दिल्ली एसआईआर विवाद: 'आप' ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से माँगा इस्तीफा, 47.7 लाख नाम हटाने पर सवाल
सारांश
मुख्य बातें
आम आदमी पार्टी (AAP) ने 23 सितंबर 2026 को दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भारत निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। पार्टी नेताओं ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए ज्ञानेश कुमार से तत्काल पद छोड़ने की माँग की, यह कहते हुए कि दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची से कथित तौर पर 47.7 लाख नाम बाहर किए जाने से लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
मुख्य आरोप और माँगें
AAP के वरिष्ठ नेता और पंजाब प्रभारी मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान नए मतदाताओं के पंजीकरण और सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर चुनाव आयुक्तों ने करीब 14 बार आपत्तियाँ दर्ज कराईं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज किया गया। उन्होंने इस दावे के लिए इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें भी दोनों चुनाव आयुक्तों द्वारा पिछले 10 महीनों में कम-से-कम 14 बार आपत्तियाँ दर्ज किए जाने का उल्लेख है।
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग को एक निष्पक्ष संवैधानिक संस्था की तरह काम करना चाहिए था, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उसकी कार्यप्रणाली गंभीर संदेह के घेरे में है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि ज्ञानेश कुमार को पद छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो जाना चाहिए।
संजय सिंह और सौरभ भारद्वाज की माँगें
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पार्टी शुरू से ही एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही है। उनके अनुसार, चुनाव आयोग ने विभिन्न राज्यों में मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए हैं और इसकी सीधी जिम्मेदारी मुख्य चुनाव आयुक्त की बनती है। उन्होंने दिल्ली, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, महाराष्ट्र और बिहार में हुए चुनावों की प्रक्रिया की समीक्षा और स्वतंत्र जाँच की माँग की।
AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने और ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध कार्रवाई की माँग की।
आम जनता और मतदाताओं पर असर
चुनाव अधिकारियों के आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली की मौजूदा मतदाता सूची में करीब 1.45 करोड़ मतदाता थे। एसआईआर के तहत 97.5 लाख मतदाताओं के एन्यूमरेशन फॉर्म प्राप्त और डिजिटाइज किए गए, जबकि लगभग 47.62 लाख मतदाताओं को 'अनुपलब्ध' श्रेणी में रखा गया — इनमें अनुपस्थित, स्थायी रूप से स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट या अन्य कारण शामिल हैं। इन मतदाताओं को दावे और आपत्तियों के माध्यम से अपना नाम दोबारा सूची में शामिल कराने का अवसर दिया गया है।
गौरतलब है कि AAP ने इसी आँकड़े को आधार बनाकर चुनाव आयोग को घेरा है। पार्टी नेताओं का तर्क है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर होने के बाद प्रक्रिया की पारदर्शिता और सत्यापन व्यवस्था पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की दखल
यह ऐसे समय में आया है जब एसआईआर का मामला सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँच चुका है। 23 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने दिल्ली में 33 लाख से अधिक मतदाताओं को जारी नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ नोटिस प्रथम दृष्टया 'मैकेनिकल' तरीके से जारी किए गए प्रतीत होते हैं। अदालत ने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने को कहा है।
एसआईआर के तहत कई प्रमुख हस्तियों को भी नोटिस मिलने की खबर है — इनमें पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू के नाम शामिल हैं।
आगे क्या होगा
AAP के गुजरात प्रभारी और दिल्ली के पूर्व मंत्री गोपाल राय ने भी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय में अगली सुनवाई और चुनाव आयोग के औपचारिक जवाब पर सभी की नजरें टिकी हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में और गहराने के आसार हैं।