीकी विश्लेषण की सहायता से एक सटीक अभियान चलाया और बुधवार को उसे सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी एफआईआर दर्ज होने के लगभग 17 वर्ष बाद हुई।
पानीपत में भी सीबीआई की कार्रवाई
एक अलग मामले में सीबीआई ने उसी दिन हरियाणा के पानीपत स्थित जॉइंट डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) के कार्यालय में एक असिस्टेंट डीजीएफटी अधिकारी को रिश्वतखोरी के आरोप में रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि अधिकारी ने शिकायतकर्ता के क्लाइंट से जुड़ी एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल गुड्स (ईपीसीजी) ऑथराइजेशन फाइल की कमियों को दूर करने और उसे प्रोसेस करने के बदले ₹30,000 की रिश्वत मांगी थी। सीबीआई ने जाल बिछाकर अधिकारी को रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
आगे क्या होगा
घोषित अपराधी जितेंद्र पाठक को अब ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश किया जाएगा, जहाँ लंबित मुकदमे की कार्यवाही फिर से शुरू होने की संभावना है। पानीपत में गिरफ्तार असिस्टेंट डीजीएफटी के खिलाफ भी विभागीय और न्यायिक कार्रवाई अपेक्षित है। दोनों मामले सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की चल रही मुहिम का हिस्सा हैं।