9 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर खोलो: सीपीआई सांसद संदोष कुमार ने PM मोदी को लिखा पत्र, विरोध के संवैधानिक अधिकार की माँग

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जंतर-मंतर खोलो: सीपीआई सांसद संदोष कुमार ने PM मोदी को लिखा पत्र, विरोध के संवैधानिक अधिकार की माँग

सारांश

सीपीआई सांसद संदोष कुमार का PM मोदी को यह पत्र महज एक राजनीतिक शिकायत नहीं — यह संवैधानिक अधिकारों पर सीधी चुनौती है। जंतर-मंतर की बंदी, 47,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और ट्रेन रद्दीकरण के आरोपों के बीच विरोध के अधिकार बनाम राज्य की शक्ति का यह संघर्ष तीखा होता जा रहा है।

मुख्य बातें

सीपीआई सांसद संदोष कुमार पी.
ने 9 अक्टूबर 2026 को PM मोदी को पत्र लिखकर जंतर-मंतर खोलने की माँग की।
पत्र में दिल्ली में 47,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती का आरोप और इसे 'आपातकाल की स्थिति' बताया गया।
आरोप है कि कार्यकर्ताओं को 1,000 किलोमीटर से अधिक दूर गिरफ्तार किया जा रहा है और दिल्ली आने वाली ट्रेनें रद्द की जा रही हैं।
पत्र में सीईसी ज्ञानेश कुमार पर सर्वोच्च न्यायालय के कथित अवलोकनों का हवाला देते हुए इस्तीफे की माँग रखी गई।
संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए कहा गया कि शांतिपूर्ण सभा संवैधानिक गारंटी है, सरकारी विवेक का विषय नहीं।
केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राज्यसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के नेता संदोष कुमार पी. ने 9 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक औपचारिक पत्र लिखकर जंतर-मंतर को प्रदर्शनकारियों के लिए तत्काल खोलने और संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को बहाल करने की माँग की है। पत्र में सरकार पर आरोप लगाया गया है कि वह बैरिकेड्स, हिरासत और गिरफ्तारियों के ज़रिए लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबा रही है।

पत्र में क्या कहा गया

संदोष कुमार ने अपने पत्र में लिखा कि सरकार तक पहुँचने का हर रास्ता बैरिकेड्स और लाठियों से बंद किया जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि लोगों में वोट चोरी को लेकर भारी गुस्सा है और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के कथित तौर पर कई गलत काम सामने आ चुके हैं। पत्र में यह भी दावा किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अवलोकन में पुष्टि की है कि सीईसी ज्ञानेश कुमार ने असत्य कथन किए।

सीपीआई नेता ने लिखा, 'हम कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं, जनता के चुने हुए प्रतिनिधि हैं, इस देश के छात्र और युवा हैं। हमारी माँग है कि जंतर-मंतर तक पहुँचने की अनुमति दी जाए और भारत के चुनावी लोकतंत्र के पूरी तरह ध्वस्त होने तथा सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर शांतिपूर्ण विरोध किया जाए।'

दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

पत्र में दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था की तीखी आलोचना की गई है। संदोष कुमार के अनुसार, दिल्ली में अकेले 47,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और जंतर-मंतर तक पहुँचने की कोशिश करने पर बैरिकेड्स व पुलिस के दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला सांसदों को भी नहीं बख्शा गया और इस स्थिति को 'आपातकाल की स्थिति' करार दिया।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दलों और नागरिक समाज के तबकों की ओर से राजधानी में प्रदर्शन की अनुमति न मिलने की शिकायतें बढ़ रही हैं। गौरतलब है कि जंतर-मंतर दशकों से भारत में राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का केंद्र रहा है।

गिरफ्तारियों और ट्रेन रद्दीकरण का आरोप

सीपीआई सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं को दिल्ली से 1,000 किलोमीटर से अधिक दूर गिरफ्तार किया जा रहा है और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'दिल्ली को सैन्य छावनी में बदलने से हम नहीं डरेंगे। हम अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे।' इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।

संवैधानिक तर्क और प्रमुख माँगें

पत्र में संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते हुए रेखांकित किया गया कि शांतिपूर्ण सभा का अधिकार एक संवैधानिक गारंटी है, न कि सरकार के विवेक पर दिया जाने वाला विशेषाधिकार। संदोष कुमार ने प्रधानमंत्री से तीन तत्काल कदम उठाने की माँग की है — जंतर-मंतर और संबंधित मेट्रो स्टेशनों को खोला जाए, कार्यकर्ताओं की हिरासत तत्काल बंद हो और सरकार नागरिकों की बात सुने।

आगे क्या होगा

केंद्र सरकार की ओर से पत्र पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। विपक्षी दलों के तेवर देखते हुए आने वाले दिनों में संसद के अंदर और बाहर इस मुद्दे पर राजनीतिक गरमाहट बढ़ने की संभावना है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सर्वोच्च न्यायालय में इस विषय पर कोई याचिका दायर होती है या सरकार संवाद का रास्ता अपनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और ट्रेन रद्दीकरण जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि ज़रूरी है, क्योंकि बिना इसके ये दावे राजनीतिक आख्यान बन कर रह जाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या सरकार संवाद का रास्ता अपनाएगी या न्यायिक हस्तक्षेप का इंतज़ार करेगी — जो पहले भी प्रदर्शन-स्थलों को लेकर हो चुका है। जंतर-मंतर को लेकर यह विवाद असल में उस बड़े सवाल को उजागर करता है कि भारत में असहमति की राजनीतिक लागत क्या है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई सांसद संदोष कुमार ने PM मोदी को पत्र क्यों लिखा?
संदोष कुमार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शनकारियों के लिए खोलने और संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत शांतिपूर्ण सभा के अधिकार को बहाल करने की माँग के लिए यह पत्र लिखा। उन्होंने सरकार पर बैरिकेड्स, हिरासत और गिरफ्तारियों के ज़रिए विरोध की आवाज़ें दबाने का आरोप लगाया।
जंतर-मंतर पर प्रतिबंध का विरोध क्यों हो रहा है?
जंतर-मंतर दशकों से भारत में राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। विपक्षी दलों और नागरिक समाज का आरोप है कि इसे बंद कर लोकतांत्रिक असहमति को व्यावहारिक रूप से असंभव बनाया जा रहा है, जो संविधान की भावना के विरुद्ध है।
पत्र में सीईसी ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
पत्र में दावा किया गया है कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अवलोकन में पुष्टि की है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने असत्य कथन किए। संदोष कुमार ने इसी आधार पर उनके इस्तीफे की माँग की है, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है।
संदोष कुमार ने PM से कौन-सी तीन मुख्य माँगें रखी हैं?
सीपीआई सांसद ने प्रधानमंत्री से तीन तत्काल कदम माँगे हैं — पहला, जंतर-मंतर और संबंधित मेट्रो स्टेशनों को खोला जाए; दूसरा, कार्यकर्ताओं की हिरासत तत्काल बंद हो; और तीसरा, सरकार नागरिकों की बात सुने।
क्या केंद्र सरकार ने इस पत्र पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर इस विषय पर राजनीतिक गतिविधि बढ़ने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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