सीईसी ज्ञानेश कुमार विरोध प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने दर्ज कीं 3 एफआईआर, 750 प्रदर्शनकारी हिरासत में
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर के आसपास हुए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में तीन एफआईआर दर्ज की हैं। दो एफआईआर संसद मार्ग थाने में और एक कनॉट प्लेस थाने में दर्ज की गई हैं। पुलिस के अनुसार, ये मामले निषेधाज्ञा के बावजूद प्रदर्शनकारियों के एकत्र होने और प्रदर्शन करने के आरोपों से जुड़े हैं।
एफआईआर में क्या धाराएँ लगाई गई हैं
पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने में दर्ज दोनों एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए), 221, 132 और 3(5) लगाई गई हैं। वहीं, कनॉट प्लेस थाने में दर्ज तीसरी एफआईआर में बीएनएस की धारा 223, 221, 132 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ये एफआईआर पुलिस की दैनिक डायरी में दर्ज प्रविष्टियों के आधार पर दर्ज की गई हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के तौर पर नामित नहीं किया गया है, हालांकि प्रदर्शन के आयोजकों और इसमें शामिल संगठनों का उल्लेख एफआईआर में किया गया है।
प्रदर्शन का घटनाक्रम
प्रदर्शन से पहले नई दिल्ली जिले में बीएनएसएस की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई थी। इसके बावजूद कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), वाम दलों, छात्र संगठनों और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोग जंतर-मंतर की ओर जुटने की कोशिश करते रहे। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से करीब 750 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि दिल्ली के अन्य हिस्सों से भी लोगों को हिरासत में लिया गया।
गौरतलब है कि यह प्रदर्शन गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर हुआ, जिसने इसे प्रतीकात्मक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
विरोध की वजह: एसआईआर और मतदाता सूची विवाद
विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों का यह प्रदर्शन निर्वाचन आयोग द्वारा कराए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के विरोध में था। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। विपक्षी दलों का दावा है कि 13 करोड़ से अधिक नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए हैं — हालांकि ये विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
इसी मुद्दे पर विपक्षी दलों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग की है।
निर्वाचन आयोग का पक्ष
भारत निर्वाचन आयोग ने एसआईआर प्रक्रिया का बचाव करते हुए मतदाता सूचियों की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की बात कही है। आयोग ने हाल ही में 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर के बाद छूटे पात्र मतदाताओं को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश भी दिया है। आयोग के अनुसार यह प्रक्रिया मतदाता सूचियों को अधिक सटीक बनाने के लिए आवश्यक है।
आगे क्या होगा
पुलिस ने बताया कि तीनों मामलों की जाँच जारी है। यह देखना अहम होगा कि जाँच के दौरान किन व्यक्तियों या संगठनों को आरोपी बनाया जाता है। यह मामला आगामी चुनावी प्रक्रियाओं और निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता को लेकर बहस को और तीखा कर सकता है।