जंतर-मंतर प्रदर्शन: IYC ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, पुलिस ने ₹750 लोगों को हिरासत में लिया
सारांश
मुख्य बातें
इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने 3 अक्टूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया था। IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब की ओर से दाखिल इस याचिका में अदालत से हस्तक्षेप करने और संगठन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दिलाने की माँग की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला ऐसे समय में उच्च न्यायालय पहुँचा है, जब 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। उस प्रदर्शन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), आम आदमी पार्टी (AAP), वाम दल, छात्र संगठन और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने CEC के इस्तीफे की माँग की थी।
गौरतलब है कि प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर की ओर बढ़ने और वहाँ एकत्र होने का प्रयास करते रहे।
तीन एफआईआर दर्ज, करीब 750 हिरासत में
प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज कीं — दो संसद मार्ग थाने में और एक कनॉट प्लेस थाने में। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने की दोनों FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 223(A), 221, 132 और 3(5) लगाई गई हैं, जबकि कनॉट प्लेस थाने की FIR में BNS की धाराएँ 223, 221, 132 और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये FIR दैनिक डायरी प्रविष्टियों के आधार पर दर्ज की गई हैं और फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया है, हालाँकि प्रदर्शन के आयोजकों और संबद्ध संगठनों का उल्लेख अवश्य किया गया है। प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से करीब 750 लोगों को हिरासत में लिया गया।
IYC की याचिका में क्या है
IYC की याचिका में कहा गया है कि संगठन चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखना चाहता है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से मना कर दिया। याचिका में उच्च न्यायालय से पुलिस के इस फैसले में हस्तक्षेप करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दिलाने की माँग की गई है।
विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष
विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए। यह विपक्ष का दावा है। दूसरी ओर, भारत निर्वाचन आयोग ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने की नियमित कवायद बताया है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सरकार के बीच चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर तनाव चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि निषेधाज्ञा और अनुमति न देने का निर्णय संवैधानिक रूप से संरक्षित शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सवाल खड़ा करता है।
आगे क्या होगा
दिल्ली उच्च न्यायालय में IYC की याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी है। इस बीच, दिल्ली पुलिस की FIR में नामित संगठनों और आयोजकों की कानूनी स्थिति पर नज़र बनी रहेगी। यह मामला अब न्यायपालिका के सामने है और इसका फैसला भविष्य में विरोध प्रदर्शनों की अनुमति प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है।