2 अक्टूबर 2026
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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग: 'आप' का 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग: 'आप' का 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन

सारांश

गांधी जयंती पर 'आप' ने जंतर-मंतर को चुना अपनी लड़ाई का मंच। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर SIR के ज़रिए 13.37 करोड़ वोटर नाम काटने का आरोप — पार्टी इसे वोट के अधिकार पर सीधा हमला बता रही है।

मुख्य बातें

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया।
राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया में कथित तौर पर 13 करोड़ 37 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।
पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग BJP के पक्ष में वोट प्रभावित कर रहा है — चुनाव आयोग की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुँचने की अपील की।
पार्टी ने प्रदर्शन को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखने और किसी भी अराजकता को तत्काल पुलिस के हवाले करने का आग्रह किया।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर, नई दिल्ली पर बड़े प्रदर्शन का आह्वान किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने देशभर के नागरिकों और युवाओं से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक अधिकार खतरे में पड़ सकते हैं।

नेताओं के आरोप और अपील

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री और 'आप' के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में मतदाता सूचियों से लोगों के नाम काटने और 'वोट चोरी' करने की जिम्मेदारी ले रखी है। सिसोदिया ने कहा कि वोट के अधिकार पर यदि अभी आवाज नहीं उठाई गई, तो भविष्य में अन्य नागरिक अधिकार भी प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने इस प्रदर्शन को लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का आंदोलन बताया।

एसआईआर विवाद और मतदाता सूची पर सवाल

'आप' के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि SIR की प्रक्रिया के तहत कथित तौर पर 13 करोड़ 37 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। संजय सिंह ने इसे चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला मामला बताते हुए चुनाव आयोग से जवाब माँगने की बात कही। उन्होंने महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर इस प्रदर्शन को लोकतंत्र के प्रति प्रतीकात्मक संकल्प भी करार दिया।

पार्टी का संगठनात्मक संदेश

'आप' के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में जेन-जी युवा और विभिन्न संस्थाओं के लोग बड़ी संख्या में भाग लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी सरकार को यह विश्वास हो जाए कि चुनाव प्रक्रिया में उसके पक्ष में हेरफेर हो सकती है, तो जनता के प्रति उसकी जवाबदेही कमज़ोर पड़ जाती है। भारद्वाज ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखने की अपील की और कहा कि अव्यवस्था फैलाने की कोशिश करने वालों को पुलिस के हवाले किया जाना चाहिए। उन्होंने भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी, किसानों और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी केंद्र सरकार को निशाने पर लिया।

विपक्ष की भूमिका और लोकतांत्रिक संदर्भ

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने कहा कि स्वतंत्र भारत में वोट का अधिकार लोकतंत्र की नींव है और कथित तौर पर BJP मुख्य चुनाव आयुक्त के माध्यम से इस अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने लोगों से सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुँचने का आग्रह किया। एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग BJP सरकार के दबाव में काम कर रहा है, हालाँकि इन आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह ऐसे समय में आया है जब देश में मतदाता सूची सुधार की प्रक्रिया को लेकर विभिन्न दलों में व्यापक असहमति है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि 'आप' का यह प्रदर्शन गांधी जयंती के दिन आयोजित किया गया, जो राजनीतिक दृष्टि से प्रतीकात्मक है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि इस आंदोलन को अन्य विपक्षी दलों का समर्थन मिलता है या नहीं, और क्या चुनाव आयोग SIR से जुड़े सवालों पर कोई स्पष्टीकरण जारी करता है। प्रदर्शन के बाद 'आप' के अगले कदम से यह भी स्पष्ट होगा कि पार्टी इस मुद्दे को केवल दिल्ली तक सीमित रखती है या राष्ट्रीय स्तर पर ले जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि SIR के तहत हटाए गए नामों के आँकड़े सत्यापन-योग्य हैं या नहीं — चुनाव आयोग ने अब तक इन दावों पर कोई सार्वजनिक सफाई नहीं दी है। 13.37 करोड़ नाम हटाने का आँकड़ा, यदि सही है, तो यह केवल 'आप' का मुद्दा नहीं रहता — यह राष्ट्रीय लोकतांत्रिक विमर्श का विषय बन जाता है। मुख्यधारा की कवरेज इस विरोधाभास को नज़रअंदाज़ करती है कि एक तरफ 'आप' खुद दिल्ली चुनाव हार चुकी है और दूसरी तरफ वह चुनाव आयोग की प्रक्रिया को जिम्मेदार ठहरा रही है — इस दावे की विश्वसनीयता के लिए स्वतंत्र तथ्य-जाँच जरूरी है।
RashtraPress
2 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'आप' जंतर-मंतर पर प्रदर्शन क्यों कर रही है?
आम आदमी पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। पार्टी का आरोप है कि मतदाता सूची के SIR पुनरीक्षण में करोड़ों नाम काटकर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया गया है।
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण क्या है?
SIR (Special Intensive Revision) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों की समय-समय पर समीक्षा की प्रक्रिया है, जिसमें अपात्र, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। 'आप' ने दावा किया है कि इस बार इस प्रक्रिया में कथित तौर पर 13 करोड़ 37 लाख नाम हटाए गए, जो उनके अनुसार अनुचित और राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
मनीष सिसोदिया और अन्य 'आप' नेताओं ने कथित तौर पर आरोप लगाया है कि ज्ञानेश कुमार BJP के पक्ष में मतदाता सूचियों से नाम हटाने और वोट प्रक्रिया प्रभावित करने में भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी आरोप राजनीतिक हैं और चुनाव आयोग ने इन पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
प्रदर्शन में कौन-कौन से नेता शामिल हैं?
इस प्रदर्शन में 'आप' के मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज, आतिशी और अंकुश नारंग समेत पार्टी के प्रमुख नेता शामिल हैं। पार्टी ने युवाओं और आम नागरिकों से भी सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पहुँचने की अपील की है।
इस प्रदर्शन के बाद 'आप' का अगला कदम क्या होगा?
अभी तक 'आप' ने प्रदर्शन के बाद के कदमों की घोषणा नहीं की है। यह देखना अहम होगा कि क्या पार्टी इस मुद्दे को अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर उठाती है, और क्या चुनाव आयोग SIR से जुड़े आरोपों पर कोई स्पष्टीकरण जारी करता है।
राष्ट्र प्रेस
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