3 अक्टूबर 2026
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जंतर-मंतर प्रदर्शन: IYC ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, पुलिस ने ₹750 लोगों को हिरासत में लिया

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जंतर-मंतर प्रदर्शन: IYC ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की, पुलिस ने ₹750 लोगों को हिरासत में लिया

सारांश

जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर IYC दिल्ली हाई कोर्ट पहुँची। 2 अक्टूबर के प्रदर्शन में करीब 750 लोग हिरासत में लिए गए और तीन FIR दर्ज हुईं। विवाद की जड़ में है मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया, जिस पर विपक्ष ने 13 करोड़ नाम हटाने का आरोप लगाया है।

मुख्य बातें

IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब ने 3 अक्टूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर जंतर-मंतर प्रदर्शन की अनुमति माँगी।
2 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन FIR दर्ज कीं — दो संसद मार्ग थाने में, एक कनॉट प्लेस थाने में।
जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से करीब 750 लोगों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शन से पहले BNSS की धारा 163 के तहत नई दिल्ली में निषेधाज्ञा लागू थी।
विपक्ष का आरोप है कि SIR प्रक्रिया में 13 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए; चुनाव आयोग इसे नियमित शुद्धिकरण प्रक्रिया बताता है।

इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने 3 अक्टूबर को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया गया था। IYC अध्यक्ष उदय भानु चिब की ओर से दाखिल इस याचिका में अदालत से हस्तक्षेप करने और संगठन को शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दिलाने की माँग की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला ऐसे समय में उच्च न्यायालय पहुँचा है, जब 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और उसके आसपास के इलाकों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुआ था। उस प्रदर्शन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस), आम आदमी पार्टी (AAP), वाम दल, छात्र संगठन और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने CEC के इस्तीफे की माँग की थी।

गौरतलब है कि प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी थी। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग जंतर-मंतर की ओर बढ़ने और वहाँ एकत्र होने का प्रयास करते रहे।

तीन एफआईआर दर्ज, करीब 750 हिरासत में

प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज कीं — दो संसद मार्ग थाने में और एक कनॉट प्लेस थाने में। पुलिस के अनुसार, संसद मार्ग थाने की दोनों FIR में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 223(A), 221, 132 और 3(5) लगाई गई हैं, जबकि कनॉट प्लेस थाने की FIR में BNS की धाराएँ 223, 221, 132 और 3(5) के तहत कार्रवाई की गई है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ये FIR दैनिक डायरी प्रविष्टियों के आधार पर दर्ज की गई हैं और फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया है, हालाँकि प्रदर्शन के आयोजकों और संबद्ध संगठनों का उल्लेख अवश्य किया गया है। प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों से करीब 750 लोगों को हिरासत में लिया गया।

IYC की याचिका में क्या है

IYC की याचिका में कहा गया है कि संगठन चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखना चाहता है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से मना कर दिया। याचिका में उच्च न्यायालय से पुलिस के इस फैसले में हस्तक्षेप करने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत दिलाने की माँग की गई है।

विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग का पक्ष

विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए। यह विपक्ष का दावा है। दूसरी ओर, भारत निर्वाचन आयोग ने SIR प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने की नियमित कवायद बताया है।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष और सरकार के बीच चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर तनाव चरम पर है। आलोचकों का कहना है कि निषेधाज्ञा और अनुमति न देने का निर्णय संवैधानिक रूप से संरक्षित शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर सवाल खड़ा करता है।

आगे क्या होगा

दिल्ली उच्च न्यायालय में IYC की याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी है। इस बीच, दिल्ली पुलिस की FIR में नामित संगठनों और आयोजकों की कानूनी स्थिति पर नज़र बनी रहेगी। यह मामला अब न्यायपालिका के सामने है और इसका फैसला भविष्य में विरोध प्रदर्शनों की अनुमति प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसने विपक्ष को एक बड़ा राजनीतिक हथियार दे दिया है — जब विरोध को रोका जाता है, तो वह मुद्दा खुद ही सुर्खियाँ बन जाता है। असली सवाल मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया का है: 13 करोड़ नाम हटाने का विपक्षी दावा अभी तक स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुआ है, और चुनाव आयोग ने भी पारदर्शी डेटा सार्वजनिक नहीं किया है। जब तक दोनों पक्ष सत्यापन-योग्य आँकड़े सामने नहीं रखते, यह विवाद राजनीतिक तापमान बढ़ाता रहेगा। दिल्ली उच्च न्यायालय का फैसला केवल एक याचिका का नहीं, बल्कि विरोध के संवैधानिक अधिकार की सीमाओं का भी परीक्षण होगा।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IYC ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका क्यों दाखिल की?
इंडियन यूथ कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति न दिए जाने के फैसले को चुनौती देने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। संगठन मतदाता सूची की SIR प्रक्रिया और CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी बात रखना चाहता था।
2 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन में क्या हुआ?
2 अक्टूबर को कांग्रेस, AAP, वाम दलों और सिविल सोसाइटी के लोगों ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने पहले से BNSS धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की थी और करीब 750 लोगों को हिरासत में लिया गया।
दिल्ली पुलिस ने कितनी FIR दर्ज कीं और किन धाराओं में?
दिल्ली पुलिस ने तीन FIR दर्ज कीं — दो संसद मार्ग थाने में BNS की धाराएँ 223(A), 221, 132 और 3(5) के तहत, और एक कनॉट प्लेस थाने में BNS की धाराएँ 223, 221, 132 और 3(5) के तहत। फिलहाल किसी व्यक्ति या संगठन को आरोपी नामित नहीं किया गया है।
मतदाता सूची SIR विवाद क्या है?
विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए। भारत निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने की नियमित कवायद बताता है।
दिल्ली हाई कोर्ट में IYC की याचिका पर आगे क्या होगा?
याचिका पर सुनवाई की तारीख अभी तय होनी है। अदालत का फैसला न केवल इस प्रदर्शन की अनुमति तय करेगा, बल्कि निषेधाज्ञा के दौरान शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार की सीमाओं पर भी महत्वपूर्ण मिसाल कायम कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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