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सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी में 17 और 4 साल से फरार दो घोषित अपराधियों को दबोचा

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सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी में 17 और 4 साल से फरार दो घोषित अपराधियों को दबोचा

सारांश

17 साल और 4 साल की फरारी — सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी के दो पुराने मामलों में जितेंद्र कुमार को दिल्ली के द्वारका मोड़ और पूजा पाहवा को लुधियाना से दबोचा। दोनों मामलों में बैंकों को ₹10 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ था।

मुख्य बातें

सीबीआई ने बैंक धोखाधड़ी के दो अलग मामलों में जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा को गिरफ्तार किया।
जितेंद्र कुमार 17 वर्षों से फरार था; जनवरी 2013 में घोषित अपराधी घोषित किया गया था; नई दिल्ली के द्वारका मोड़ से गिरफ्तार।
जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड के मामले में जाली वेतन प्रमाणपत्रों से ₹65.90 लाख की धोखाधड़ी का आरोप।
पूजा पाहवा 4 वर्षों से फरार थी; वर्ष 2023 में घोषित अपराधी करार; 4 अगस्त को लुधियाना, पंजाब से गिरफ्तार।
इंडियन ओवरसीज बैंक मामले में फर्जी दस्तावेजों से ₹10.16 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप; 4 बैंक अधिकारियों पर भी पूरक आरोपपत्र।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक धोखाधड़ी के दो अलग-अलग मामलों में वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर चल रहे दो घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा के रूप में हुई है, जो क्रमशः 17 वर्ष और 4 वर्ष से न्यायालय की नज़रों से ओझल थे। यह कार्रवाई आर्थिक अपराधों के खिलाफ सीबीआई के चल रहे विशेष अभियान का हिस्सा है।

जितेंद्र कुमार का मामला: 17 साल की फरारी का अंत

सीबीआई के अनुसार, जितेंद्र कुमार वर्ष 2002-03 में जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से फर्जी और जाली वेतन प्रमाणपत्रों के आधार पर होम लोन हासिल करने के मामले में आरोपी है। इस धोखाधड़ी से वित्तीय संस्था को कथित तौर पर ₹65.90 लाख का नुकसान उठाना पड़ा था। ऋण वितरण के तुरंत बाद ही संबंधित खाता एनपीए घोषित हो गया था।

वर्ष 2006 में जितेंद्र कुमार सहित 19 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। आरोपी ने 2009 से न्यायालय में उपस्थित होना बंद कर दिया और जनवरी 2013 में उसे घोषित अपराधी करार दिया गया। सीबीआई ने लगातार खुफिया अभियान चलाने के बाद उसे नई दिल्ली के द्वारका मोड़ क्षेत्र से गिरफ्तार किया। उसे आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा।

पूजा पाहवा का मामला: इंडियन ओवरसीज बैंक से ₹10.16 करोड़ की धोखाधड़ी

पूजा पाहवा पर इंडियन ओवरसीज बैंक से प्राप्त कैश क्रेडिट सुविधा के दुरुपयोग और धन की हेराफेरी का आरोप है। जाँच में सामने आया कि फर्जी और जाली दस्तावेजों के आधार पर यह सुविधा हासिल की गई, जिससे बैंक को ₹10.16 करोड़ का नुकसान हुआ। संबंधित खाता वर्ष 2012 में एनपीए घोषित किया गया था।

सीबीआई ने वर्ष 2017 में पूजा पाहवा सहित छह आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था। बाद में चार बैंक अधिकारियों के खिलाफ भी पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया, जिन पर लाभार्थी कंपनी और अन्य आरोपियों के साथ साजिश रचने का आरोप है। पूजा पाहवा वर्ष 2022 से अदालत में पेश नहीं हुई थी और वर्ष 2023 में उसे घोषित अपराधी करार दिया गया था।

गिरफ्तारी कैसे हुई

सीबीआई ने लगातार खुफिया जानकारी जुटाने और विशेष अभियान चलाने के बाद पूजा पाहवा को 4 अगस्त को पंजाब के लुधियाना से गिरफ्तार किया। वर्तमान में वह न्यायिक हिरासत में है। गौरतलब है कि दोनों गिरफ्तारियाँ सीबीआई के उस व्यापक अभियान का हिस्सा हैं, जिसके तहत एजेंसी देशभर में फरार आर्थिक अपराधियों की तलाश कर रही है।

सीबीआई की प्राथमिकता और आगे की कार्रवाई

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक अपराधों में शामिल आरोपियों को कानून के दायरे में लाना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने दोहराया कि बैंक धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब देश में बैंक एनपीए और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों पर न्यायिक और नियामक दबाव लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में दोनों आरोपियों को संबंधित विशेष न्यायालयों के समक्ष पेश किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि न्यायालय में दोषसिद्धि की दर क्या रहती है — जो आर्थिक अपराध मामलों में ऐतिहासिक रूप से कमज़ोर रही है।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने किन दो घोषित अपराधियों को गिरफ्तार किया है?
सीबीआई ने जितेंद्र कुमार और पूजा पाहवा को गिरफ्तार किया है, जो बैंक धोखाधड़ी के अलग-अलग मामलों में क्रमशः 17 वर्ष और 4 वर्ष से फरार थे। जितेंद्र कुमार को नई दिल्ली के द्वारका मोड़ से और पूजा पाहवा को लुधियाना, पंजाब से पकड़ा गया।
जितेंद्र कुमार पर क्या आरोप हैं?
जितेंद्र कुमार पर वर्ष 2002-03 में जीआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से जाली वेतन प्रमाणपत्रों के आधार पर होम लोन लेकर ₹65.90 लाख की धोखाधड़ी करने का आरोप है। वर्ष 2006 में उसके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ था और 2013 में उसे घोषित अपराधी करार दिया गया था।
पूजा पाहवा के मामले में बैंक को कितना नुकसान हुआ?
पूजा पाहवा पर इंडियन ओवरसीज बैंक से कैश क्रेडिट सुविधा के दुरुपयोग के ज़रिए ₹10.16 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप है। संबंधित खाता वर्ष 2012 में एनपीए घोषित हो गया था।
पूजा पाहवा के मामले में बैंक अधिकारियों की क्या भूमिका बताई गई है?
सीबीआई ने चार बैंक अधिकारियों के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है, जिन पर लाभार्थी कंपनी और अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रचने का आरोप है। यह दर्शाता है कि कथित तौर पर धोखाधड़ी में भीतरी मिलीभगत भी शामिल थी।
अब दोनों आरोपियों के साथ आगे क्या होगा?
जितेंद्र कुमार को सक्षम न्यायालय में पेश किया जाएगा, जबकि पूजा पाहवा वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है। दोनों मामलों में आगे की कानूनी कार्रवाई संबंधित विशेष न्यायालयों में चलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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