इंडिया गठबंधन की 1 नवंबर रैली पर सियासी घमासान: AIMIM बोली- हम शामिल नहीं, BJP ने विपक्ष को घेरा
सारांश
मुख्य बातें
इंडिया गठबंधन की 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने स्पष्ट किया है कि वह इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है और उसे रैली का निमंत्रण भी नहीं मिला, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने इस आयोजन को सत्ता की बेचैनी करार दिया। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद ने रैली को ऐतिहासिक बताते हुए देशभर से भागीदारी का दावा किया।
AIMIM का स्पष्ट इनकार
मुंबई में AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा कि उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन का हिस्सा नहीं है और उन्हें रैली का कोई निमंत्रण नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के नेता अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि AIMIM की अपनी स्वतंत्र राजनीतिक स्थिति है।
हालाँकि पठान ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी शुरू से ही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का विरोध करती रही है। उन्होंने बताया कि AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष ने बिहार में SIR के दौरान सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी SIR के विरुद्ध याचिका दाखिल की है।
JDU और BJP का तंज
पटना में जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय महासचिव श्याम रजक ने विपक्षी दलों की तुलना मंच पर अभिनय करने वाले कलाकारों से करते हुए कहा कि ये लोग अलग-अलग प्रदर्शन कर जनता को आकर्षित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन जनता इनके झाँसे में नहीं आएगी। उन्होंने रैली में शामिल दलों को 'फ्लॉप फिल्म के फ्लॉप कलाकार' बताया।
केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि इस रैली से कांग्रेस को कोई राजनीतिक लाभ नहीं मिलेगा क्योंकि जनता पहले ही अपने मत के ज़रिये कांग्रेस को नकार चुकी है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पाने की बेचैनी में वे व्याकुल हो रहे हैं।
BJP सांसद रवि किशन ने दिल्ली में कांग्रेस पर व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और गरीबों की परेशानियाँ नज़रअंदाज़ करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद देश भ्रष्टाचार और बड़े घोटालों से बाहर निकला है, जिसका श्रेय उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। रवि किशन ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष संसद को सुचारु रूप से नहीं चलने देता और देश की प्रगति में बाधा डालता है।
TMC का दावा — रैली होगी बड़ी
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद सौगत रॉय ने कहा कि 1 नवंबर का आयोजन बहुत बड़ा होगा। उन्होंने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार के विरोध में देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग दिल्ली पहुँच रहे हैं। उनके बयान से स्पष्ट है कि इंडिया गठबंधन इस रैली के ज़रिये चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखना चाहता है।
कारोबारियों की चिंता
नई दिल्ली व्यापार संघ (NDTA) के अध्यक्ष अतुल भार्गव ने कहा कि पिछले दो महीनों में व्यापारियों को काफी नुकसान हो चुका है। उन्होंने बताया कि दीपावली के मौसम में बिक्री उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ी, जबकि व्यापारियों ने त्योहार को देखते हुए पहले से स्टॉक तैयार कर रखा था। भार्गव ने कहा कि अक्टूबर से फरवरी तक का समय आमतौर पर कारोबार के लिए सबसे अनुकूल रहता है, और रैली से बाज़ारों में खरीदारी प्रभावित होने की आशंका है। व्यापारियों ने माँग की थी कि दीपावली के बाद रैली आयोजित की जाए।
दिल्ली के मेयर का हमला
दिल्ली के महापौर प्रवेश वाही ने रैली को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में कथित घोटाले का हवाला देते हुए, साथ ही तंदूर मामले और 1984 के दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन घटनाओं को भुलाया नहीं जा सकता। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन SIR और चुनाव आयोग के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है।
यह रैली विपक्षी एकता की परीक्षा भी है — AIMIM जैसे दलों की अनुपस्थिति और सत्ताधारी गठबंधन के तीखे जवाब से साफ है कि 1 नवंबर का रामलीला मैदान सियासी दाँव-पेंच का अखाड़ा बनने वाला है।