11 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के खिलाफ 20 से अधिक एफआईआर दर्ज कीं, 3,000 हिरासत में

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जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के खिलाफ 20 से अधिक एफआईआर दर्ज कीं, 3,000 हिरासत में

सारांश

दिल्ली में सीजेपी के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन ने बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया — 3,000 से अधिक लोग हिरासत में, 20 एफआईआर दर्ज, और ममता बनर्जी-केजरीवाल जैसे विपक्षी दिग्गज भी पकड़े गए। चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची पर घमासान अब सड़क से अदालत की ओर बढ़ता दिख रहा है।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में 20 से अधिक एफआईआर दर्ज कीं।
शनिवार को 3,000 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिनमें ममता बनर्जी , अरविंद केजरीवाल और पिनाराई विजयन जैसे विपक्षी नेता भी शामिल थे।
सीजेपी नेता अभिजीत दिपके , सौरव दास और आशुतोष रंका को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश पर रविवार को रिहा किया गया।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को गुरुग्राम से हिरासत में लिया गया, रविवार सुबह रिहा हुए।
प्रदर्शनकारियों की माँग थी कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार मतदाता सूची 'एसआईआर' में कथित गड़बड़ी की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।
पुलिस ने इंटरनेट सेवाएँ बाधित कीं , रास्ते बंद किए और छत्रसाल स्टेडियम सहित अन्य स्थानों पर हिरासत में लिए गए लोगों को रखा।

दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर 2026 को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में 20 से अधिक एफआईआर दर्ज कीं। प्रदर्शनकारियों पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करने के दौरान कानून हाथ में लेने, सरकारी कार्य में बाधा डालने और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। यह कार्रवाई राष्ट्रीय राजधानी में अभूतपूर्व सुरक्षा घेरे के बीच हुई, जब विपक्षी दल मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में कथित गड़बड़ी के विरोध में सड़कों पर उतरे।

मुख्य घटनाक्रम

अधिकारियों के अनुसार, शनिवार को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन में उतरे 3,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन समेत कई वरिष्ठ विपक्षी नेता शामिल थे। हिरासत में लिए गए अधिकांश लोगों को शनिवार देर शाम रिहा कर दिया गया।

इसके अलावा, इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी तीन लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया, जो चुनाव आयोग के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए राजधानी पहुँचे थे। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से शनिवार को हिरासत में लिया गया और रविवार सुबह रिहा कर दिया गया।

सीजेपी नेताओं की रिहाई

सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के अनुसार, एहतियातन हिरासत में लिए गए सीजेपी नेताओं — अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका — को रविवार को एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के आदेश पर रिहा किया गया। सिंह ने बताया कि इन तीनों को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था।

सुरक्षा व्यवस्था और पाबंदियाँ

अधिकारियों ने पहले ही प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था और बिना अनुमति जमा होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी थी। पुलिस ने इंटरनेट सेवाएँ बाधित कीं, रास्ते बंद किए और यातायात मार्ग बदले। यह सब इसलिए किया गया ताकि जुलाई में जंतर-मंतर पर सीजेपी के हिंसक प्रदर्शन की पुनरावृत्ति न हो। इन प्रतिबंधों के चलते प्रस्तावित आंदोलन शहर भर में कई छोटे-छोटे समूहों में बिखर गया। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को छत्रसाल स्टेडियम और विभिन्न पुलिस थानों में ले जाया गया।

विरोध का कारण

गौरतलब है कि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) प्रक्रिया में गड़बड़ी हुई है, और इसी को आधार बनाकर सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब देश में चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर राजनीतिक बहस तेज हो रही है। चुनाव आयोग ने एसआईआर में किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है।

आगे क्या होगा

दर्ज की गई एफआईआर में उल्लिखित अपराधों की जाँच जारी है। विपक्षी दलों ने हिरासत की कार्रवाई को लोकतांत्रिक विरोध के दमन के रूप में वर्णित किया है, जबकि पुलिस का कहना है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना उनका दायित्व है। आने वाले दिनों में यह मामला अदालत में भी पहुँचने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक हिरासत, इंटरनेट बंद और इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर रोक — यह सब बताता है कि सरकार इस प्रदर्शन को महज कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश की चुनौती के रूप में देख रही थी। सवाल यह है कि मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया पर उठाई गई आपत्तियाँ क्या वास्तविक चुनावी प्रश्न हैं या महज राजनीतिक लामबंदी — इसका जवाब अदालत में ही मिलेगा। ध्रुव राठी जैसे गैर-राजनीतिक चेहरे की हिरासत यह भी दर्शाती है कि पुलिस की कार्रवाई का दायरा दलगत राजनीति से आगे बढ़ा। बिना स्वतंत्र जाँच के एसआईआर पर विवाद सुलझेगा नहीं, और जब तक यह नहीं होता, विरोध की यह लहर और गहरी होती रहेगी।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज कीं?
पुलिस के अनुसार, सीजेपी के समर्थकों ने बिना अनुमति के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया, कानून हाथ में लिया, सरकारी कार्य में बाधा डाली और पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट की। इन्हीं आरोपों के आधार पर 20 से अधिक एफआईआर दर्ज की गईं।
विरोध प्रदर्शन का मुख्य कारण क्या था?
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में गड़बड़ी हुई है और इसी के विरोध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग की गई। चुनाव आयोग ने किसी भी गड़बड़ी से इनकार किया है।
हिरासत में लिए गए प्रमुख नेता कौन थे?
शनिवार को हिरासत में लिए गए लोगों में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन शामिल थे। अधिकांश नेताओं को देर शाम रिहा कर दिया गया।
ध्रुव राठी को हिरासत में क्यों लिया गया और वे कब रिहा हुए?
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ध्रुव राठी को शनिवार को गुरुग्राम स्थित उनके आवास से एहतियातन हिरासत में लिया गया। उन्हें रविवार सुबह रिहा कर दिया गया।
सीजेपी नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को कब छोड़ा गया?
सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह के अनुसार, तीनों नेताओं को रविवार को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया और मजिस्ट्रेट ने उन्हें रिहा करने का आदेश दिया।
राष्ट्र प्रेस
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