वारिस पठान का बड़ा बयान: इंडिया गठबंधन मार्च से दूरी, पर दिल्ली में अवैध हिरासत और बर्बरता की निंदा
सारांश
मुख्य बातें
एआईएमआईएम (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 12 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इंडिया गठबंधन के मार्च का हिस्सा नहीं है, लेकिन साथ ही नई दिल्ली में पिछले दो दिनों से जारी कथित अवैध हिरासत, मेट्रो-ट्रांसपोर्ट बंदी और वकीलों पर बर्बरता की कड़ी निंदा की। यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्र सरकार ने जंतर-मंतर को विरोध-स्थल के रूप में डी-नोटिफाई कर दिया है और जेन-जी प्रदर्शनकारियों पर सख्ती जारी है।
मार्च से दूरी, पर सिद्धांत पर एकता
पठान ने साफ़ शब्दों में कहा, 'उनका मार्च है, हम इसका हिस्सा नहीं हैं।' उन्होंने बताया कि एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने एक दिन पहले आजमगढ़, उत्तर प्रदेश में एक खुले मंच से पार्टी का स्पष्ट रुख सामने रखा था। इसके बावजूद पठान ने जोड़ा कि दिल्ली में पत्रकारों को उठाकर ले जाना, ट्रांसपोर्ट बंद करना, मेट्रो बाधित करना और वकीलों के साथ कथित बर्बरता — ये सभी कदम अलोकतांत्रिक हैं और पार्टी इनकी निंदा करती है।
संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला
पठान ने संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लेख करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार हर नागरिक को मिला हुआ है और इसे कोई नहीं छीन सकता। उनके अनुसार, 'जिसे विरोध करना है, वह तो करेगा ही — यह उसका मौलिक अधिकार है।' उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई सरकार की नीतियों से असहमत है तो वह विरोध करता रहेगा, और यह उसका संवैधानिक हक है।
ओवैसी की पूर्व चेतावनी का संदर्भ
पठान ने याद दिलाया कि जब चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी कानून संसद में पारित हो रहा था, तब सदन के पटल पर खड़े होकर इसका पूर्ण विरोध करने वाले ओवैसी ही थे। उन्होंने तब इस कानून की खामियाँ गिनाई थीं और चेताया था कि इसके दूरगामी नकारात्मक परिणाम होंगे। पठान के अनुसार, 'आज वही हो रहा है।' यह बयान एआईएमआईएम के उस रुख को रेखांकित करता है जिसमें पार्टी विपक्षी गठबंधनों से स्वतंत्र रहते हुए संवैधानिक मुद्दों पर अपनी स्थिति बनाती है।
जंतर-मंतर डी-नोटिफिकेशन पर तीखी प्रतिक्रिया
केंद्र सरकार द्वारा जंतर-मंतर को विरोध-स्थल की सूची से हटाने और तीन वैकल्पिक स्थान देने पर पठान ने कहा कि 'सरकार पूरी तरह बौखलाई हुई है और घबरा चुकी है।' उनका कहना था कि जेन-जी प्रदर्शनकारियों के उत्साह को देख सरकार ने इस कदम से विरोध को मुख्यधारा से दूर करने की कोशिश की है। गौरतलब है कि जंतर-मंतर दशकों से भारत में संगठित नागरिक प्रतिरोध का प्रतीक रहा है।
राजनीतिक सशक्तिकरण और साझेदारी की अपील
पठान ने इस दौरान व्यापक राजनीतिक संदर्भ में बात करते हुए कहा कि एआईएमआईएम हिस्सेदारी, सम्मान, राजनीतिक सशक्तिकरण और न्याय की बात करती है। उन्होंने संभावित सहयोगियों से अपील की कि 'आइए साथ मिलकर लड़ते हैं।' यह बयान ऐसे समय पर आया है जब राष्ट्रीय राजनीति में विपक्षी एकता और पहचान-आधारित राजनीति को लेकर बहस तेज़ है।