पप्पू यादव का बड़ा हमला: जंतर-मंतर हिरासत 'लोकतंत्र पर हमला', मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने 11 अक्टूबर 2026 को पटना स्थित अपने आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की हिरासत को 'लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा हमला' बताया और केंद्र सरकार की नीतियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में विपक्ष की आवाज़ को व्यवस्थित तरीके से दबाने की कोशिश हो रही है। उनके अनुसार, 'युवाओं की आवाज़ कुचलकर लोकतंत्र को मज़बूत नहीं किया जा सकता।'
जंतर-मंतर हिरासत पर तीखी प्रतिक्रिया
पप्पू यादव ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को पुलिस बल तथा प्रतिबंधों के ज़रिए आवाज़ रोकने की बजाय युवाओं और विपक्षी नेताओं की बात सुननी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान महिलाओं और मीडियाकर्मियों को भी अनावश्यक रूप से प्रभावित किया गया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त पर निशाना, इस्तीफे की माँग
निर्वाचन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सांसद ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधे कठघरे में खड़ा किया। मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे 'वोट चोरी' के आरोपों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखना लोकतंत्र की पहली शर्त है। उन्होंने माँग की कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने संबंधी हर शिकायत की निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए। पप्पू यादव ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की माँग का भी समर्थन किया।
युवाओं की बेरोज़गारी और पेपर लीक पर चिंता
सांसद ने कहा कि देश का युवा बेरोज़गारी, पेपर लीक और रोज़गार के सीमित अवसरों जैसी ज़मीनी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने चेन्नई में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं के बीच अपने भविष्य को लेकर गहरी बेचैनी है। उनके अनुसार युवाओं को केवल राजनीतिक नारों से संतुष्ट नहीं किया जा सकता — सरकार को रोज़गार और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों का ठोस जवाब देना होगा। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाए जाने का समर्थन किया।
आर्थिक और विदेश नीति पर सवाल
पप्पू यादव ने केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीति पर भी आपत्ति जताई। बढ़ते कर्ज़, महँगाई, बेरोज़गारी, चीन के साथ सीमा विवाद और अमेरिका के साथ संबंधों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार से राष्ट्रीय हितों पर स्पष्ट रुख अपनाने की माँग की। उन्होंने 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन का संदर्भ देते हुए कहा कि मौजूदा संघर्ष लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान की रक्षा से जुड़ा है।
विपक्षी एकजुटता की अपील
सांसद ने कहा कि संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्ष को एकजुट होकर आवाज़ उठानी चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब जंतर-मंतर हिरासत पर देशभर में राजनीतिक बहस तेज़ है और विपक्षी दलों में समन्वय को लेकर चर्चाएँ जारी हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और सड़क — दोनों मोर्चों पर और गर्म हो सकता है।