मनोज जरांगे का सरकार पर बड़ा हमला: जंतर-मंतर पुलिस तैनाती और मराठा आरक्षण पर उठाए सवाल
सारांश
मुख्य बातें
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटील ने 10 अक्टूबर 2026 को छत्रपति संभाजीनगर से केंद्र और महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उनकी यह प्रतिक्रिया कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिए जाने की घटना के बाद सामने आई। जरांगे पाटील ने आरोप लगाया कि लोकतांत्रिक ढंग से आवाज़ उठाने वाले छात्रों, किसानों और मराठा समुदाय के प्रतिनिधियों को व्यवस्थित तरीके से दबाया जा रहा है।
अभिजीत दिपके की हिरासत पर जरांगे की प्रतिक्रिया
जरांगे पाटील ने कहा कि उन्हें अभिजीत दिपके के मामले की पूरी जानकारी तो नहीं है, लेकिन उनका मानना है कि यह मुद्दा छात्रों से जुड़ा हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्या देश में लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करना और छात्रों की बात रखना भी गुनाह बन गया है? उनके अनुसार, छात्रों, किसानों और मराठा समाज के सवाल उठाने वालों को एकतरफा निशाना बनाया जा रहा है।
जंतर-मंतर पर पुलिस तैनाती पर सवाल
नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित आंदोलन का उल्लेख करते हुए जरांगे पाटील ने वहाँ भारी पुलिस तैनाती और ट्रैफिक पाबंदियों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जनता की मांगें सुनने के बजाय उन्हें गलत साबित करने की कोशिश की जाती है। यह रुख लोकतंत्र की मूल भावना के विरुद्ध है।
मराठा आरक्षण पर सरकार को घेरा
मराठा आरक्षण के मुद्दे पर जरांगे पाटील ने स्पष्ट कहा कि मराठा समाज की आरक्षण की माँग न्यायसंगत है, लेकिन सरकार उसे स्वीकार करने से बच रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण देने के बजाय समाज में फूट डालने की कोशिश हो रही है। उनके अनुसार, अधिकारियों के ज़रिए दबाव बनाया जाता है और आंदोलन को बदनाम करने के लिए मीडिया में भिन्न-भिन्न लोगों से बयान दिलवाए जाते हैं — जो कि उनके शब्दों में सरकार की ओर से 'खुला अन्याय' है।
जनता को दी चेतावनी
जरांगे पाटील ने कहा कि अब केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि पूरे देश की जनता सरकार की कार्यशैली को समझने लगी है। उन्होंने चेतावनी दी कि सत्ता और मंत्री पद का दुरुपयोग कर आम लोगों के साथ हो रहे अन्याय का जवाब जनता सही समय पर देगी। गौरतलब है कि मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से केंद्र में बना हुआ है और जरांगे पाटील के नेतृत्व में हुए आंदोलनों ने राज्य सरकार पर पहले भी कई बार दबाव बनाया है। यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब मराठा आरक्षण विवाद का कोई स्थायी समाधान अभी तक सामने नहीं आया है।